गोण्डा में रिश्तों का खून: UPSC की तैयारी और पैसों के तनाव में छोटे भाई ने ही की सगे भाई की निर्मम हत्या

गोण्डा | उत्तर प्रदेश के गोण्डा जिले से एक ऐसा दिल दहला देने वाला हत्याकांड सामने आया है, जिसने न केवल पुलिस बल्कि पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया। थाना कोतवाली कर्नलगंज क्षेत्र में हुई युवक की हत्या के मामले में पुलिस ने जो खुलासा किया है, वह रिश्तों, भरोसे और पारिवारिक मूल्यों पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

जिस हत्या को शुरू में अज्ञात बदमाशों की वारदात माना जा रहा था, उसकी साजिश किसी बाहरी ने नहीं, बल्कि सगे छोटे भाई ने ही रची थी। यूपीएससी की तैयारी, आर्थिक तनाव और पारिवारिक कलह ने एक भाई को इस कदर अंधा कर दिया कि उसने अपने ही बड़े भाई की बेरहमी से हत्या कर दी।


क्या था पूरा मामला?

दिनांक 03 फरवरी 2026 की रात शिवशंकर दुबे (उम्र लगभग 30 वर्ष), निवासी दुल्हिनपुरवा, मौजा नरायनपुर मांझा, थाना कोतवाली कर्नलगंज, की चाकू से गोदकर हत्या कर दी गई थी। शव खेत के पास पड़ा मिला, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई।

घटना की सूचना मिलते ही पुलिस के उच्चाधिकारी मौके पर पहुंचे।

  • डॉग स्क्वॉड

  • फील्ड यूनिट

  • फॉरेंसिक टीम

ने घटनास्थल से अहम साक्ष्य जुटाए। मृतक के पिता देवीदयाल दुबे की तहरीर पर थाना कर्नलगंज में पांच नामजद अभियुक्तों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया, लेकिन जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को कहानी में कई विरोधाभास नजर आए।


एसपी के निर्देश पर बनीं विशेष टीमें

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक गोण्डा विनीत जायसवाल के निर्देश पर:

  • अपर पुलिस अधीक्षक पश्चिमी राधेश्याम राय

  • क्षेत्राधिकारी कर्नलगंज अभिषेक दवाच्या

के नेतृत्व में तीन विशेष पुलिस टीमें गठित की गईं।
साथ ही एसओजी और सर्विलांस टीम को भी जांच में लगाया गया।


जांच में निकला चौंकाने वाला सच

इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस, कॉल डिटेल, तकनीकी और मैनुअल साक्ष्यों के आधार पर पुलिस को शक हुआ कि हत्या के पीछे घर के ही किसी व्यक्ति का हाथ हो सकता है।

कड़ी पूछताछ के बाद पुलिस ने मृतक के छोटे भाई अमरनाथ दुबे को हिरासत में लिया। जब उससे सख्ती से पूछताछ की गई, तो उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।


UPSC की तैयारी और पैसों का तनाव बना हत्या की वजह

पुलिस पूछताछ में आरोपी ने बताया कि:

  • उसने इंटरमीडिएट और स्नातक की पढ़ाई इलाहाबाद से की

  • वर्ष 2023 से 2025 तक दिल्ली में रहकर यूपीएससी की तैयारी की

  • बाद में लखनऊ में भी तैयारी करता रहा

उसका आरोप था कि परिवार की आर्थिक व्यवस्था बड़े भाई शिवशंकर दुबे के हाथ में थी और उसे पढ़ाई के लिए पर्याप्त आर्थिक मदद नहीं मिल रही थी। धीरे-धीरे उसके मन में यह भावना घर कर गई कि बड़ा भाई जानबूझकर उसका भविष्य बर्बाद कर रहा है।


पहले खरीदा चाकू, फिर रची साजिश

जब माता-पिता कल्पवास के लिए प्रयागराज चले गए, तो आरोपी ने मौके का फायदा उठाया।

  • 27 जनवरी को कर्नलगंज बस स्टॉप से ₹60 में चाकू खरीदा

  • 31 जनवरी को चाकू की धार तेज करवाई

  • पूरी योजना पहले से तैयार कर ली


खेत में बुलाकर उतारा मौत के घाट

घटना की रात आरोपी ने खेत में पानी लगाने का बहाना बनाकर बड़े भाई को घर से बाहर बुलाया। सुनसान जगह पर पहुंचते ही उसने जैकेट में छिपाए चाकू से एक के बाद एक कई वार किए।

मृतक ने बचने की कोशिश की, जिससे आरोपी के हाथों में भी चोटें आईं, लेकिन कुछ ही देर में शिवशंकर दुबे की मौके पर ही मौत हो गई।


हत्या के बाद रचा झूठा ड्रामा

हत्या के बाद आरोपी ने:

  • मृतक की जेब से ₹31,500 निकाले

  • पैसों को खेत की मेड़ में मिट्टी से दबा दिया

  • खून लगा चाकू गेहूं के खेत में फेंक दिया

इसके बाद गांव की ओर भागते हुए शोर मचाने लगा कि किसी अज्ञात व्यक्ति ने उसके भाई की हत्या कर दी है, ताकि खुद को मासूम साबित कर सके।


बरामदगी और कानूनी कार्रवाई

पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर:

  • ₹31,500 नकद (₹500 के नोट, कुछ पर खून के धब्बे)

  • हत्या में प्रयुक्त चाकू

बरामद कर लिया।

आरोपी अमरनाथ दुबे पुत्र देवीदयाल दुबे के खिलाफ
मु0अ0सं0 67/26, धारा 103(1), 315 BNS के तहत मुकदमा दर्ज कर उसे न्यायालय भेज दिया गया है।


पुलिस टीम को मिला इनाम

इस सनसनीखेज हत्याकांड के सफल अनावरण पर पुलिस अधीक्षक द्वारा ₹25,000 का नकद पुरस्कार घोषित किया गया।

गिरफ्तारी करने वाली टीम में शामिल रहे:

  • प्रभारी निरीक्षक नरेन्द्र प्रताप राय

  • उपनिरीक्षक बृजराज प्रसाद

  • एसओजी प्रभारी गौरव सिंह तोमर व उनकी टीम

  • अन्य पुलिसकर्मी

गोण्डा का यह मामला सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि आर्थिक तनाव, मानसिक दबाव और टूटते पारिवारिक रिश्तों की भयावह तस्वीर है। यूपीएससी जैसी प्रतियोगी परीक्षा का दबाव और संवाद की कमी ने एक भाई को इतना अंधा कर दिया कि उसने अपने ही सगे भाई की जान ले ली।

यह घटना समाज को यह सोचने पर मजबूर करती है कि यदि समय रहते मानसिक, आर्थिक और पारिवारिक समस्याओं का समाधान न किया जाए, तो वे किस तरह एक भयानक त्रासदी में बदल सकती हैं।

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