नेपाल में बदले सियासी समीकरण के बीच आर्मी चीफ धीरज सेठ का दौरा, काठमांडू में मिलेगा बड़ा सम्मान

नई दिल्ली। भारत और नेपाल के बीच सैन्य संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक अहम घटनाक्रम सामने आया है। भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ नेपाल की आधिकारिक यात्रा पर जा रहे हैं। काठमांडू में उन्हें नेपाली सेना के जनरल की मानद रैंक से सम्मानित किया जाएगा। नेपाल में हालिया राजनीतिक बदलाव के बाद भारतीय सेना प्रमुख का यह दौरा दोनों देशों के बीच रक्षा और रणनीतिक सहयोग के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

जनरल धीरज सेठ की यह यात्रा ऐसे समय हो रही है, जब नेपाल में बालेन शाह के नेतृत्व में नई सरकार सत्ता में है। पिछले कुछ समय में भारत और नेपाल के रिश्तों में राजनीतिक स्तर पर कई उतार-चढ़ाव देखने को मिले हैं। ऐसे माहौल में भारतीय सेना प्रमुख की उच्चस्तरीय यात्रा दोनों देशों के बीच संवाद को नई गति देने वाली मानी जा रही है।

आज से नेपाल दौरे पर जनरल धीरज सेठ

जनरल धीरज सेठ ने 30 जून को भारतीय सेना के 31वें प्रमुख के रूप में पदभार संभाला। नेपाल यात्रा के दौरान वह नेपाली सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिगदेल के साथ द्विपक्षीय सैन्य सहयोग और आपसी हितों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत करेंगे।

यात्रा के दौरान दोनों सेनाओं के बीच सहयोग, प्रशिक्षण, सैन्य संबंधों और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है। इसके अलावा जनरल सेठ नेपाल के शीर्ष राजनीतिक नेतृत्व से भी मुलाकात कर सकते हैं।

काठमांडू में मिलेगा खास सम्मान

जनरल धीरज सेठ की नेपाल यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा उन्हें दी जाने वाली मानद जनरल रैंक होगी। नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल उन्हें नेपाली सेना के जनरल की मानद उपाधि प्रदान करेंगे।

भारत और नेपाल के बीच यह विशेष सैन्य परंपरा कई दशकों पुरानी है। दोनों देशों के सेना प्रमुखों को एक-दूसरे की सेना में मानद जनरल की रैंक दिए जाने की परंपरा दोनों सेनाओं के बीच विशेष संबंधों को दर्शाती है।

यह सम्मान केवल औपचारिकता नहीं माना जाता, बल्कि दोनों देशों की सेनाओं के बीच लंबे समय से चले आ रहे सहयोग और आपसी विश्वास का प्रतीक भी है।

नेपाली सेना प्रमुख से होगी अहम बैठक

नेपाल यात्रा के दौरान जनरल धीरज सेठ अपने नेपाली समकक्ष जनरल अशोक राज सिगदेल से मुलाकात करेंगे। दोनों सैन्य प्रमुखों के बीच होने वाली बैठक में द्विपक्षीय रक्षा सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा होगी।

भारत और नेपाल के बीच सैन्य संबंधों का दायरा काफी व्यापक है। दोनों देशों की सेनाएं संयुक्त सैन्य अभ्यास करती हैं और एक-दूसरे के साथ प्रशिक्षण तथा अनुभव साझा करती हैं।

ऐसे में दोनों सेना प्रमुखों की बैठक को भविष्य के सैन्य सहयोग की दिशा तय करने के लिहाज से अहम माना जा रहा है।

बालेन शाह सरकार के बाद पहला बड़ा भारतीय सैन्य दौरा

नेपाल में बालेन शाह के नेतृत्व में नई सरकार बनने के बाद जनरल धीरज सेठ का दौरा खास महत्व रखता है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार वह इस नई सरकार के कार्यकाल में नेपाल का दौरा करने वाले पहले वरिष्ठ भारतीय अधिकारियों में शामिल हैं।

इससे पहले भारतीय विदेश सचिव विक्रम मिस्री की नेपाल यात्रा की चर्चा थी, लेकिन निर्धारित यात्रा आगे नहीं बढ़ सकी। ऐसे में भारतीय सेना प्रमुख की यात्रा को भारत-नेपाल संबंधों में उच्चस्तरीय संपर्क की महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

सात दशक पुरानी है मानद रैंक की परंपरा

भारत और नेपाल के बीच सेना प्रमुखों को मानद जनरल की रैंक देने की परंपरा दोनों देशों के विशेष सैन्य संबंधों की पहचान है। यह व्यवस्था दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे रक्षा सहयोग को दर्शाती है।

नेपाल के सेना प्रमुख जनरल अशोक राज सिगदेल को भी पहले भारत की ओर से भारतीय सेना के जनरल की मानद रैंक प्रदान की जा चुकी है। इस तरह दोनों देशों की सेनाओं के प्रमुख एक-दूसरे की सेना में सम्मानित जनरल की उपाधि रखते हैं।

भारत-नेपाल संबंधों के लिए क्यों अहम है दौरा?

भारत और नेपाल के बीच सिर्फ ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध ही नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच सुरक्षा और रक्षा सहयोग भी महत्वपूर्ण है। दोनों देशों की खुली सीमा और साझा सुरक्षा हितों के कारण सैन्य स्तर पर संवाद की भूमिका काफी अहम हो जाती है।

ऐसे समय में जब नेपाल की राजनीति में बदलाव हुआ है, भारतीय सेना प्रमुख का दौरा दोनों देशों के बीच संस्थागत संपर्क को मजबूत करने का अवसर दे सकता है।

जनरल धीरज सेठ की यात्रा से दोनों सेनाओं के बीच मौजूदा सहयोग की समीक्षा के साथ-साथ भविष्य के रक्षा संबंधों को लेकर भी बातचीत होने की उम्मीद है।

भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ का नेपाल दौरा भारत-नेपाल सैन्य संबंधों के लिए महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। काठमांडू में उन्हें नेपाली सेना के जनरल की मानद रैंक दिया जाना दोनों देशों की पुरानी सैन्य परंपरा और आपसी सम्मान को दर्शाता है। बालेन शाह के नेतृत्व में नई सरकार के बीच हो रही यह यात्रा राजनीतिक और रणनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि जनरल सेठ की उच्चस्तरीय बैठकों में भारत-नेपाल रक्षा सहयोग को लेकर क्या नई दिशा सामने आती है।

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