चूहों-कुत्तों के वीडियो पड़े भारी: गोंडा मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल हटाए गए, डॉ. बीना सिंह बनीं कार्यवाहक

गोंडा। गोंडा मेडिकल कॉलेज से जुड़ा चूहों और कुत्तों का वायरल वीडियो आखिरकार प्रशासनिक कार्रवाई का कारण बन गया। कॉलेज के प्रिंसिपल प्रोफेसर धनंजय श्रीकांत कोटस्थाने को उनके पद से हटा दिया गया है। उनकी जगह बायोकेमेस्ट्री विभाग की आचार्य डॉ. बीना सिंह को मेडिकल कॉलेज का कार्यवाहक प्रधानाचार्य नियुक्त किया गया है।

प्रोफेसर धनंजय श्रीकांत कोटस्थाने को प्रिंसिपल पद से हटाकर उनके मूल पद, विभागाध्यक्ष (पैथोलॉजी विभाग), गोंडा मेडिकल कॉलेज में वापस भेज दिया गया है। यह निर्णय वायरल वीडियो के सामने आने के बाद गठित की गई जांच कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है।

जांच रिपोर्ट के बाद हुआ बड़ा फैसला

गौरतलब है कि मेडिकल कॉलेज के वार्डों में चूहे और कुत्तों के घूमने के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुए थे, जिससे गोंडा मेडिकल कॉलेज और उत्तर प्रदेश स्वास्थ्य विभाग की छवि को गंभीर नुकसान पहुंचा था। मामला राष्ट्रीय स्तर तक चर्चा में आया था।

इन वीडियो के सामने आने के बाद शासन स्तर पर जांच कमेटी गठित की गई थी। कमेटी ने हाल ही में गोंडा मेडिकल कॉलेज पहुंचकर मौके पर जांच की और वायरल वीडियो से जुड़े तथ्यों का सत्यापन किया। रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद ही प्रिंसिपल पर कार्रवाई की गई।

डॉ. बीना सिंह को सौंपी गई जिम्मेदारी

डॉ. बीना सिंह वर्तमान में गोंडा मेडिकल कॉलेज में बायोकेमेस्ट्री विभाग की आचार्य हैं। उन्हें अब कॉलेज का कार्यवाहक प्रधानाचार्य बनाया गया है। फिलहाल मेडिकल कॉलेज में किसी स्थायी प्रिंसिपल की नियुक्ति नहीं हुई है और संस्थान का संचालन कार्यवाहक प्रधानाचार्य के नेतृत्व में ही किया जाएगा।

कर्मचारियों और डॉक्टरों ने फैसले का किया स्वागत

इस कार्रवाई के बाद मेडिकल कॉलेज में तैनात कई डॉक्टरों और कर्मचारियों ने फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार और स्वास्थ्य मंत्री का आभार जताते हुए उम्मीद जताई कि अब कॉलेज की व्यवस्थाओं में सुधार होगा।

जिला प्रशासन ने प्रोफेसर धनंजय श्रीकांत कोटस्थाने को औपचारिक रूप से रिलीव कर उनके मूल पद पर भेज दिया है, वहीं नई कार्यवाहक प्रिंसिपल डॉ. बीना सिंह को तत्काल चार्ज ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं।

गोंडा मेडिकल कॉलेज में वायरल वीडियो से उपजी बदनामी के बाद हुई यह कार्रवाई प्रशासन की सख्ती को दर्शाती है। उम्मीद की जा रही है कि नए नेतृत्व में अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार होगा और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिलेंगी।

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