प्रधानमंत्री: नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को घाना गणराज्य की संसद को संबोधित करते हुए भारत और घाना के संबंधों को सामरिक और लोकतांत्रिक साझेदारी की नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने की बात कही। इस दौरान भारत और घाना के बीच चार अहम समझौतों (MoU) पर हस्ताक्षर हुए, जिससे दोनों देशों के बीच निवेश, विकास, ऊर्जा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को गति मिलेगी।
🗣️ “भारत सबके भले की बात करता है”: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा—
“भारत ने न केवल अपने लिए, बल्कि पूरी दुनिया के लिए कार्य किया है। कोरोना काल में भारत ने दुनिया को वैक्सीन भेजी, क्योंकि हमारा मंत्र है — सबका साथ, सबका विकास।”
उन्होंने कहा कि आज की दुनिया वैश्विक उठापटक से गुजर रही है, और ऐसे समय में लोकतंत्र की भूमिका पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गई है।
🏛️ घाना की संसद में ऐतिहासिक संबोधन
प्रधानमंत्री मोदी पहले भारतीय प्रधानमंत्री हैं जिन्होंने घाना की संसद में संबोधन किया। उन्होंने कहा—
“घाना साहस और लोकतंत्र के प्रतीक रूप में खड़ा है। अफ्रीका में भारत का एक मजबूत साझेदार है, और हम मिलकर शांति, स्थिरता और सतत विकास की दिशा में कार्य कर रहे हैं।”
🤝 भारत-घाना के बीच हुए चार समझौते:
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ऊर्जा सहयोग
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डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन और टेक्नोलॉजी
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स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार
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निवेश और व्यापार सहयोग
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इन समझौतों से दोनों देशों के बीच विकासशील राष्ट्रों की साझेदारी का आदर्श स्थापित होगा।
🌍 लोकतंत्र, वैश्विक स्थिरता और भारत की भूमिका
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में भारत के वैश्विक नेतृत्व, लोकतंत्र की मजबूती और ग्लोबल साउथ के समर्थन की बात की। उन्होंने यह भी कहा—
“आज जब दुनिया कई संकटों से जूझ रही है, तब भारत समावेशी विकास और साझा समाधान पर जोर दे रहा है।”
📌 निष्कर्ष:
पीएम मोदी का यह संबोधन न केवल भारत-घाना संबंधों को नई दिशा और ऊर्जा देता है, बल्कि यह भारत की वैश्विक नीति और “वसुधैव कुटुम्बकम्” की भावना को भी पुष्ट करता है। यह दौरा वैश्विक मंच पर भारत की सकारात्मक छवि और लोकतांत्रिक दृष्टिकोण को और मजबूत करेगा।

