लखनऊ: के दुबग्गा स्थित शकुंतला विश्वविद्यालय परिसर में संचालित बैंक ऑफ बड़ौदा शाखा सोमवार को उस समय हंगामे का केंद्र बन गई, जब 25 से अधिक खाताधारकों ने बैंक पहुंचकर जोरदार प्रदर्शन शुरू कर दिया। नाराज ग्राहकों ने बैंक के अंदर नारेबाजी की, कामकाज ठप करा दिया और अपनी जमा पूंजी वापस दिलाने की मांग पर अड़ गए।
प्रदर्शन के दौरान कई ग्राहक बैंक के फर्श पर बैठ गए, जबकि कुछ लोग लेट गए। इससे शाखा का सामान्य कामकाज प्रभावित हो गया और बैंक प्रबंधन को स्थिति संभालने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
एफडी के नाम पर लाखों रुपये जमा कराने का आरोप
प्रदर्शन कर रहे खाताधारकों का आरोप है कि बैंक मित्र शिवा राव और उसके सहयोगी दीपक ने उन्हें अधिक ब्याज का लालच दिया था। आरोप है कि दोनों ने ग्राहकों को फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) कराने का भरोसा देकर लाखों रुपये जमा कराए।
हालांकि बाद में ग्राहकों को पता चला कि उनके नाम पर कोई वैध एफडी बैंक रिकॉर्ड में मौजूद नहीं है। इससे लोगों को अपनी जमा पूंजी डूबने का डर सताने लगा।
ग्राहकों का कहना है कि उन्होंने बैंकिंग व्यवस्था पर भरोसा करके अपनी मेहनत की कमाई निवेश की थी, लेकिन अब वे आर्थिक संकट का सामना कर रहे हैं।
पहले भी हो चुका है प्रदर्शन
यह मामला नया नहीं है। पीड़ित खाताधारकों ने बताया कि 22 मई को उन्होंने बैंक के हेड ऑफिस में भी प्रदर्शन किया था। उस दौरान बैंक अधिकारियों के साथ बैठक हुई थी और उन्हें आश्वासन दिया गया था कि 22 जून तक उनकी रकम वापस कर दी जाएगी।
लेकिन निर्धारित समय सीमा बीत जाने के बावजूद जब पैसा वापस नहीं मिला तो लोगों का धैर्य जवाब दे गया और वे फिर से शाखा पहुंचकर प्रदर्शन करने लगे।
बैंक के अंदर धरने पर बैठे ग्राहक
सोमवार दोपहर करीब 12 बजे बड़ी संख्या में खाताधारक बैंक पहुंचे। उन्होंने बैंक का मुख्य प्रवेश द्वार घेर लिया और शाखा के भीतर ही धरना शुरू कर दिया।
प्रदर्शनकारियों का साफ कहना था कि जब तक उनकी जमा पूंजी वापस नहीं मिलेगी, तब तक बैंक में कोई काम नहीं होने दिया जाएगा। इसके चलते बैंक आने वाले अन्य ग्राहकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा।
लाखों रुपये फंसे होने का दावा
प्रदर्शन में शामिल लोगों ने अपनी-अपनी जमा राशि के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि कई परिवारों की वर्षों की बचत इस मामले में फंस गई है।
पीड़ितों के अनुसार कुछ लोगों के लाखों रुपये अटके हुए हैं। इनमें महिलाओं, बुजुर्गों और मध्यमवर्गीय परिवारों की बड़ी संख्या शामिल है। कई लोगों ने कहा कि उन्होंने बच्चों की पढ़ाई, शादी और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर यह रकम जमा की थी।
अब पैसा न मिलने के कारण वे गंभीर आर्थिक कठिनाइयों से गुजर रहे हैं।
पुलिस पहुंची मौके पर
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत कर उन्हें शांत कराने का प्रयास किया।
हालांकि प्रदर्शनकारी अपनी मांगों पर अड़े रहे और उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकलता, वे आंदोलन जारी रखेंगे।
स्थिति को देखते हुए बैंक परिसर के आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई।
आरोपी पहले ही हो चुके हैं गिरफ्तार
मामले में बैंक मित्र शिवा राव और उसके सहयोगी दीपक को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसियां कथित वित्तीय अनियमितताओं और ग्राहकों की रकम के लेनदेन की जांच कर रही हैं।
सूत्रों के अनुसार कुछ खाताधारकों को पहले चरण में आंशिक रकम वापस भी मिली थी, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में लोग अपने पैसे का इंतजार कर रहे हैं।
इसी वजह से लोगों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।
ग्राहकों की सबसे बड़ी मांग
प्रदर्शन कर रहे लोगों की मुख्य मांग है कि उनकी पूरी जमा राशि जल्द से जल्द वापस की जाए। साथ ही मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
ग्राहकों का कहना है कि केवल गिरफ्तारी से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि उनकी मेहनत की कमाई वापस मिलनी चाहिए।



