गोंडा मेडिकल कॉलेज में मरीज से मारपीट का मामला: 10 महीने बाद डॉक्टरों और स्टाफ पर दर्ज हुआ केस

गोंडा: गोंडा मेडिकल कॉलेज में मरीज और उसके भाई के साथ हुई मारपीट के मामले में 10 महीने बाद पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए डॉक्टरों और स्टाफ के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है। यह मामला तब सामने आया जब घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ और पीड़ित ने डीआईजी देवीपाटन रेंज से न्याय की गुहार लगाई।

???? घटना 5 अगस्त 2024 की रात की

घटना 5 अगस्त 2024 की रात की है, जब मोहम्मद अहमद को ब्लड प्रेशर बढ़ने के कारण उनके भाई सद्दाम हुसैन उन्हें मेडिकल कॉलेज की इमरजेंसी में लेकर पहुंचे थे। इलाज के दौरान किसी बात को लेकर विवाद हुआ और दोनों भाइयों के साथ डॉक्टरों व स्टाफ ने कथित तौर पर मारपीट की।

???? वायरल वीडियो बना सबूत

घटना का वीडियो वायरल होने के बाद इस मामले ने तूल पकड़ा। वीडियो में मरीज और तीमारदार के साथ हुई शारीरिक मारपीट स्पष्ट रूप से दिखाई दे रही है। इसके बावजूद, तत्काल कोई कार्रवाई नहीं की गई थी।

???? किन-किन पर दर्ज हुआ केस?

पुलिस ने 11 लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है, जिनमें ये नाम शामिल हैं:

  • डॉक्टर अतुल मिश्रा

  • डॉक्टर एमके गुप्ता

  • डॉक्टर अजय

  • फार्मासिस्ट एसके आजाद सिंह

  • वार्ड बॉय अश्वनी कश्यप

  • और 6 अन्य अज्ञात व्यक्ति

इनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 191(2), 127(2), 115(2), 352, 351(3) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

????️‍♂️ जांच अधिकारी नियुक्त

मामले की जांच उप निरीक्षक शुभम दुबे को सौंपी गई है। नगर कोतवाल विवेक कुमार त्रिवेदी ने बताया कि वीडियो फुटेज की भी तकनीकी जांच की जा रही है ताकि साक्ष्य और गवाहों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जा सके।

???? पीड़ित बोले- डीआईजी से मिलने के बाद मिला न्याय

पीड़ित मोहम्मद अहमद ने बताया कि उन्होंने डीआईजी के सामने पेश होकर पूरी आपबीती बताई। इसके बाद ही पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। उन्होंने कहा, “अगर हम डीआईजी के पास नहीं जाते तो शायद अब तक न्याय नहीं मिलता।”

???? मेडिकल कॉलेज प्रशासन की प्रतिक्रिया

गोंडा मेडिकल कॉलेज की प्रधानाचार्य ने कहा कि मुकदमे की जानकारी मिलते ही आंतरिक जांच कराई जाएगी। इससे पहले जब मामला सामने आया था तो जांच के आदेश दिए गए थे लेकिन अब तक कोई स्पष्ट कार्रवाई नहीं हुई थी।


???? निष्कर्ष:

गोंडा मेडिकल कॉलेज में मरीज के साथ हुई मारपीट का मामला प्रशासनिक उदासीनता का उदाहरण बन चुका था। 10 महीने की देरी के बाद कार्रवाई यह दिखाता है कि यदि पीड़ित अपनी आवाज उठाए तो व्यवस्था में हलचल आती है। अब देखना यह होगा कि जांच के बाद दोषियों पर कब तक ठोस कार्रवाई होती है।

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