गोंडा | कैसरगंज से बीजेपी सांसद करण भूषण सिंह को अवैध खनन मामले में लखनऊ हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली है। उनकी फर्म मेसर्स नंदिनी इंफ्रास्ट्रक्चर पर लगे 10 लाख रुपए के जुर्माने और 4.88 करोड़ रुपए की रॉयल्टी जमा करने के आदेश को कोर्ट ने रद्द करने से इनकार कर दिया है। अदालत ने 21 नवंबर को इस याचिका पर सुनवाई की थी और मेरिट के आधार पर याचिका खारिज कर दी। हालांकि, हाईकोर्ट ने राज्य प्राधिकरण (State Authority) में रिवीजन याचिका दाखिल करने की छूट दी है।
क्या है मामला?
यह पूरा प्रकरण वर्ष ** 2019** का है।
19–20 जनवरी 2019 को:
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गोंडा के खनन निरीक्षक
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भूतत्व एवं खनिकर्म कार्यालय अयोध्या के सर्वेयर
ने गोंडा में स्थित खनन पट्टे का स्थल निरीक्षण किया था। निरीक्षण में पाया गया कि स्वीकृत सीमा से 1.72 लाख घन मीटर अधिक खनन किया गया है। यह मात्रा वैधानिक लिमिट से काफी अधिक थी, जिसे विभाग ने अवैध खनन माना।
जुर्माना और रॉयल्टी की कार्रवाई
निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर तत्कालीन डीएम नितिन बंसल ने:
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10 लाख रुपए जुर्माना
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4.88 करोड़ रुपए (बालू की रॉयल्टी + खनिज मूल + अतिरिक्त राशि)
15 दिनों के अंदर जमा करने का आदेश जारी किया था।
इसके बाद गोंडा खनन विभाग ने कई नोटिस भी सांसद और उनकी फर्म को जारी किए, लेकिन राशि जमा नहीं की गई। मामला अंततः हाईकोर्ट तक पहुंचा।
किन धाराओं में हुआ था आरोप?
मामला उत्तर प्रदेश खनिज नियमावली के तहत दर्ज किया गया था, जिसमें—
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अधिक खनन
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वैधानिक सीमा पार करना
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रॉयल्टी न जमा करना
जैसे गंभीर उल्लंघन शामिल थे।
किस जमीन पर मिला था पट्टा?
सांसद करण भूषण सिंह की फर्म तरबगंज तहसील क्षेत्र के दुर्गागंज ग्राम पंचायत में बालू खनन का पट्टा प्राप्त किया था।
पट्टा 5 वर्ष के लिए स्वीकृत था।
लेकिन कार्रवाई के बाद से सांसद या उनके परिवार के किसी सदस्य ने कोई नया खनन पट्टा नहीं लिया है।
हाईकोर्ट का निर्णय
जस्टिस शेखर बी. सराफ और मंजवी शुक्ला की खंडपीठ ने कहा कि:
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याचिका मेरिट के आधार पर स्वीकार नहीं की जा सकती
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जुर्माना और रॉयल्टी को रद्द करने का कोई आधार नहीं बनता
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लेकिन सांसद को राज्य प्राधिकरण में रिवीजन दाखिल करने की छूट दी जाती है
इसके साथ ही अदालत ने देरी को भी माफ करने का निर्देश दिया।
सांसद का पक्ष
सांसद करण भूषण सिंह ने कहा:
“जुर्माना गलत तरीके से लगाया गया था। इसलिए हम इसे चुनौती देने हाईकोर्ट गए थे। अदालत ने अब हमें राज्य प्राधिकरण में रिवीजन दाखिल करने की अनुमति दी है।”
करण भूषण ने अपने फर्म के माध्यम से—
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खनन निदेशक, उत्तर प्रदेश
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प्रमुख सचिव, खनन विभाग
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कमिश्नर, देवीपाटन मंडल
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गोंडा डीएम
को भी पार्टी बनाया था।



