
प्रकाश सिंह
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नया तेवर और तीव्रता लेकर आई एनसीपी (राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी) की महिला महासचिव कामिनी शर्मा ने सधे हुए लेकिन तीखे शब्दों में मौजूदा राजनीतिक धारा को चुनौती दी है। प्रकाश सिंह से विशेष बातचीत में उन्होंने अपनी पार्टी की विचारधारा, ब्राह्मण समाज को लेकर फैलाए जा रहे भ्रम, ऑपरेशन सिंदूर, और आगामी पंचायत चुनावों पर अपनी बात खुलकर रखी।
“यूपी सरकार ब्राह्मण विरोधी है या नहीं?” – कामिनी शर्मा ने दिया संतुलित उत्तर
कामिनी शर्मा का कहना है कि उनकी पार्टी हमेशा से सामाजिक समरसता और समान अधिकारों की पक्षधर रही है। उन्होंने दोहराया,
“हमारी पार्टी ने हमेशा से ही समाज के सभी वर्गों के समान अधिकारों की वकालत की है। किसी एक जाति या वर्ग को मुद्दा बनाकर सियासत करना हमारी सोच में नहीं है।”
ऑपरेशन सिंदूर: देश की सुरक्षा में जरूरी कदम
एनसीपी महासचिव ने ऑपरेशन सिंदूर को एक सकारात्मक और साहसी पहल बताया। उन्होंने कहा:
“देश की सुरक्षा और सीमाओं की रक्षा के लिए यह एक आवश्यक अभियान था। ऐसे कदम राष्ट्रीय चेतना को मजबूती देते हैं।”
“एनसीपी क्यों?” – कामिनी शर्मा का दो टूक जवाब
जब उनसे पूछा गया कि उन्होंने एनसीपी ही क्यों चुनी, तो उनका जवाब नपे-तुले शब्दों में था:
“मैंने एनसीपी को इसलिए चुना क्योंकि यह सत्ता की राजनीति नहीं, समाज की राजनीति करती है। यह उन वर्गों की आवाज़ है जिन्हें अक्सर मंच से भी दूर रखा गया।”
उन्होंने आगे कहा कि एनसीपी जमीनी स्तर पर काम करती है—मंचों पर नहीं, मोहल्लों में।
“जहां बाकी पार्टियां भाषण देती हैं, एनसीपी समाधान देती है।”
अन्य दलों पर तीखा वार: चुनावी गणित बनाम वैचारिक राजनीति
सपा, बसपा, कांग्रेस और भाजपा पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा:
“इन पार्टियों के पास अब विचारधारा नहीं, सिर्फ चुनावी रणनीति रह गई है। जातिगत समीकरण और सोशल इंजीनियरिंग से समाज नहीं बदलेगा। बदलाव चाहिए तो वैचारिक प्रतिबद्धता जरूरी है, जो एनसीपी में है।”
उन्होंने जोर देकर कहा:
“जहां बाकी दल वोट के पीछे भागते हैं, वहां एनसीपी जनता के दर्द के पीछे भागती है। यही फर्क है!”
ब्राह्मण बेटी से समाज की आवाज़ तक – कामिनी शर्मा की भूमिका
कामिनी शर्मा ने स्वीकार किया कि एनसीपी ने उन्हें न केवल मंच दिया बल्कि एक मिशन दिया।
“एक ब्राह्मण बेटी होते हुए भी मुझे हर वर्ग की बात कहने की स्वतंत्रता मिली। एनसीपी में मुझे सम्मान मिला, दृष्टि मिली और एक स्पष्ट लक्ष्य मिला।”
हरिश्चंद्र सिंह को दिया दिशा निर्देशन का श्रेय
एनसीपी उत्तर प्रदेश अध्यक्ष हरिश्चंद्र सिंह को श्रेय देते हुए कामिनी शर्मा ने कहा:
“उनकी स्पष्ट दृष्टि और निष्ठा ने मुझे यह विश्वास दिलाया कि यहां सिर्फ राजनीति नहीं, परिवर्तन की बात होती है।”
निष्कर्ष: एनसीपी में दिखता है वैचारिक विकल्प
कामिनी शर्मा का यह इंटरव्यू सिर्फ एक राजनीतिक वक्तव्य नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश की सियासत में वैचारिक विकल्प की दस्तक है। जब राजनीति ‘वोट बैंक की मंडी’ में फंसी हो, तब उनका यह आह्वान—
“विचारधारा में भरोसा करो!”
—एक गंभीर आत्ममंथन का अवसर है।



