पंजाब कांग्रेस में सियासी भूचाल! बघेल के सामने चन्नी गुट का शक्ति प्रदर्शन, 12 विधायक और 3 सांसदों ने बढ़ाई हाईकमान की टेंशन

पंजाब कांग्रेस में फिर तेज हुई अंदरूनी खींचतान

पंजाब कांग्रेस में संगठनात्मक नेतृत्व को लेकर चल रहा विवाद अब खुलकर सामने आ गया है। चंडीगढ़ में आयोजित एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के समर्थक नेताओं ने प्रदेश प्रभारी भूपेश बघेल के समक्ष अपनी नाराजगी जाहिर की। बैठक के बाद भी मतभेद समाप्त नहीं हुए, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि पार्टी के भीतर नेतृत्व को लेकर असंतोष अभी कायम है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आगामी विधानसभा चुनावों से पहले यह स्थिति कांग्रेस के लिए चुनौती बन सकती है। हालांकि अंतिम निर्णय पार्टी हाईकमान के हाथ में है।

बघेल पहुंचे नेताओं को मनाने, लेकिन दिखा शक्ति प्रदर्शन

निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार पंजाब कांग्रेस प्रभारी भूपेश बघेल को कुछ वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात करनी थी, लेकिन बैठक के दौरान बड़ी संख्या में नेता मौजूद रहे।

चन्नी समर्थक खेमे के अनुसार, बैठक में 82 विधानसभा क्षेत्रों के हलका प्रभारी, 12 विधायक, 3 सांसद, कई पूर्व विधायक और पूर्व मंत्री शामिल हुए। इस उपस्थिति को पार्टी के भीतर एक बड़े शक्ति प्रदर्शन के रूप में देखा जा रहा है।

बैठक में ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सचिव एवं पंजाब मामलों के सह-प्रभारी सूरज सिंह ठाकुर भी मौजूद रहे।

नेताओं ने संगठनात्मक नेतृत्व पर उठाए सवाल

बैठक में कई नेताओं ने वर्तमान प्रदेश नेतृत्व को लेकर अपनी आपत्तियां रखीं। नेताओं का कहना था कि आगामी चुनावों को देखते हुए संगठन का नेतृत्व ऐसा होना चाहिए जो राज्य सरकार के खिलाफ प्रभावी ढंग से विपक्ष की भूमिका निभा सके।

बैठक के दौरान कई नेताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के नेतृत्व का समर्थन भी व्यक्त किया।

चन्नी ने क्या कहा?

बैठक के बाद चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा कि उन्होंने अपनी बात प्रदेश प्रभारी के सामने स्पष्ट रूप से रख दी है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि उनके सुझावों और विचारों को महत्व नहीं दिया जाता, तो वे चुनाव प्रचार समिति के अध्यक्ष पद पर बने रहने पर पुनर्विचार कर सकते हैं।

हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि वह कांग्रेस के कार्यकर्ता और पूर्व मुख्यमंत्री के रूप में पार्टी के लिए प्रचार करते रहेंगे।

भूपेश बघेल ने दिया भरोसा

बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में भूपेश बघेल ने कहा कि सभी नेताओं की बातें सुनी गई हैं और उनकी भावनाओं से पार्टी हाईकमान को अवगत कराया जाएगा।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चुनाव संबंधी समितियों के गठन को लेकर जो निर्णय पहले ही लिया जा चुका है, उसमें फिलहाल किसी बदलाव की जानकारी नहीं है। बघेल ने कहा कि राजनीतिक दलों में इस तरह के मतभेद असामान्य नहीं होते और इन्हें संगठन के भीतर ही सुलझाया जाना चाहिए।

रंधावा ने भी रखा पक्ष

पूर्व उपमुख्यमंत्री सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि उनका किसी व्यक्ति विशेष से व्यक्तिगत मतभेद नहीं है, बल्कि उनका उद्देश्य संगठन को मजबूत बनाना है।

उन्होंने कहा कि सभी नेताओं ने अपनी बात प्रभारी के सामने रख दी है और अब आगे का फैसला पार्टी हाईकमान करेगा। रंधावा ने यह भी कहा कि परिस्थितियों के अनुसार कई बार राजनीतिक दलों को अपने निर्णयों की समीक्षा करनी पड़ती है।

राजा वड़िंग का जवाब

पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए जा रहे आरोप उचित नहीं हैं। उन्होंने कहा कि वे लंबे समय से पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ मिलकर काम कर रहे हैं और संगठन को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

वड़िंग ने यह भी कहा कि कांग्रेस किसी भी प्रकार के समझौते वाली राजनीति के पक्ष में नहीं है और संगठन को मजबूत बनाने के लिए सभी को मिलकर काम करना चाहिए।

अब हाईकमान के फैसले पर नजर

बैठक के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज हो गई है कि पंजाब कांग्रेस के अंदरूनी विवाद को सुलझाने के लिए अब पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व क्या कदम उठाएगा।

आगामी विधानसभा चुनावों को देखते हुए संगठनात्मक एकजुटता कांग्रेस के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। ऐसे में राहुल गांधी और कांग्रेस हाईकमान की भूमिका पर सभी की नजरें टिकी हैं।

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