गोंडा: के निलंबित जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बीएसए) अतुल कुमार तिवारी की बहाली याचिका पर आज लखनऊ हाईकोर्ट में अहम सुनवाई होगी। यह सुनवाई जस्टिस मनीष माथुर की खंडपीठ कोर्ट नंबर 7 में निर्धारित है। सूची के अनुसार यह मामला 14वें नंबर पर रखा गया है।
पिछली सुनवाई में सरकार से मांगा था पूरा ब्योरा
इससे पहले 28 नवंबर को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया था कि—
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निलंबन और मुकदमे में अब तक की गई कार्रवाई का पूरा विवरण
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मंगलवार तक कोर्ट में उपलब्ध कराया जाए।
आज की सुनवाई में सरकार द्वारा दिए गए इन्हीं दस्तावेज़ों व जवाबों पर आगे की कार्यवाही तय होगी।
बहाली की मांग: “निलंबन गलत, रिश्वत का आरोप झूठा” — अतुल तिवारी
हाईकोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में अतुल तिवारी ने कहा है कि—
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उन्होंने किसी से कोई रिश्वत नहीं ली,
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उन पर लगाए गए आरोप गलत और राजनीतिक/व्यक्तिगत द्वेष से प्रेरित हैं,
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एंटी करप्शन कोर्ट के आदेश पर दर्ज मुकदमा भ्रामक आधारों पर है,
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उन्हें निलंबित करना अनुचित और अवैध है।
उन्होंने कोर्ट से निलंबन आदेश रद्द कर उन्हें बीएसए के पद पर बहाल करने की मांग की है।
यूपी सरकार के कई शीर्ष अफसर बनाए गए पक्षकार
अपनी याचिका में तिवारी ने जिन अधिकारियों को पार्टी बनाया है, उनमें शामिल हैं—
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एडिशनल चीफ सेक्रेटरी, बेसिक शिक्षा
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संयुक्त सचिव, बेसिक शिक्षा विभाग
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महानिदेशक, बेसिक शिक्षा
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कमिश्नर, देवीपाटन मंडल
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जिलाधिकारी, गोंडा
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डायरेक्टर, बेसिक शिक्षा विभाग
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मंडलीय सहायक शिक्षा निदेशक, लखनऊ
यह दर्शाता है कि मामला प्रशासनिक और कानूनी स्तर पर काफी गंभीर हो चुका है।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता मनोज़ कुमार पांडे ने आरोप लगाया था कि—
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स्कूलों में फर्नीचर सप्लाई के लिए जारी टेंडर प्रक्रिया में
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बीएसए अतुल कुमार तिवारी ने उनसे 22 लाख रुपये की रिश्वत ली,
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लेकिन भुगतान लेने के बावजूद उन्हें काम नहीं दिया गया,
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बाद में उनकी फर्म को ब्लैकलिस्ट भी कर दिया गया।
इस शिकायत के आधार पर नगर कोतवाली में अतुल तिवारी समेत तीन लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था।
कोर्ट की आज की सुनवाई अहम
सरकार द्वारा प्रस्तुत जवाब, दस्तावेज़ और निलंबन से जुड़े तथ्य अदालत के सामने रखे जाएंगे। इसके आधार पर कोर्ट आगे की दिशा तय करेगा—
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निलंबन जारी रहेगा या हटाया जाएगा
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या अगली तारीख पर विस्तार से सुनवाई होगी
शिक्षा विभाग और प्रशासनिक स्तर पर भी इस सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं।



