गोंडा (उत्तर प्रदेश): जिले के 45 ग्राम पंचायत सचिवों द्वारा 62 लाख रुपए के अनियमित भुगतान का गंभीर मामला सामने आया है। इस घोटाले को लेकर जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) ने सभी संबंधित सचिवों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। इन सचिवों पर आरोप है कि इन्होंने राज्य वित्त आयोग से प्राप्त अनुदान राशि का उपयोग तय दिशा-निर्देशों के खिलाफ जाकर किया।
क्या है पूरा मामला?
राज्य वित्त आयोग की ओर से ग्राम पंचायतों को दी गई राशि का उद्देश्य बुनियादी सुविधाओं के विकास और रखरखाव था। मगर विभागीय जांच में सामने आया कि 45 ग्राम पंचायत सचिवों ने बिना साक्ष्य और उचित प्रक्रिया के लाखों रुपए का भुगतान कर डाला।
जांच रिपोर्ट में सामने आया कि भुगतान में न तो पूर्ण दस्तावेज उपलब्ध थे और न ही कार्यों का स्थलीय सत्यापन किया गया था। इसके अलावा कई मामलों में एक ही फर्म को बिना टेंडर प्रक्रिया के ठेके दिए गए।
DPRO का सख्त रुख:
DPRO ने इस पर तुरंत संज्ञान लेते हुए संबंधित सचिवों को नोटिस जारी कर 7 दिन में स्पष्टीकरण देने को कहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संतोषजनक जवाब न मिलने पर विभागीय कार्यवाही की जाएगी, जिसमें निलंबन से लेकर रिकवरी तक के कदम शामिल हैं।
राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल:
यह मामला सामने आने के बाद जिले के राजनीतिक गलियारों में भी हलचल है। कुछ जनप्रतिनिधियों ने मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र जांच एजेंसी से जांच कराई जाए और जिम्मेदारों को कठोर सजा दी जाए।
भ्रष्टाचार पर प्रशासन की टिप्पणी:
जिला प्रशासन ने साफ किया है कि पंचायती राज में पारदर्शिता और उत्तरदायित्व सुनिश्चित करने के लिए सख्त कदम उठाए जाएंगे। अधिकारियों ने कहा कि यह कार्रवाई दूसरे सचिवों के लिए चेतावनी है कि अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
मुख्य बिंदु:
-
62 लाख के अनियमित भुगतान में 45 सचिवों को कारण बताओ नोटिस
-
राज्य वित्त आयोग की अनुदान राशि का दुरुपयोग
-
दस्तावेज और प्रक्रिया में भारी अनियमितता
-
स्पष्टीकरण न देने पर होगी कड़ी कार्रवाई
-
भ्रष्टाचार के खिलाफ प्रशासन का सख्त रुख
निष्कर्ष:
ग्राम पंचायतों में होने वाले वित्तीय लेनदेन की पारदर्शिता हमेशा से एक चुनौती रही है। गोंडा में सामने आया यह मामला न केवल लोकधन के दुरुपयोग की ओर इशारा करता है, बल्कि प्रशासन की कमजोर निगरानी प्रणाली पर भी सवाल खड़े करता है। यदि समय रहते सख्त कार्रवाई नहीं की गई तो यह भ्रष्टाचार की नई मिसाल बन सकती है।



