गोंडा (उत्तर प्रदेश): भारतीय जनता पार्टी ने गोंडा के जिलाध्यक्ष अमर किशोर कश्यप को पार्टी से 25 मई को निष्कासित कर दिया था। यह निर्णय एक वायरल वीडियो के बाद लिया गया जिसमें वे पार्टी कार्यालय में एक महिला के साथ आपत्तिजनक स्थिति में नजर आए थे।
हालांकि, निष्कासन के बाद अमर किशोर कश्यप ने दैनिक भास्कर से विशेष बातचीत में अपनी चुप्पी तोड़ी और पार्टी के फैसले पर अपनी प्रतिक्रिया दी।
कश्यप का बयान:
“मैं भारतीय जनता पार्टी के निर्णय का सम्मान करता हूं, लेकिन यह निर्णय एकतरफा और बिना मेरी पूरी बात सुने लिया गया है।”
उन्होंने आगे कहा:
“मैंने हमेशा संगठन के लिए निःस्वार्थ भाव से काम किया है, लेकिन इस बार मुझे अपनी बात रखने का मौका नहीं मिला। जो वीडियो वायरल हुआ, वह आधा अधूरा है, उसके पीछे की सच्चाई कोई नहीं जानता।”
पार्टी का कड़ा रुख
भाजपा प्रदेश नेतृत्व ने वीडियो सामने आने के तुरंत बाद अनुशासनात्मक कार्रवाई करते हुए अमर किशोर को पद और पार्टी दोनों से निष्कासित कर दिया। पार्टी ने इसे संगठन की छवि के खिलाफ बताया था।
विपक्षी प्रतिक्रिया और जनभावना
विपक्षी दलों ने इस मामले को लेकर भाजपा पर हमला बोला, वहीं आम जनता के बीच भी इस वीडियो को लेकर मिश्रित प्रतिक्रिया सामने आई। कुछ लोगों ने पार्टी की त्वरित कार्रवाई को सराहा, तो कुछ ने निष्कासित नेता को अपनी बात रखने का अवसर न देने को अनुचित बताया।
क्या अब वापसी की उम्मीद?
कश्यप ने यह नहीं बताया कि वे पार्टी में वापसी की कोशिश करेंगे या नहीं, लेकिन यह जरूर कहा कि वे पार्टी के सिद्धांतों और विचारधारा से आज भी भावनात्मक रूप से जुड़े हैं।
मुख्य बिंदु:
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भाजपा ने 25 मई को अमर किशोर कश्यप को निष्कासित किया
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वायरल वीडियो के बाद हुई तत्काल कार्रवाई
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कश्यप ने कहा- “पार्टी का निर्णय मंजूर, पर मुझे नहीं सुना गया”
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विपक्ष ने कहा- यह भाजपा की आंतरिक विफलता का परिणाम
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आगे की रणनीति पर कश्यप ने चुप्पी साधी
निष्कर्ष:
जहां भाजपा ने इस प्रकरण में त्वरित कार्रवाई करके स्पष्ट किया कि संगठन में अनुशासन सर्वोपरि है, वहीं निष्कासित नेता अमर किशोर कश्यप के बयान ने मामले को एक नई बहस में बदल दिया है—क्या किसी कार्यकर्ता को बिना स्पष्टीकरण का अवसर दिए सजा देना सही है?



