गोंडा में किशोरी की फंदे से लटकती मिली लाश: परिजनों ने पुलिस पर प्रताड़ना का लगाया आरोप, बोले- “पुलिस न आती तो बेटी न मरती”

गोंडा (तरबगंज)। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के तरबगंज थाना क्षेत्र से एक हृदयविदारक घटना सामने आई है, जहां बुधवार सुबह एक 16 वर्षीय किशोरी का शव उसके ही घर में साड़ी के फंदे से लटका मिला। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। पीड़ित परिवार ने स्थानीय पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि अगर पुलिस घर न आती, तो शायद उनकी बेटी आज जिंदा होती।

क्या है पूरा मामला?

मिली जानकारी के अनुसार, बुधवार सुबह करीब 5 बजे किशोरी का शव घर के एक कमरे में फंदे से लटका मिला। घटना के वक्त किशोरी के माता-पिता घर पर मौजूद नहीं थे और परिवार के अन्य सदस्य दूसरे कमरों में सो रहे थे। सुबह जब किशोरी को नहीं देखा गया तो तलाश शुरू हुई, जिसके बाद कमरे में उसका शव मिला।

परिजनों ने पुलिस पर लगाया प्रताड़ना का आरोप

परिवारवालों ने बताया कि मंगलवार रात को कुछ पुलिसकर्मी उनके घर पहुंचे थे और किसी पुराने विवाद या संदेह को लेकर किशोरी से पूछताछ की थी। परिजनों का दावा है कि पुलिस ने लड़की को डरा-धमकाकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किया, जिसके चलते उसने यह कदम उठाया।

किशोरी की मां ने मीडिया से बात करते हुए कहा, “अगर पुलिस न आती तो मेरी बेटी जिंदा होती। उन्होंने उसे डराया-धमकाया, जिसकी वजह से उसने जान दे दी।”

24 घंटे में दूसरी मौत से दहशत

इस घटना से पहले भी तरबगंज क्षेत्र में एक और संदिग्ध मौत का मामला सामने आया था, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई है। लगातार हो रही घटनाओं ने प्रशासन की भूमिका और पुलिस कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पुलिस ने क्या कहा?

तरबगंज पुलिस ने फिलहाल मामले की जांच शुरू कर दी है। थानाध्यक्ष ने बयान में कहा है कि, “शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है, और सभी पहलुओं से मामले की जांच की जा रही है। परिजनों के आरोप गंभीर हैं, उन्हें ध्यान में रखते हुए विभागीय जांच भी करवाई जाएगी।”

स्थानीय लोगों में आक्रोश

घटना के बाद स्थानीय लोगों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। कई लोगों का कहना है कि लगातार हो रही घटनाएं यह दिखा रही हैं कि पुलिस का रवैया आम जनता के लिए भय का कारण बनता जा रहा है, न कि सुरक्षा का।


निष्कर्ष:
गोंडा के तरबगंज क्षेत्र में किशोरी की रहस्यमय मौत ने पुलिस के तौर-तरीकों पर गहरा सवाल खड़ा कर दिया है। परिजनों के आरोपों की निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही है। अब देखना यह होगा कि प्रशासन इस दुखद घटना से क्या सबक लेता है और न्याय की प्रक्रिया कितनी पारदर्शी होती है।

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