समोसे का लालच देकर 7 साल की बच्ची को ले गए, 10 दिन से रच रहे थे साजिश; गैंगरेप और हत्या में चौंकाने वाला खुलासा

गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के राजनगर एक्सटेंशन स्थित निर्माणाधीन मॉल में सात वर्षीय बच्ची के अपहरण, सामूहिक दुष्कर्म और हत्या के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे नए और बेहद चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपियों ने यह वारदात अचानक नहीं, बल्कि पहले से बनाई गई साजिश के तहत अंजाम दी थी।

जांच के अनुसार, दोनों आरोपी पिछले करीब दस दिनों से बच्ची और उसके भाइयों के संपर्क में थे। वे बच्चों का विश्वास जीतने के लिए समय-समय पर उन्हें खाने-पीने की चीजें दिलाते थे। इसी भरोसे का फायदा उठाकर उन्होंने मासूम को अपने साथ ले जाकर जघन्य अपराध को अंजाम दिया।

10 दिनों से बच्चों से बढ़ा रहे थे मेलजोल

पीड़िता के पिता ने पुलिस को बताया कि घटना के बाद उनके 10 वर्षीय बेटे ने जानकारी दी कि दोनों आरोपी लगातार बच्चों से घुलने-मिलने की कोशिश कर रहे थे। वे बच्चों को टॉफी, नाश्ता और अन्य खाद्य पदार्थ देकर अपने करीब ला रहे थे। वारदात वाले दिन भी आरोपियों ने बच्ची और उसके भाई को समोसा खिलाया।

पुलिस के अनुसार, एक आरोपी बच्चे को दुकान पर बैठाकर लगभग 15 मिनट तक समोसा खिलाता रहा, जबकि दूसरे ने बच्ची को अपने साथ ले जाकर मॉल के भीतर पहुंचा दिया। दुकान संचालक ने भी इस बात की पुष्टि की है। सीसीटीवी फुटेज में शाम करीब 7:40 बजे आरोपी बच्ची के साथ जाते हुए दिखाई दिए हैं।

मॉल के अंदर हुई हैवानियत

निर्माणाधीन मॉल और झुग्गियों के बीच की दूरी बेहद कम बताई जा रही है। घटना वाले दिन मॉल में नाइट शिफ्ट भी नहीं थी। इसके बावजूद आरोपी बच्ची को अंदर ले जाने में सफल रहे।

जांच के दौरान तीसरी मंजिल पर मौजूद कमरे में संघर्ष के कई निशान मिले हैं। दीवारों पर खून के छींटे मिलने से आशंका है कि बच्ची ने आरोपियों का विरोध किया था। पुलिस के अनुसार, आरोपियों ने पाइप से सिर पर हमला कर उसकी हत्या कर दी और बाद में शव को बेसमेंट की ओर फेंक दिया।

सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

इस घटना के बाद निर्माणाधीन मॉल की सुरक्षा व्यवस्था भी सवालों के घेरे में आ गई है। जानकारी के अनुसार, जिस रास्ते से आरोपी बच्ची को लेकर ऊपर गए, वहां सुरक्षा गार्ड तैनात था।

पीड़ित परिवार ने सुरक्षा कर्मचारियों की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं। वहीं, सिक्योरिटी इंचार्ज और मेंटेनेंस विभाग एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आए। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है कि आखिर सुरक्षा व्यवस्था में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई।

आरोपियों का नहीं हुआ था पुलिस सत्यापन

जांच में यह भी सामने आया कि दोनों आरोपियों का पुलिस सत्यापन नहीं कराया गया था। मॉल प्रबंधन के पास यह स्पष्ट जानकारी भी नहीं थी कि आरोपी कब से साइट पर कार्यरत थे। पीड़ित परिवार का दावा है कि दोनों आरोपी करीब 10 से 15 दिन पहले ही वहां काम पर आए थे।

पुलिस अब ठेकेदार, निर्माण कंपनी और संबंधित अधिकारियों से भी पूछताछ कर रही है कि बिना सत्यापन के मजदूरों को कैसे काम पर रखा गया।

बीयर की खाली केन और गिलास मिले

घटनास्थल के निरीक्षण के दौरान मॉल परिसर के कई हिस्सों में बीयर की खाली केन और गिलास भी मिले हैं। स्थानीय मजदूरों का आरोप है कि रात के समय परिसर में असामाजिक तत्व शराब पीते हैं और सुरक्षा व्यवस्था होने के बावजूद उन्हें रोका नहीं जाता।

मजदूरों का कहना है कि शिकायत करने पर नौकरी जाने का डर रहता है, इसलिए वे चुप रहने को मजबूर रहते हैं।

दोनों आरोपी न्यायिक हिरासत में

पुलिस ने गिरफ्तार दोनों आरोपियों शहाबुद्दीन और विनय कुमार को अदालत में पेश किया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। दोनों के डीएनए सैंपल भी लिए गए हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।

जांच के दौरान विनय की उम्र को लेकर भी नया तथ्य सामने आया। शुरुआत में उसने खुद को नाबालिग बताया था, लेकिन मेडिकल जांच और दस्तावेजों की पुष्टि के बाद उसकी उम्र 18 वर्ष पाई गई। इसके बाद पुलिस ने उसके खिलाफ बालिग आरोपी के रूप में कार्रवाई शुरू कर दी।

पीड़ित परिवार ने मांगी फांसी

बेटी का अंतिम संस्कार करने के बाद लौटे पीड़ित पिता ने आरोपियों को फांसी की सजा देने की मांग की है। उनका कहना है कि किसी भी आर्थिक सहायता से उनकी बेटी वापस नहीं आ सकती। उन्होंने कहा कि दोषियों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए जिससे भविष्य में कोई भी मासूम इस तरह की दरिंदगी का शिकार न बने।

इस बीच समाजवादी पार्टी के प्रतिनिधिमंडल ने भी घटनास्थल का दौरा कर निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की मांग की है।

गाजियाबाद की यह घटना पूरे समाज को झकझोर देने वाली है। शुरुआती जांच से यह स्पष्ट संकेत मिले हैं कि वारदात सुनियोजित थी और आरोपियों ने पहले बच्चों का विश्वास जीतकर अपराध को अंजाम दिया। अब पुलिस फॉरेंसिक रिपोर्ट, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर मामले की हर कड़ी जोड़ने में जुटी है। साथ ही निर्माणाधीन मॉल की सुरक्षा व्यवस्था और संबंधित जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी जांच की जा रही है।

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