मध्य प्रदेश: के धार जिले में स्थित Bhojshala-कमाल मौला मस्जिद विवाद मामले में हाईकोर्ट ने बड़ा और अहम फैसला सुनाया है। अदालत ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) की रिपोर्ट को आधार मानते हुए भोजशाला परिसर को हिंदू मंदिर माना है। इसके साथ ही जैन समाज और मुस्लिम पक्ष की याचिकाओं को खारिज कर दिया गया।
हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद पूरे इलाके में हलचल बढ़ गई है। प्रशासन ने स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए धार शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। शहर के कई हिस्सों में पुलिस बल तैनात किया गया है और प्रशासन हाई अलर्ट पर है।
ASI रिपोर्ट बनी फैसले का आधार
अदालत में सुनवाई के दौरान Archaeological Survey of India (ASI) ने 2100 पन्नों की विस्तृत रिपोर्ट पेश की थी। इस रिपोर्ट में भोजशाला परिसर की संरचना, स्थापत्य और खुदाई के दौरान मिले अवशेषों का उल्लेख किया गया था।
रिपोर्ट में दावा किया गया कि परिसर में मंदिर स्थापत्य से जुड़े कई प्रमाण मिले हैं। इनमें मूर्तियां, सिक्के, स्तंभ और अन्य ऐतिहासिक अवशेष शामिल हैं। ASI ने बताया कि परिसर में मिले स्तंभों की बनावट और उन पर उकेरी गई आकृतियां हिंदू मंदिर शैली से मेल खाती हैं।
कोर्ट ने अपने फैसले में ASI रिपोर्ट को विश्वसनीय माना और कहा कि उपलब्ध साक्ष्य मंदिर संरचना की ओर संकेत करते हैं।
98 दिनों तक चला सर्वे
भोजशाला परिसर में ASI का सर्वे करीब 98 दिनों तक चला था। इस दौरान विशेषज्ञों ने परिसर के विभिन्न हिस्सों की गहन जांच की।
रिपोर्ट के मुताबिक परिसर में कुल 188 स्तंभ पाए गए, जिनमें 106 खड़े और 82 आड़े स्तंभ शामिल हैं। ASI का कहना है कि इन स्तंभों की वास्तुकला मंदिर निर्माण शैली को दर्शाती है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि कई स्तंभों पर देवी-देवताओं और मानव आकृतियों के निशान मिले हैं, जिन्हें बाद में औजारों से क्षतिग्रस्त किया गया प्रतीत होता है।
इसके अलावा खुदाई में परमारकालीन निर्माण के संकेत भी मिले हैं। ASI ने अदालत को बताया कि बाद के निर्माण पुराने मंदिर ढांचे के ऊपर किए गए थे।

हिंदू पक्ष ने फैसले का किया स्वागत
हिंदू पक्ष के वकीलों ने अदालत के फैसले को ऐतिहासिक बताया। उनका कहना है कि लंबे समय से चल रहे विवाद में अब न्याय मिला है।
हिंदू संगठनों ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे आस्था और इतिहास की जीत बताया। वहीं दूसरी ओर मुस्लिम पक्ष ने ASI रिपोर्ट पर सवाल उठाए थे और इसे गलत ठहराया था। हालांकि अदालत ने उनकी दलीलों को स्वीकार नहीं किया।
धार बना पुलिस छावनी
फैसले के बाद किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए हैं। पूरे धार शहर में भारी पुलिस बल तैनात किया गया है।
सूत्रों के मुताबिक करीब 1200 पुलिसकर्मियों को सुरक्षा व्यवस्था में लगाया गया है। इसमें STF और विशेष सुरक्षा बल के जवान भी शामिल हैं। संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी रखी जा रही है।
प्रशासन ने लोगों से शांति बनाए रखने की अपील की है और सोशल मीडिया पर अफवाह फैलाने वालों पर सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी है।
क्या है भोजशाला विवाद?
Bhojshala को हिंदू समुदाय देवी वाग्देवी यानी माता सरस्वती का प्राचीन मंदिर मानता है। वहीं मुस्लिम समुदाय इसे कमाल मौला मस्जिद के रूप में देखता है।
यह विवाद कई दशकों से अदालत में चल रहा था। हिंदू पक्ष लंबे समय से परिसर में नियमित पूजा की मांग करता रहा है, जबकि मुस्लिम पक्ष इसे मस्जिद बताता आया है।
मामले ने कई बार राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी जन्म दिया है। अब हाईकोर्ट के ताजा फैसले के बाद यह मामला फिर राष्ट्रीय चर्चा में आ गया है।
आगे क्या हो सकता है?
कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले को उच्च अदालत में चुनौती दी जा सकती है। हालांकि फिलहाल हाईकोर्ट का आदेश लागू रहेगा।
प्रशासन की कोशिश है कि फैसले के बाद इलाके में शांति बनी रहे और किसी प्रकार का तनाव न फैले।
धार भोजशाला मामले में हाईकोर्ट का फैसला ऐतिहासिक और बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। ASI रिपोर्ट के आधार पर अदालत ने परिसर को हिंदू मंदिर माना है, जिससे वर्षों पुराने विवाद को नया मोड़ मिल गया है। फैसले के बाद प्रशासन पूरी तरह सतर्क है और पूरे इलाके में सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

