नई दिल्ली/तिरुवनंतपुरम: केरल की राजनीति से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां एक शातिर ठग ने खुद को कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा के निजी सचिव (PS) के रूप में पेश कर सांसदों और एक विधायक से संपर्क किया। आरोपी ने कथित तौर पर मंत्री बनाने का लालच देकर तीन करोड़ रुपये की मांग की। हालांकि, समय रहते संदेह होने पर पूरा मामला उजागर हो गया और अब पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
प्रारंभिक जांच के अनुसार, आरोपी ने फोन और व्हाट्सएप कॉल के जरिए खुद को प्रियंका गांधी वाड्रा के कार्यालय का अधिकारी बताते हुए कई जनप्रतिनिधियों से बातचीत की। मामला सामने आने के बाद साइबर पुलिस ने धोखाधड़ी और फर्जी पहचान से जुड़े प्रावधानों के तहत केस दर्ज कर लिया है।
प्रियंका गांधी के निजी सचिव के नाम का किया इस्तेमाल
शिकायत के अनुसार, आरोपी ने प्रियंका गांधी वाड्रा के निजी सचिव डी.एस. राजकुमार की पहचान का दुरुपयोग किया। उसने खुद को नई दिल्ली स्थित प्रियंका गांधी के कार्यालय से जुड़ा अधिकारी बताते हुए कई नेताओं से संपर्क साधा।
बताया गया कि आरोपी ने कांग्रेस विधायक के. विद्या बालकृष्णन, सांसद शफी परंबिल और डीन कुरियाकोस सहित कई जनप्रतिनिधियों से बातचीत करने की कोशिश की।
‘तीन करोड़ रुपये दो, मंत्री बन जाएंगे’
पुलिस के मुताबिक, 6 जुलाई को विधायक के. विद्या बालकृष्णन को व्हाट्सएप कॉल आया। कॉल करने वाले ने दावा किया कि वह प्रियंका गांधी वाड्रा के कार्यालय से डी.एस. राजकुमार बोल रहा है।
बातचीत के दौरान आरोपी ने कथित तौर पर कहा कि केरल मंत्रिमंडल में जल्द फेरबदल होने वाला है और यदि विधायक तीन करोड़ रुपये देती हैं तो उन्हें मंत्री बनाया जा सकता है। आरोपी ने यह भी दावा किया कि एक अन्य सांसद ने उनके नाम की सिफारिश की है।
करीब दस मिनट चली बातचीत के दौरान विधायक को कई बातों पर संदेह हुआ, जिसके बाद उन्होंने मामले की पुष्टि करने का फैसला किया।

ऐसे खुली ठगी की पूरी साजिश
फोन कॉल समाप्त होने के बाद विधायक ने संबंधित सांसद से संपर्क किया। सांसद ने बताया कि उनसे भी किसी व्यक्ति ने खुद को कांग्रेस के केंद्रीय कार्यालय से जुड़ा बताते हुए नेताओं के मोबाइल नंबर मांगे थे।
इसके बाद विधायक ने सीधे प्रियंका गांधी वाड्रा के कार्यालय से संपर्क किया। वहां से स्पष्ट कर दिया गया कि ऐसा कोई फोन नहीं किया गया था और न ही किसी अधिकारी ने मंत्री बनाने के बदले पैसे की मांग की थी।
यहीं से यह स्पष्ट हो गया कि पूरा मामला साइबर ठगी का प्रयास था।
शिकायत के बाद दर्ज हुई एफआईआर
प्रियंका गांधी वाड्रा के निजी सचिव डी.एस. राजकुमार ने इस मामले की शिकायत राज्य पुलिस प्रमुख और वायनाड के पुलिस अधीक्षक को दी।
शिकायत के आधार पर वायनाड साइबर पुलिस ने फर्जी पहचान, धोखाधड़ी और सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया। इससे पहले कांग्रेस विधायक की शिकायत पर कोझिकोड साइबर पुलिस भी इसी मामले में केस दर्ज कर चुकी थी।
नई दिल्ली से किए गए थे कॉल
जांच अधिकारियों के अनुसार, प्रारंभिक तकनीकी जांच में सामने आया है कि कॉल नई दिल्ली से किए गए थे। पुलिस ने मोबाइल नंबर के आधार पर एक संदिग्ध की पहचान भी कर ली है।
अब यह जांच की जा रही है कि इस्तेमाल किया गया सिम कार्ड असली दस्तावेजों पर जारी हुआ था या फर्जी पहचान का इस्तेमाल किया गया। मामले की जांच के लिए पुलिस की एक टीम जल्द ही नई दिल्ली जाकर आगे की कार्रवाई करेगी।
साइबर अपराधों को लेकर बढ़ी चिंता
यह मामला दिखाता है कि साइबर अपराधी अब राजनीतिक हस्तियों और उनके कार्यालयों के नाम का इस्तेमाल कर बड़े स्तर पर ठगी की कोशिश कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को यदि प्रभावशाली पद, नौकरी, राजनीतिक नियुक्ति या सरकारी लाभ दिलाने के नाम पर धन की मांग की जाती है, तो पहले उसकी आधिकारिक पुष्टि अवश्य करनी चाहिए।
पुलिस ने आम लोगों और जनप्रतिनिधियों से भी अपील की है कि वे ऐसे किसी भी संदिग्ध कॉल या संदेश की तुरंत संबंधित एजेंसियों को सूचना दें।केरल में सामने आया यह मामला साइबर ठगी के बदलते स्वरूप का बड़ा उदाहरण है। प्रियंका गांधी वाड्रा के निजी सचिव बनकर करोड़ों रुपये की मांग करने वाले आरोपी के खिलाफ पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में एक संदिग्ध की पहचान होने की बात सामने आई है, जबकि पूरे नेटवर्क का पता लगाने के लिए साइबर पुलिस विस्तृत जांच कर रही है।

