नई दिल्ली | मोदी सरकार 3.0 के एक साल पूरा होने के बाद अब केंद्रीय मंत्रिपरिषद में बड़े फेरबदल की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई वाली केंद्र सरकार में मंत्रियों की परफॉर्मेंस रिपोर्ट तैयार कर ली गई है और संभावना है कि जल्द ही कुछ नए चेहरों को शामिल किया जाएगा, वहीं कुछ मौजूदा मंत्रियों का कार्यभार बदला जा सकता है।
🔍 फेरबदल के संकेत: शाह-नड्डा की बैठक से बढ़ी हलचल
मंगलवार को गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा के बीच एक अहम बैठक हुई। भले ही इसे मानसून सत्र की रणनीति से जोड़ा गया हो, लेकिन सूत्रों के अनुसार यह बैठक संभावित कैबिनेट फेरबदल के मद्देनजर हुई है। सूत्रों का कहना है कि एक से अधिक मंत्रालयों का भार देख रहे मंत्रियों का कार्य हल्का किया जा सकता है।
👥 9 नए मंत्री बन सकते हैं कैबिनेट का हिस्सा
भारतीय संविधान के मुताबिक, लोकसभा सदस्यों की संख्या के अनुपात में केंद्र सरकार अधिकतम 81 मंत्रियों की नियुक्ति कर सकती है। वर्तमान में यह संख्या 72 है, यानी 9 और मंत्री बनाए जा सकते हैं।
फेरबदल के तीन प्रमुख आधार बताए जा रहे हैं:
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मंत्रियों का प्रदर्शन
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बिहार, बंगाल और उत्तर प्रदेश जैसे चुनावी राज्यों को प्राथमिकता
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युवा और नए चेहरों को कैबिनेट में स्थान देना
🗳️ चुनावी संतुलन की रणनीति
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बिहार: आगामी 2025 विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए यहां भाजपा अपना आधार और मजबूत करना चाहती है।
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पश्चिम बंगाल: 2026 विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी नेतृत्व संतुलन साधने की रणनीति पर काम कर रहा है।
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उत्तर प्रदेश: लोकसभा में सबसे ज़्यादा सीटें देने वाले इस राज्य को लेकर भी बड़े नाम सामने आ सकते हैं।
🗓️ कैबिनेट विस्तार की संभावित टाइमलाइन
यह स्पष्ट नहीं है कि 21 जुलाई को शुरू होने वाले मानसून सत्र से पहले विस्तार होगा या उसके बाद, लेकिन तय माना जा रहा है कि सत्र के आसपास ही यह बड़ा फैसला सामने आएगा।
🧾 निष्कर्ष:
मोदी सरकार 3.0 में यह पहला बड़ा फेरबदल होगा जो न सिर्फ युवा नेतृत्व को आगे बढ़ाएगा, बल्कि आगामी चुनावों के दृष्टिकोण से राजनीतिक समीकरण को भी संतुलित करेगा। इससे यह भी संकेत जाएगा कि भाजपा परफॉर्मेंस और जनहित को सर्वोपरि मानती है, न कि केवल पद आधारित संतुलन को।

