गोंडा: गोंडा जिले के परसपुर थाना क्षेत्र में बिजली विभाग की 7 लाख रुपए की केबल चोरी का खुलासा हुआ है। इस मामले में पुलिस ने विद्युत अनुरक्षण का कार्य करने वाले 6 कर्मचारियों को गिरफ्तार किया है। ये कर्मचारी बलमत्थर क्षेत्र से 120 केबी विद्युत केबल चोरी कर उसे करीब 20 किलोमीटर दूर एक स्थान पर छिपाकर रखे हुए थे।
गिरफ्तार आरोपियों में राशिद, इस्माइल, विजय, मकदूम, नाजिर और अमन शामिल हैं, जो सभी बिजली विभाग के ठेके पर कार्यरत थे। पुलिस ने इनकी निशानदेही पर 120 केबल के ड्रम बरामद किए, जिनकी अनुमानित कीमत लगभग 7 लाख रुपए बताई जा रही है।
कैसे हुआ खुलासा?
परसपुर थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि बिजली विभाग के कुछ कर्मचारी विभागीय सामग्री का दुरुपयोग कर चोरी में संलिप्त हैं। जांच के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि बलमत्थर क्षेत्र में काम के दौरान केबल को जानबूझकर हटाया गया और फिर चोरी कर छिपा दिया गया।
पुलिस की टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर दबिश देकर चोरी की गई केबल बरामद कर ली। सभी आरोपियों को मौके से हिरासत में लिया गया।
ठेकेदारी सिस्टम पर भी उठे सवाल
इस घटना ने बिजली विभाग में कार्यरत ठेकेदार व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, अक्सर बिना निगरानी के संविदा कर्मी संवेदनशील कार्यों को अंजाम देते हैं, जिससे इस प्रकार की घटनाएं होती हैं।
“इन कर्मचारियों की पृष्ठभूमि की जांच के बिना उन्हें केबल और उपकरण जैसे महंगे संसाधनों की जिम्मेदारी सौंप दी जाती है,” — बिजली विभाग का एक अधिकारी (नाम गोपनीय)।
पुलिस कर रही है विस्तृत पूछताछ
परसपुर थाना प्रभारी ने बताया कि आरोपियों से विस्तृत पूछताछ की जा रही है। पुलिस को संदेह है कि यह कोई संगठित गैंग हो सकता है जो विभागीय सामग्री की चोरी कर उसे कबाड़ियों को बेचता है।
“हम यह भी जांच कर रहे हैं कि कहीं इसमें कोई अंदरूनी अधिकारी या सुपरवाइजर तो संलिप्त नहीं था,” — थाना प्रभारी, परसपुर।
निष्कर्ष: विभागीय निगरानी और सुरक्षा की जरूरत
यह घटना साफ संकेत देती है कि बिजली विभाग में पारदर्शिता और निगरानी तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता है। यदि इस प्रकार के मामलों को समय पर नहीं रोका गया, तो इससे विभाग की संपत्ति और आम जनता दोनों को भारी नुकसान हो सकता है।
पुलिस की तत्परता से यह मामला उजागर हुआ, लेकिन भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों, इसके लिए संरचनात्मक सुधार जरूरी हैं।



