विश्व पर्यावरण दिवस से पहले गोंडा में सागौन के 40 पेड़ काटे गए: ठेकेदारों पर कार्रवाई नहीं, ग्रामीणों ने की सख्त कदम उठाने की मांग

गोंडा: विश्व पर्यावरण दिवस से ठीक एक दिन पहले गोंडा जिले के खरगूपुर थाना क्षेत्र में सागौन के 40 से अधिक पेड़ों की अवैध कटाई का मामला सामने आया है। यह पेड़ प्रतिबंधित श्रेणी में आते हैं और इनकी कटाई के लिए विशेष अनुमति की आवश्यकता होती है, फिर भी स्थानीय सूत्रों के अनुसार बिना किसी वैध अनुमति के ठेकेदारों द्वारा पेड़ काटे गए।

वन विभाग की भूमिका संदिग्ध

स्थानीय ग्रामीणों का आरोप है कि यह पूरी कार्रवाई वन विभाग की मिलीभगत से की गई। ठेकेदार खुलेआम सागौन जैसे कीमती और प्रतिबंधित प्रजाति के पेड़ों को काटकर ले गए, लेकिन वन विभाग ने न तो कोई रोक लगाई और न ही अब तक किसी के खिलाफ कार्रवाई की गई। यह लापरवाही प्रशासनिक स्तर पर भी चिंता का विषय बन गई है।

“हमने कई बार वन विभाग के अधिकारियों को सूचना दी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। अब जब पेड़ पूरी तरह साफ हो चुके हैं, तो विभाग मौन है,” — स्थानीय ग्रामीण।


पर्यावरण संरक्षण की उड़ रही धज्जियां

इस घटना से एक तरफ जहां पर्यावरण संरक्षण के दावों की पोल खुली है, वहीं दूसरी ओर सरकारी तंत्र की निष्क्रियता भी उजागर हुई है। सागौन का पेड़ न केवल वाणिज्यिक दृष्टि से महत्वपूर्ण होता है, बल्कि पर्यावरणीय संतुलन के लिए भी जरूरी होता है।

विशेषज्ञों के अनुसार,

“सागौन जैसे पेड़ों का कटान जलवायु और पारिस्थितिकी तंत्र पर गहरा प्रभाव डालता है। इसके बिना स्थानीय वन्यजीवों का आवास भी प्रभावित होता है।”


ग्रामीणों की मांग: हो तत्काल जांच और कठोर कार्रवाई

इस अवैध कटाई की जानकारी मिलने पर ग्रामीणों में आक्रोश है। उन्होंने उच्च अधिकारियों से इस मामले की जांच कराने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वे धरना-प्रदर्शन करेंगे।


वन विभाग की चुप्पी बनी चिंता का विषय

अब तक न तो कोई एफआईआर दर्ज हुई है, और न ही कटाई में संलिप्त ठेकेदारों को नोटिस भेजा गया है। सूत्रों की मानें तो इस पूरे मामले में कई अंदरूनी अधिकारियों की मिलीभगत भी हो सकती है, जिसकी जांच एक स्वतंत्र एजेंसी से कराए जाने की मांग उठ रही है।


निष्कर्ष

पर्यावरण दिवस के ठीक पहले यह घटना प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा और सरकारी जिम्मेदारी पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। जब प्रतिबंधित पेड़ों की इस तरह से अवैध कटाई होती है और प्रशासनिक तंत्र निष्क्रिय रहता है, तब यह समाज के हर जागरूक नागरिक के लिए चिंता का विषय बन जाता है। जरूरी है कि इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप कर दोषियों को सजा दिलाई जाए, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं न दोहराई जा सकें।

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