Report Prakash Singh
उत्तर प्रदेश: के गोंडा जिले में हुए सनसनीखेज गोलीकांड ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। परसपुर थाना क्षेत्र के गजराजपुरवा गांव में भाजपा जिला पंचायत सदस्य प्रतिनिधि भूपेंद्र सिंह पर हुए हमले के 36 घंटे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक पुलिस को कोई औपचारिक तहरीर नहीं मिली है। यही वजह है कि इस गंभीर मामले की जांच में लगातार बाधाएं सामने आ रही हैं।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, परिजनों से अब तक 10 से अधिक बार लिखित शिकायत देने का अनुरोध किया जा चुका है, लेकिन परिवार की ओर से किसी भी व्यक्ति के खिलाफ नामजद या अज्ञात तहरीर नहीं दी गई है। इससे पुलिस के सामने यह चुनौती खड़ी हो गई है कि आखिर घटना की दिशा किस ओर तय की जाए।
घटना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने जांच तेज कर दी है और चार अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं, जो हर एंगल से मामले की पड़ताल कर रही हैं। बावजूद इसके, बिना तहरीर के केस दर्ज न होने से कार्रवाई की प्रक्रिया सीमित बनी हुई है।
घायल नेता का बयान अब तक नहीं हो सका दर्ज
इस हमले में गंभीर रूप से घायल भूपेंद्र सिंह का इलाज लखनऊ के किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमसी) में चल रहा है। उनकी हालत को देखते हुए पुलिस के लिए उनका बयान दर्ज करना भी चुनौती बना हुआ है।
अपर पुलिस अधीक्षक (पश्चिमी) राधेश्याम राय खुद केजीएमसी पहुंचे और तीन बार बयान लेने की कोशिश की, लेकिन हर बार भूपेंद्र सिंह की बेहोशी और स्वास्थ्य स्थिति के कारण बयान दर्ज नहीं हो सका।
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जैसे ही घायल नेता की हालत स्थिर होगी और वे बयान देने की स्थिति में आएंगे, उनकी गवाही इस केस में अहम सुराग दे सकती है।

CCTV फुटेज देने से परिवार का इनकार
जांच में एक और बड़ी रुकावट तब सामने आई जब पुलिस ने घटनास्थल पर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज हासिल करने की कोशिश की। पुलिस ने भूपेंद्र सिंह के घर से DVR और रिकॉर्डिंग मांगी, लेकिन परिजनों ने इसे देने से साफ इनकार कर दिया।
पुलिस का मानना है कि CCTV फुटेज में हमले से जुड़ी अहम गतिविधियां कैद हो सकती थीं, जिससे आरोपियों तक पहुंचने में मदद मिलती। हालांकि फुटेज न मिलने से जांच अब तकनीकी और अन्य साक्ष्यों पर निर्भर हो गई है।
घर से लेकर अस्पताल तक कड़ी सुरक्षा
घटना के बाद से पूरे इलाके में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। भूपेंद्र सिंह के घर पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके।
वहीं, लखनऊ स्थित केजीएमसी में भी सुरक्षा बढ़ा दी गई है। अस्पताल परिसर में पुलिस की मौजूदगी लगातार बनी हुई है और परिजनों की सुरक्षा पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
चार टीमें कर रहीं हर एंगल से जांच
गोंडा के पुलिस अधीक्षक विनीत जायसवाल ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए चार टीमें बनाई गई हैं। ये टीमें अलग-अलग पहलुओं पर काम कर रही हैं—जैसे तकनीकी साक्ष्य, स्थानीय इनपुट, संभावित दुश्मनी और राजनीतिक एंगल।
उन्होंने कहा कि तहरीर मिलते ही तत्काल मुकदमा दर्ज किया जाएगा और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस प्रत्यक्षदर्शियों से पूछताछ और अन्य स्रोतों से जानकारी जुटाने में लगी हुई है।
राजनीतिक हलचल तेज, कई सवाल अनसुलझे
भाजपा से जुड़े प्रतिनिधि पर हुए इस हमले ने जिले की राजनीति में भी हलचल पैदा कर दी है। स्थानीय स्तर पर इस घटना को लेकर कई तरह की चर्चाएं हो रही हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर परिजन तहरीर देने से क्यों बच रहे हैं और CCTV फुटेज क्यों नहीं सौंपा जा रहा। क्या इसके पीछे कोई दबाव है या मामला किसी गहरे विवाद से जुड़ा है—इन सभी पहलुओं पर पुलिस की नजर बनी हुई है।
गोंडा गोलीकांड अब एक रहस्यमयी मोड़ ले चुका है, जहां हर गुजरते घंटे के साथ सवाल बढ़ते जा रहे हैं। तहरीर और अहम सबूतों के अभाव में जांच जटिल होती जा रही है। आने वाले समय में घायल नेता का बयान और तकनीकी साक्ष्य ही इस मामले की सच्चाई सामने ला सकते हैं।

