ग्रेटर नोएडा में खुदाई बनी तबाही! जेसीबी चलते ही धंस गई जमीन, देखते ही देखते ढह गई दुकान और दो मंजिला इमारत

ग्रेटर नोएडा: उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा से गुरुवार को एक बड़ा हादसा सामने आया, जिसने निर्माण कार्यों के दौरान बरती जाने वाली सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सूरजपुर थाना क्षेत्र के तिलपता गांव में नाले की सफाई और चौड़ीकरण के लिए जेसीबी मशीन से खुदाई की जा रही थी। इसी दौरान अचानक जमीन धंस गई और उसके किनारे बनी एक दुकान तथा पास का निर्माणाधीन दो मंजिला मकान देखते ही देखते भरभराकर गिर पड़ा।

घटना इतनी तेज़ी से हुई कि आसपास मौजूद लोग कुछ समझ पाते, उससे पहले पूरी इमारत मलबे में बदल चुकी थी। हादसे का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें भवन कुछ ही सेकंड में गिरता दिखाई दे रहा है। वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।

खुदाई के दौरान धंस गई जमीन

प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, नाले की खुदाई कई घंटों से जारी थी। जेसीबी द्वारा मिट्टी हटाने के दौरान किनारे की जमीन कमजोर हो गई और अचानक धंस गई। जमीन धंसते ही उसके ऊपर बनी दुकान और निर्माणाधीन दो मंजिला इमारत का संतुलन बिगड़ गया। कुछ ही क्षणों में पूरा ढांचा ढह गया।

स्थानीय लोगों ने बताया कि यदि यह हादसा उस समय होता जब दुकान में लोग मौजूद होते या निर्माण कार्य चल रहा होता, तो बड़ा जान-माल का नुकसान हो सकता था।

बिजली लाइन टूटी, उठीं तेज चिंगारियां

भवन गिरने के साथ ही वहां से गुजर रही बिजली की लाइन भी क्षतिग्रस्त हो गई। तार टूटकर आपस में टकराने लगे, जिससे तेज चिंगारियां उठीं। अचानक हुई इस घटना से पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई और लोग जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे।

सूचना मिलते ही बिजली विभाग ने तत्काल क्षेत्र की बिजली आपूर्ति बंद कर दी, जिससे किसी बड़े विद्युत हादसे को टाला जा सका।

वीडियो में कैद हुआ पूरा हादसा

पूरी घटना आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में रिकॉर्ड हो गई। वीडियो में साफ दिखाई देता है कि जैसे ही जमीन धंसती है, दुकान और इमारत कुछ ही सेकंड में नीचे बैठ जाती है। इस वीडियो के सामने आने के बाद निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों को लेकर नई बहस शुरू हो गई है।

स्थानीय लोगों ने उठाए सवाल

हादसे के बाद ग्रामीणों और स्थानीय लोगों ने प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया। उनका कहना है कि घनी आबादी वाले इलाके में इस तरह की खुदाई शुरू करने से पहले पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए जाने चाहिए थे।

लोगों का कहना है कि यदि पहले बैरिकेडिंग की जाती, आसपास के भवनों की मजबूती का तकनीकी परीक्षण होता और सुरक्षा घेरा बनाया जाता, तो शायद यह हादसा टाला जा सकता था।

पुलिस और प्रशासन ने संभाला मोर्चा

घटना की सूचना मिलते ही सूरजपुर थाना पुलिस मौके पर पहुंच गई। पुलिस ने पूरे क्षेत्र को घेरकर लोगों को सुरक्षित दूरी पर किया। प्रशासन की टीम ने मलबे का निरीक्षण किया और यह सुनिश्चित किया कि किसी व्यक्ति के दबे होने की आशंका न रहे।

कोतवाली प्रभारी उमेश नैथानी ने बताया कि हादसे में किसी प्रकार की जनहानि नहीं हुई है। हालांकि भवन पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है और घटना के कारणों की विस्तृत जांच की जा रही है।

निर्माण सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नाले, सड़क या भूमिगत निर्माण कार्य के दौरान आसपास की जमीन की स्थिरता का पहले तकनीकी आकलन किया जाना आवश्यक होता है। यदि घनी आबादी वाले क्षेत्र में खुदाई की जा रही हो, तो अतिरिक्त सुरक्षा उपाय अनिवार्य होने चाहिए।

स्थानीय लोगों ने मांग की है कि इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और निर्माण एजेंसी की भूमिका की भी जांच की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।

राहत की बात रही कि टली बड़ी त्रासदी

हालांकि हादसा बेहद भयावह था, लेकिन सबसे बड़ी राहत यह रही कि घटना के समय दुकान और निर्माणाधीन भवन में कोई मौजूद नहीं था। यदि वहां मजदूर या स्थानीय लोग मौजूद होते, तो यह हादसा कई लोगों की जान ले सकता था।

प्रशासन अब पूरे इलाके की सुरक्षा व्यवस्था और निर्माण कार्य की प्रक्रिया की समीक्षा कर रहा है ताकि आगे किसी भी प्रकार का जोखिम न रहे।

ग्रेटर नोएडा के तिलपता गांव में नाले की खुदाई के दौरान हुआ यह हादसा निर्माण कार्यों में सुरक्षा मानकों की अहमियत को एक बार फिर सामने लाता है। समय रहते लोगों के सुरक्षित होने से बड़ा हादसा टल गया, लेकिन इस घटना ने प्रशासनिक सतर्कता और तकनीकी जांच की आवश्यकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुलिस और संबंधित विभाग पूरे मामले की जांच में जुटे हैं।

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