‘पाकिस्तान में 4% हिंदुओं को बर्दाश्त कर रहे हैं’, जरदारी के बयान से मचा बवाल; जनगणना के आंकड़ों ने खोली पोल

इस्लामाबाद। पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी अपने एक बयान को लेकर विवादों में घिर गए हैं। 14 अगस्त को एक कार्यक्रम के दौरान जरदारी ने पाकिस्तान में रहने वाली हिंदू आबादी को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने दावा किया कि पाकिस्तान में करीब 4 प्रतिशत हिंदू रहते हैं और कहा कि पाकिस्तानी समाज की सोच ऐसी है जो दूसरे धर्मों के लोगों को ‘बर्दाश्त’ करती है। उनके इस बयान पर सवाल उठ रहे हैं, क्योंकि पाकिस्तान की 2023 की जनगणना में हिंदू आबादी का आंकड़ा इससे काफी अलग है।

जरदारी ने अपने संबोधन में भारत और पाकिस्तान की सामाजिक सोच की तुलना भी की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के नजरिए में अंतर है और पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू भारत जाने के बजाय पाकिस्तान में रहना पसंद करेंगे। उनके बयान के इसी हिस्से को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में बहस तेज हो गई है।

जरदारी ने हिंदुओं को लेकर क्या कहा?

राष्ट्रपति जरदारी ने अपने भाषण में पाकिस्तान की धार्मिक विविधता का जिक्र करते हुए कहा कि पाकिस्तानी मुसलमान दूसरे समुदायों को साथ लेकर चलने की सोच रखते हैं। इसी दौरान उन्होंने पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी 4 प्रतिशत होने का दावा किया।

उन्होंने भारत के संदर्भ में कहा कि भारतीयों का नजरिया अलग है और वहां ‘अखंड भारत’ जैसी विचारधारा की बात की जाती है। इसके विपरीत पाकिस्तान को उन्होंने मुस्लिम देश बताते हुए कहा कि वहां दूसरे धर्मों के लोगों को रहने की आजादी है।

जरदारी ने यह भी दावा किया कि पाकिस्तान में रहने वाले हिंदू भारत जाने के बजाय पाकिस्तान के साथ रहना पसंद करेंगे। उनके इस दावे पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं, क्योंकि इसे साबित करने के लिए उन्होंने कोई आंकड़ा या आधिकारिक स्रोत पेश नहीं किया।

जनगणना के आंकड़े जरदारी के दावे से अलग

जरदारी के बयान का सबसे अहम हिस्सा पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी से जुड़ा है। पाकिस्तान की 2023 की जनगणना के अनुसार, देश में हिंदुओं की संख्या करीब 52 लाख बताई गई है। कुल आबादी में उनकी हिस्सेदारी लगभग 2.17 प्रतिशत है।

इस लिहाज से राष्ट्रपति जरदारी का 4 प्रतिशत वाला दावा आधिकारिक जनगणना के आंकड़ों से मेल नहीं खाता। यही वजह है कि उनके बयान को लेकर सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में सवाल उठने लगे हैं।

यह अंतर मामूली नहीं है। 4 प्रतिशत का आंकड़ा 2.17 प्रतिशत की तुलना में काफी अधिक है। ऐसे में राष्ट्रपति जैसे संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा जनसंख्या से जुड़े आंकड़े का इस्तेमाल किए जाने पर तथ्यात्मक सवाल उठना स्वाभाविक है।

‘बर्दाश्त’ शब्द को लेकर भी विवाद

जरदारी के बयान में केवल जनसंख्या का आंकड़ा ही चर्चा में नहीं है। उन्होंने हिंदुओं के पाकिस्तान में रहने को लेकर जिस तरह ‘बर्दाश्त’ शब्द का इस्तेमाल किया, उसे लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

आलोचकों का कहना है कि किसी धार्मिक समुदाय के संदर्भ में ‘बर्दाश्त करने’ जैसी भाषा समान नागरिकता और धार्मिक स्वतंत्रता की बहस को प्रभावित करती है। खासतौर पर तब, जब बयान किसी आम नेता की बजाय देश के राष्ट्रपति की ओर से आया हो।

वहीं, जरदारी के समर्थक उनके बयान को पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के रहने और धार्मिक स्वतंत्रता के संदर्भ में देखते हैं। हालांकि, विवादित बयान के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक चर्चा तेज हो गई है।

पाकिस्तान की राजनीति में बढ़ रही उथल-पुथल

जरदारी का यह बयान पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता के बीच आया है। देश की राजनीति में सेना की भूमिका और प्रभाव को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। इसी बीच पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर के बढ़ते प्रभाव को लेकर भी कई तरह के दावे और चर्चाएं सामने आती रही हैं।

कुछ रिपोर्टों और सोशल मीडिया दावों में पाकिस्तान की मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था में संभावित बदलाव की अटकलें लगाई गई हैं। हालांकि, ऐसे दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है और इन्हें स्थापित तथ्य के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए।

किस कार्यक्रम में दिया गया बयान?

राष्ट्रपति जरदारी ने यह बयान इस्लामाबाद के यादगार-ए-फतह में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान दिया। यह कार्यक्रम पाकिस्तान के 14 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस से जुड़ा था।

कार्यक्रम में पाकिस्तान की राष्ट्रीय पहचान, सुरक्षा और भारत-पाकिस्तान संबंधों से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। इसी दौरान जरदारी ने भारत और पाकिस्तान की विचारधाराओं की तुलना करते हुए हिंदू आबादी को लेकर अपनी टिप्पणी की।

भारत-पाकिस्तान के बीच पहले से ही तनावपूर्ण राजनीतिक संबंधों के बीच जरदारी का यह बयान दोनों देशों के बीच बयानबाजी को और हवा दे सकता है।

बयान पर क्यों उठ रहे सवाल?

जरदारी के बयान को लेकर मुख्य रूप से दो सवाल सामने आ रहे हैं। पहला, पाकिस्तान में हिंदुओं की आबादी 4 प्रतिशत बताने का दावा आधिकारिक जनगणना के आंकड़ों से मेल नहीं खाता। दूसरा, एक धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय के लिए ‘बर्दाश्त’ जैसी भाषा का इस्तेमाल संवेदनशील माना जा रहा है।

पाकिस्तान की 2023 जनगणना के आंकड़ों के मुताबिक हिंदुओं की हिस्सेदारी करीब 2.17 प्रतिशत है। ऐसे में राष्ट्रपति के बयान और आधिकारिक आंकड़ों के बीच अंतर ने विवाद को और बढ़ा दिया है।

पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी का हिंदू आबादी को लेकर दिया गया बयान अब चर्चा का विषय बन गया है। एक तरफ उनके 4 प्रतिशत वाले दावे पर पाकिस्तान की आधिकारिक जनगणना के आंकड़े सवाल खड़े करते हैं, वहीं दूसरी तरफ ‘बर्दाश्त’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर भी बहस शुरू हो गई है। भारत-पाकिस्तान संबंधों के संवेदनशील माहौल में यह बयान राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर नई बहस को जन्म दे सकता है।

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