लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में राज्यसभा चुनाव को लेकर सोमवार को बड़ा सियासी घटनाक्रम सामने आया। भारतीय जनता पार्टी ने उत्तर प्रदेश से राज्यसभा की आठ सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। सूची में कई ऐसे चेहरे हैं जो लंबे समय से संगठन और प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहे हैं। वहीं दो महिला नेताओं को टिकट देकर पार्टी ने महिला प्रतिनिधित्व पर भी जोर दिया है।
भाजपा की ओर से घोषित आठ उम्मीदवारों में धर्मपाल सिंह, राधाकांत ओझा, प्रकाश पाल, विद्यासागर सोनकर, गोपी कृष्ण पांडेय, प्रियंका सिंह रावत, राम प्रताप सिंह चौहान और श्रुति गंगवार शामिल हैं। इस घोषणा के साथ ही उत्तर प्रदेश में राज्यसभा चुनाव की राजनीतिक तस्वीर काफी हद तक स्पष्ट हो गई है।
8 उम्मीदवारों में दो महिला चेहरे
भाजपा की सूची में प्रियंका सिंह रावत और श्रुति गंगवार को जगह दी गई है। प्रियंका सिंह रावत बाराबंकी से पूर्व लोकसभा सांसद रह चुकी हैं और उत्तर प्रदेश भाजपा में संगठनात्मक जिम्मेदारी भी संभाल चुकी हैं।
वहीं श्रुति गंगवार बरेली क्षेत्र में सक्रिय भाजपा नेता हैं। वह वरिष्ठ भाजपा नेता संतोष गंगवार की बेटी हैं। पार्टी ने उन्हें राज्यसभा उम्मीदवार बनाकर रोहिलखंड क्षेत्र को भी प्रतिनिधित्व देने का संकेत दिया है। श्रुति स्थानीय स्तर पर संगठनात्मक और सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय रही हैं।
प्रियंका सिंह रावत की वापसी ने खींचा ध्यान
राज्यसभा उम्मीदवारों की सूची में प्रियंका सिंह रावत का नाम खास तौर पर चर्चा में है। वह बाराबंकी से लोकसभा सांसद रह चुकी हैं। वर्ष 2014 में उन्होंने बाराबंकी लोकसभा सीट से चुनाव जीता था। इसके बाद वह भाजपा संगठन में भी सक्रिय रहीं।
राज्यसभा के लिए उनका चयन पार्टी की ओर से अनुभवी महिला नेतृत्व को उच्च सदन में प्रतिनिधित्व देने की रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है।
श्रुति गंगवार को टिकट, राजनीतिक विरासत भी अहम
बरेली की श्रुति गंगवार के नाम ने भी राजनीतिक हलकों का ध्यान खींचा है। वह संतोष गंगवार की बेटी हैं, जो लंबे समय तक बरेली की राजनीति में प्रभावशाली रहे हैं और वर्तमान में झारखंड के राज्यपाल हैं।
श्रुति गंगवार स्थानीय राजनीति और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय रही हैं। उनके नाम को उम्मीदवारों की सूची में शामिल किए जाने से बरेली और आसपास के क्षेत्र में भाजपा की राजनीतिक रणनीति को लेकर भी चर्चा तेज हो गई है।

धर्मपाल सिंह को भी मिला राज्यसभा का टिकट
भाजपा ने उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री धर्मपाल सिंह को भी राज्यसभा उम्मीदवार बनाया है। वह बरेली की आंवला विधानसभा सीट से विधायक हैं और प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय हैं।
उनका नाम सूची में आने से संगठन और सरकार के बीच सक्रिय नेताओं को उच्च सदन में प्रतिनिधित्व देने की पार्टी की नीति का संकेत मिलता है।
प्रकाश पाल के जरिए OBC प्रतिनिधित्व का संदेश
भाजपा ने प्रदेश पिछड़ा वर्ग मोर्चा के अध्यक्ष प्रकाश पाल को भी उम्मीदवार बनाया है। संगठन में उनकी भूमिका को देखते हुए यह फैसला पार्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
उम्मीदवारों की सामाजिक पृष्ठभूमि पर नजर डालें तो सूची में ओबीसी, अनुसूचित जाति और सामान्य वर्ग के नेताओं को स्थान मिला है। इससे साफ है कि उम्मीदवार चयन में सामाजिक प्रतिनिधित्व को भी महत्व दिया गया है।
विद्यासागर सोनकर और दलित प्रतिनिधित्व
पूर्व सांसद एवं वरिष्ठ भाजपा नेता विद्यासागर सोनकर को भी राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया गया है। वह पूर्वांचल से आने वाले प्रमुख दलित नेताओं में गिने जाते हैं और संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं।
उनका राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक भूमिका भाजपा के लिए राज्यसभा में उपयोगी साबित हो सकती है।
राधाकांत ओझा को भी मौका
भाजपा ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता राधाकांत ओझा को भी राज्यसभा का उम्मीदवार बनाया है। वह हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके हैं।
उनकी कानूनी पृष्ठभूमि और सार्वजनिक जीवन में लंबे अनुभव को देखते हुए उनका चयन सूची के अलग तरह के चेहरों में माना जा रहा है।
राम प्रताप सिंह चौहान का नाम आगरा के लिए खास
भाजपा की सूची में राम प्रताप सिंह चौहान का नाम आगरा और ब्रज क्षेत्र के लिहाज से विशेष महत्व रखता है। वह आगरा के एत्मादपुर विधानसभा क्षेत्र से विधायक रह चुके हैं और वर्तमान में भाजपा संगठन में प्रदेश महामंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
उनका राजनीतिक सफर जमीनी संगठन से शुरू होकर प्रदेश स्तर तक पहुंचा है। राज्यसभा उम्मीदवार बनाए जाने के बाद आगरा और आसपास के राजनीतिक क्षेत्रों में भी इस फैसले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
गोपी कृष्ण पांडेय को भी राज्यसभा का टिकट
आठवें उम्मीदवार के रूप में गोपी कृष्ण पांडेय का नाम सामने आया है। वह भाजपा संगठन से लंबे समय से जुड़े रहे हैं और किसान मोर्चा समेत संगठनात्मक गतिविधियों में भूमिका निभा चुके हैं।
उनका चयन पार्टी के संगठनात्मक ढांचे में लंबे समय से सक्रिय नेताओं को उच्च सदन तक पहुंचाने की रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है।
हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा को नहीं मिला दोबारा मौका
भाजपा की नई सूची का सबसे बड़ा राजनीतिक संदेश यह भी है कि मौजूदा राज्यसभा सदस्यों हरदीप सिंह पुरी और बीएल वर्मा को इस बार उम्मीदवार नहीं बनाया गया है। दोनों का मौजूदा कार्यकाल नवंबर 2026 में समाप्त होना है।
पार्टी ने उनकी जगह नए चेहरों को मौका दिया है। ऐसे में उम्मीदवारों की यह सूची केवल राज्यसभा चुनाव तक सीमित नहीं मानी जा रही, बल्कि इसे उत्तर प्रदेश में संगठन और आगामी राजनीतिक समीकरणों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।
16 अक्टूबर को होगा राज्यसभा चुनाव
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों के लिए चुनाव 16 अक्टूबर 2026 को होना है। भाजपा ने आठ उम्मीदवारों के नाम घोषित कर दिए हैं। पार्टी के विधानसभा में मौजूदा संख्याबल को देखते हुए उसके कई उम्मीदवारों की स्थिति मजबूत मानी जा रही है। नामांकन प्रक्रिया की अंतिम तारीख से ठीक पहले उम्मीदवारों की घोषणा ने प्रदेश की सियासत को और गर्म कर दिया है।
अब नजर विपक्षी दलों की रणनीति और अंतिम उम्मीदवारों पर रहेगी। खासतौर पर यदि अतिरिक्त उम्मीदवार मैदान में आते हैं तो चुनावी गणित और अधिक दिलचस्प हो सकता है।
राजनीतिक संदेश क्या?
भाजपा की आठ नामों वाली सूची में संगठन, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व, सामाजिक समीकरण और महिला भागीदारी का मिश्रण दिखाई देता है। पार्टी ने एक ओर वरिष्ठ नेताओं और संगठनात्मक चेहरों को मौका दिया है, वहीं दूसरी ओर पूर्व सांसदों और नए राजनीतिक चेहरों को भी उच्च सदन की दौड़ में शामिल किया है।
यूपी जैसे बड़े राजनीतिक राज्य से राज्यसभा के लिए भेजे जाने वाले चेहरों का चयन हमेशा व्यापक राजनीतिक संदेश देता है। ऐसे में यह सूची आने वाले समय में प्रदेश की राजनीति और संगठनात्मक समीकरणों पर भी असर डाल सकती है।



