गोंडा: जिले में घाघरा नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 20 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच गया है। शनिवार सुबह गिरजा, शारदा और सरयू बैराज से 3.31 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया, जिससे नदी का बहाव और तेज हो गया है। प्रशासन ने तटीय इलाकों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया है।
ब्योन्दा माझा गांव में बाढ़ का कहर
तरबगंज तहसील के ब्योन्दा माझा गांव में बाढ़ का पानी घरों के चारों ओर फैल गया है। ग्रामीण नाव के सहारे एक स्थान से दूसरे स्थान पर जा रहे हैं। पानी भरने के कारण कंपोजिट विद्यालय ब्योन्दा माझा को बंद कर दिया गया है। विद्यालय बंद होने से बच्चे पढ़ाई से वंचित हो रहे हैं।
राहत कार्य जारी
जिला प्रशासन ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में 2000 से अधिक ग्रामीणों को राहत सामग्री वितरित की है। साथ ही कम्युनिटी किचन से ग्रामीणों को लंच पैकेट भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
तटीय इलाकों में कटान रोकने के लिए बाढ़ खंड विभाग सक्रिय है।
कटान से किसानों को भारी नुकसान
नवाबगंज थाना क्षेत्र के चहलवा और साकीपुर गांवों में सबसे ज्यादा कटान हो रही है। इससे किसानों की जमीन और फसलें प्रभावित हो रही हैं। जिला आपदा विशेषज्ञ राजेश के अनुसार, प्रभावित किसानों को जल्द ही आर्थिक मुआवजा दिया जाएगा।
अलर्ट मोड पर प्रशासन
बैराज से छोड़ा गया पानी शाम तक घाघरा नदी में पहुंचने की संभावना है। इसको देखते हुए तटीय इलाकों के लोगों को अलर्ट मोड पर रखा गया है ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।
जिला मुख्यालय पर बनाए गए कंट्रोल रूम से सीसीटीवी कैमरों के जरिए बाढ़ग्रस्त इलाकों की निगरानी की जा रही है। सभी 28 बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया गया है।
स्वास्थ्य और राजस्व विभाग की तैनाती
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राजस्व विभाग और स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी लगातार ड्यूटी पर हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।
???? निष्कर्ष:
गोंडा में घाघरा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से हालात गंभीर होते जा रहे हैं। प्रशासन राहत और बचाव कार्यों में जुटा है, लेकिन तटीय इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों के लिए यह बाढ़ भारी मुश्किलें खड़ी कर रही है।



