नई दिल्ली: भारतीय जन संचार संस्थान (IIMC) के पूर्व महानिदेशक प्रो. संजय द्विवेदी ने कहा है कि “संवाद की सकारात्मक शक्ति ही दुनिया को समरस, शांतिपूर्ण और सुंदर बना सकती है।” वे रविवार को राम जानकी संस्थान पॉजिटिव ब्रॉडकास्टिंग हाउस (RJS-PBH) और आरजेएस पॉजिटिव मीडिया द्वारा आयोजित ऑनलाइन सकारात्मक संवाद कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे।
“जहां संवाद नहीं, वहां तनाव जन्म लेता है”
प्रो. द्विवेदी ने कहा कि जब समाज, परिवार या राष्ट्र के बीच संवादहीनता होती है, तो वहां तनाव, अविश्वास और संघर्ष जैसे हालात बनते हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि सकारात्मक संवाद से हर संकट का शांतिपूर्ण समाधान संभव है। उन्होंने कहा:
“हमें संवाद को एक साधन नहीं, बल्कि समाधान मानना चाहिए। सकारात्मक सोच और संवाद ही इस विश्व को स्थायित्व और शांति की दिशा में ले जा सकते हैं।”
1 से 15 अगस्त तक होगा ‘सकारात्मकता का अंतरराष्ट्रीय महोत्सव’
इस अवसर पर ‘सकारात्मकता के अंतरराष्ट्रीय महोत्सव’ (1 से 15 अगस्त 2025) की औपचारिक रूपरेखा भी प्रस्तुत की गई। कार्यक्रम में इस महोत्सव की विविध गतिविधियों, कार्ययोजना और सहभागिता के स्वरूप पर विस्तार से चर्चा की गई। प्रो. द्विवेदी ने इस अवसर पर आरजेएस न्यूजलेटर का विमोचन भी किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता डॉ. हरि सिंह पाल ने की
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे आकाशवाणी के पूर्व कार्यक्रम निदेशक डॉ. हरि सिंह पाल ने आरजेएस के सकारात्मक मीडिया आंदोलन को वैश्विक महत्व का बताया। उन्होंने कहा कि समाज के कोने-कोने से प्रेरणादायक कहानियों और सकारात्मक उदाहरणों को सामने लाना समय की मांग है। उन्होंने लोकगीत, लोककथाएं और क्षेत्रीय बोलियों के डिजिटल अभिलेखन की आवश्यकता पर भी बल दिया।
अन्य वक्ताओं ने भी रखे विचार
इस अवसर पर भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) के वरिष्ठ कार्यक्रम अधिकारी श्री सुनील कुमार सिंह, रति चौबे, नूतन चौबे, और आरजेएस राष्ट्रीय संयोजक श्री उदय कुमार मन्ना भी मंच पर उपस्थित रहे और उन्होंने महोत्सव की सफलता हेतु मार्गदर्शन दिया।
देशभर से जुड़ी प्रतिभाएं, साझा किए विचार
कार्यक्रम में देश के विभिन्न हिस्सों से जुड़ी प्रख्यात हस्तियों और समाजसेवियों ने भी अपने विचार रखे। इनमें प्रमुख रूप से:
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विश्व भारती योग संस्थान के आचार्य प्रेम भाटिया
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फिल्म अभिनेत्री संजीवनी चौधरी
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कवयित्री सुषमा अग्रवाल
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मधुबाला श्रीवास्तव, आलोक कुमार, सरिता कपूर
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डॉ. श्याम कुमार, साधक ओमप्रकाश, सुदीप साहू, स्वीटी पॉल
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डीपी कुशवाहा, चंद्रकला भारतीया और मोहम्मद इशाक खान प्रमुख रहे।

निष्कर्ष: मीडिया का उद्देश्य सिर्फ सूचना नहीं, प्रेरणा भी होनी चाहिए
आरजेएस द्वारा आयोजित यह आयोजन न केवल सकारात्मकता फैलाने का प्रयास था, बल्कि यह एक संदेश भी है कि मीडिया और संवाद यदि सकारात्मक दिशा में आगे बढ़े, तो समाज में बदलाव की धारा बहाई जा सकती है। प्रो. द्विवेदी का यह कथन प्रेरक है:
“अगर हम संवाद में सकारात्मकता को प्राथमिकता दें, तो न केवल हमारा जीवन, बल्कि हमारी दुनिया भी सुंदर और समरस बन सकती है।”


