गोंडा | गोंडा जिले के मनकापुर स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में मत्स्य पालन विषय पर आयोजित पांच दिवसीय व्यावसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, कुमारगंज, अयोध्या के अधीन संचालित इस केंद्र में ग्रामीण बेरोजगार युवाओं और किसानों को मछली पालन से जुड़े आधुनिक तरीकों, वैज्ञानिक तकनीकों और प्रबंधन की व्यापक जानकारी प्रदान की गई।
नवीनतम तकनीकों से युवाओं को प्रशिक्षित करने का उद्देश्य
प्रशिक्षण का मुख्य लक्ष्य युवाओं को मत्स्य पालन से जुड़े विभिन्न वैज्ञानिक पहलुओं से परिचित कराना और उन्हें इस क्षेत्र में रोजगार या स्वरोजगार के अवसर उपलब्ध कराना था। विशेषज्ञों ने बताया कि वैज्ञानिक पद्धतियों के प्रयोग से मछली उत्पादन कई गुना तक बढ़ाया जा सकता है।
वैज्ञानिकों ने दिए महत्वपूर्ण तकनीकी सुझाव
डॉ. ज्ञानदीप गुप्ता — मत्स्य वैज्ञानिक
कोर्स कोऑर्डिनेटर व मत्स्य वैज्ञानिक डॉ. ज्ञानदीप गुप्ता ने प्रतिभागियों को निम्न विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया—
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तालाब की वैज्ञानिक तैयारी
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जल की गुणवत्ता प्रबंधन
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चूना एवं खाद का सही उपयोग
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संतुलित आहार व फीडिंग प्रबंधन
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मछली रोग नियंत्रण
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गुणवत्तापूर्ण मछली बीज का चयन
उन्होंने कहा कि बेहतर प्रबंधन तकनीकों के माध्यम से किसान अपनी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं।
डॉ. रामलखन सिंह — वरिष्ठ वैज्ञानिक (शस्य विज्ञान)
उन्होंने तालाबों के बंधे पर सरसों, अरहर जैसी फसलों की खेती की उपयोगिता बताते हुए कहा कि इससे किसानों को अतिरिक्त आय का अच्छा स्रोत मिलता है।
डॉ. हनुमान प्रसाद पांडे — मृदा वैज्ञानिक
मृदा विशेषज्ञ ने मिट्टी और जल की गुणवत्ता, pH स्तर, और मिट्टी परीक्षण के महत्व पर विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सही जल गुणवत्ता और उपजाऊ मिट्टी मछली उत्पादन को सीधे प्रभावित करती है।
डॉ. डी.के. पांडे — कृषि विशेषज्ञ
उन्होंने तालाब की मेड़ पर सब्जी उत्पादन की तकनीक समझाई। सब्जियों की खेती से किसानों को द्विगुणित आय प्राप्त हो सकती है और उनकी आर्थिक स्थिति और मजबूत बन सकती है।
युवाओं की सक्रिय भागीदारी
इस प्रशिक्षण में अब्दुल अजीज, मोहम्मद उस्मान, रितेश सिंह, वीरेंद्र कश्यप, मोहर्रम अली सहित कई ग्रामीण बेरोजगार युवाओं ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने बताया कि इस प्रशिक्षण से उन्हें मत्स्य पालन के आधुनिक तरीकों की महत्वपूर्ण जानकारी मिली, जिसे वे अपने गांवों में अपनाकर अपना व्यवसाय शुरू करना चाहते हैं।

