सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल: मणिपुर राहत शिविरों में 34 मौतें, सिर्फ 20 पोस्टमार्टम क्यों? सरकार से मांगा जवाब

नई दिल्ली: मणिपुर में आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों के लिए बनाए गए राहत शिविरों में हुई मौतों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से कई अहम सवाल पूछे हैं। अदालत ने विशेष रूप से यह जानना चाहा कि रिपोर्टों में 34 मौतों की जानकारी सामने आने के बावजूद केवल 20 मामलों में पोस्टमार्टम क्यों कराया गया। शीर्ष अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव से इस पूरे मामले पर हलफनामा दाखिल करने को कहा है।

17 सितंबर 2026 को सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने अप्राकृतिक मौतों की जांच, FIR दर्ज करने, मुआवजे और राहत शिविरों में रह रहे विस्थापित लोगों की सुरक्षा तथा गरिमा को लेकर भी राज्य से जवाब मांगा।

राहत शिविरों में मौतों पर अदालत की नजर

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने मामले की सुनवाई की। पीठ में न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना भी शामिल हैं। सुप्रीम कोर्ट की 16 सितंबर 2026 की कोर्ट सूची में भी यही पीठ दर्ज है।

अदालत ने जस्टिस गीता मित्तल समिति और अन्य रिपोर्टों में सामने आई जानकारी पर गौर करते हुए राहत शिविरों में हुई मौतों के संबंध में राज्य सरकार से विस्तृत जानकारी मांगी।

मुख्य सवाल यह है कि मौतों की परिस्थितियों की जांच किस स्तर तक हुई और किन मामलों में पोस्टमार्टम कराया गया। अदालत ने राज्य के मुख्य सचिव को इस संबंध में हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है।

34 मौतों में सिर्फ 20 पोस्टमार्टम क्यों?

सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह मुद्दा आया कि राहत शिविरों में दर्ज 34 मौतों में केवल 20 मामलों में पोस्टमार्टम कराया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इसी अंतर पर राज्य से स्पष्टीकरण मांगा है।

अदालत यह जानना चाहती है कि जिन मामलों में पोस्टमार्टम नहीं हुआ, वहां इसकी वजह क्या थी और मौत की परिस्थितियों को किस तरीके से दर्ज किया गया। विशेष रूप से अप्राकृतिक मौतों के मामले में जांच प्रक्रिया को लेकर अदालत ने सवाल उठाए हैं।

यह मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राहत शिविरों में रहने वाले लोग पहले से ही विस्थापन और असुरक्षा की स्थिति में हैं। ऐसे में मौतों की परिस्थितियों की स्वतंत्र और उचित जांच सुनिश्चित करना अदालत की चिंता का हिस्सा है।

अप्राकृतिक मौतों में FIR और तेज जांच का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने अप्राकृतिक मौतों के मामलों में FIR दर्ज करने और जांच को तेजी से आगे बढ़ाने पर जोर दिया है। अदालत ने मणिपुर राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण यानी MSLSA से भी स्थिति रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।

अदालत की ओर से यह भी कहा गया कि राहत शिविरों में रहने वाले आंतरिक रूप से विस्थापित लोगों की सुरक्षा और गरिमा सुनिश्चित की जानी चाहिए।

इसका मतलब यह है कि मामला सिर्फ मौतों की संख्या तक सीमित नहीं है, बल्कि विस्थापित लोगों को राहत शिविरों में उपलब्ध सुरक्षा, चिकित्सा और अन्य जरूरी व्यवस्थाओं से भी जुड़ा हुआ है।

मुआवजे पर भी सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब

सुनवाई के दौरान राहत शिविरों में अप्राकृतिक मौत के मामलों में दिए जा रहे मुआवजे का मुद्दा भी उठा। अदालत ने राज्य से यह स्पष्ट करने को कहा कि कुछ मामलों में 20,000 से 30,000 रुपये के मुआवजे का आधार क्या है।

मणिपुर में विस्थापित लोगों और पीड़ित परिवारों के लिए मुआवजे से संबंधित व्यवस्था पहले भी न्यायिक निगरानी का हिस्सा रही है। सुप्रीम कोर्ट के पुराने आदेशों में राहत शिविरों में भोजन और चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाओं तथा विस्थापित लोगों के पुनर्वास पर जोर दिया गया था।

CBI के 31 मामलों की जांच, 28 में अंतिम रिपोर्ट

सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने CBI से जुड़े मामलों की स्थिति भी अदालत के सामने रखी।

बताया गया कि CBI ने 31 मामलों की जांच की, जिनमें से 28 मामलों में अंतिम रिपोर्ट दाखिल की जा चुकी है, जबकि तीन मामलों में जांच जारी है।

वहीं राज्य पुलिस की ओर से जांचे जा रहे मामलों की संख्या इससे काफी अधिक है। राज्य सरकार ने आठ जिलों में स्थानीय पुलिस अधिकारियों को शामिल करते हुए 42 विशेष जांच दल (SIT) गठित किए हैं।

इन SIT ने 3,020 मामले दर्ज किए हैं। इनमें 302 मामलों में आरोपपत्र दाखिल किए गए, जबकि 1,583 मामलों में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल होने की जानकारी दी गई। 1,135 मामलों में जांच जारी बताई गई है। राज्य SIT द्वारा जांचे गए 33 मामलों में ट्रायल शुरू होने की जानकारी भी अदालत को दी गई।

विशेष अदालतों में मामलों की सुनवाई पर भी नजर

सुप्रीम कोर्ट ने 2023 में मणिपुर में हुई जातीय हिंसा से जुड़े CBI और NIA मामलों की सुनवाई के लिए बनाए गए विशेष ट्रायल कोर्ट में मामलों की प्रगति पर भी ध्यान दिया।

अदालत ने उम्मीद जताई कि इन मामलों की सुनवाई में अनावश्यक देरी नहीं होगी और लंबित मुकदमों को आगे बढ़ाया जाएगा। पीड़ितों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने के लिए संबंधित जानकारी विधिक सेवा से जुड़े वकीलों को दिए जाने की बात भी सामने आई।

मणिपुर हिंसा से जुड़े मामलों की न्यायिक निगरानी में सुप्रीम कोर्ट पहले भी राहत, पुनर्वास, मुआवजे और FIR जैसे मुद्दों पर दिशा-निर्देश जारी करता रहा है। 2023 के आदेशों में भी अदालत ने विस्थापित लोगों के लिए राहत शिविरों में भोजन और चिकित्सा जैसी बुनियादी सुविधाएं सुनिश्चित करने को कहा था।

अब राज्य सरकार को देना होगा विस्तृत जवाब

सुप्रीम कोर्ट के ताजा निर्देश के बाद अब मणिपुर के मुख्य सचिव को राहत शिविरों में हुई मौतों, पोस्टमार्टम, अप्राकृतिक मौतों में FIR, जांच की स्थिति, मुआवजे और विस्थापित लोगों की सुरक्षा से संबंधित जानकारी हलफनामे के माध्यम से देनी होगी।

इस मामले में अदालत का अगला रुख राज्य सरकार की ओर से दाखिल किए जाने वाले जवाब और उपलब्ध रिकॉर्ड पर निर्भर करेगा।

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