गोंडा: बृजभूषण ने मुस्लिम बच्चों को हाथों से खिलाया केक, रितेश्वर महाराज ने राइफल से फायरिंग कर दिखाई काबिलियत

उत्तर प्रदेश: के गोंडा जिले में भाजपा के पूर्व सांसद और बाहुबली नेता बृजभूषण शरण सिंह ने गुरुवार को अपने 69वें जन्मदिन का जश्न मनाया। इस अवसर पर उन्होंने नवाबगंज कस्बे में दो मुस्लिम बच्चों के साथ केक काटा और उन्हें अपने हाथों से खिलाया।

दोस्तों के साथ केक काटा

बृजभूषण ने बच्चों को अपनी खुली जीप में बैठाया, उन्हें माला पहनाई और केक खाने का आनंद साझा किया। दोनों बच्चे — हसन अहमद खान (10) और अब्दुल नबी (10) — नवाबगंज के संचारी मोहल्ले के निवासी हैं। ये दोनों अपने घर से पैसे लेकर बृजभूषण के लिए केक लाए थे। वीडियो में बृजभूषण के साथ बच्चों की खुशी और उत्साह साफ नजर आ रही है।

बृजभूषण ने कहा, “मेरे क्षेत्र के लोग मुझे नेताजी के नाम से प्यार करते हैं। दोनों बच्चे अपने घर से पैसा लेकर केक लाए, इसलिए मैंने उन्हें अपनी गाड़ी के बोनट पर बैठा कर खिलाया।”

राष्ट्र कथा और रितेश्वर महाराज की फायरिंग

जन्मदिन के मौके पर सद्गुरु रितेश्वर महाराज को राष्ट्र कथा कराई गई। कथा के समापन पर महाराज को सांसद करण भूषण सिंह और विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने नेशनल शूटिंग रेंज पर ले जाकर निशाना लगाना और फायरिंग दिखाने का अवसर दिया। रितेश्वर महाराज ने राइफल थामी और 4 राउंड फायर किए।

इस दौरान सांसद करण भूषण सिंह के बेटे ने भी महाराज को बंदूक पकड़ना सिखाया।

भव्य काफिला और स्वागत

बृजभूषण शरण सिंह ने अपने जन्मदिन पर लगभग 100 वाहनों का भव्य काफिला निकाला, जो नंदिनी नगर महाविद्यालय और नवाबगंज बाजार तक पहुंचा। इस अवसर पर बृजभूषण की मौजूदगी में मुस्लिम बच्चों के साथ सामूहिक उत्सव का दृश्य लोगों के लिए यादगार बन गया।

सद्गुरु रितेश्वर महाराज को बृजभूषण की जन्मस्थली, जनता दरबार स्थल और अपने आवास पर भी ले जाया गया। महाराज ने अस्तबल का निरीक्षण किया और घोड़ों को गुड़ खिलाया।

सामाजिक संदेश

बृजभूषण शरण सिंह हर साल अपने जन्मदिन पर मुस्लिम समाज और बच्चों के साथ इसी तरह का जश्न मनाते हैं। उन्होंने कभी मुस्लिम समाज के खिलाफ कोई नकारात्मक बयान नहीं दिया है, बल्कि अपने बयानों में समुदाय के साथ संबंधों की अहमियत को बताया है।

बृजभूषण शरण सिंह का जन्मदिन समारोह सामाजिक सद्भाव और सामूहिक उत्सव का प्रतीक रहा। बच्चों के साथ केक काटना और रितेश्वर महाराज द्वारा राइफल फायरिंग कार्यक्रम ने इसे राजनीतिक और सांस्कृतिक दृष्टि से विशेष बना दिया।

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