दिल्ली में फिर गरमाया पत्रकारों की सुरक्षा का मुद्दा, प्रदर्शन कर रहे कई पत्रकार हिरासत में; FIR की मांग पर बढ़ा तनाव

नई दिल्ली। राजधानी दिल्ली में महिला पत्रकारों से कथित यौन उत्पीड़न के आरोपों को लेकर विवाद और गहरा गया है। 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर के आसपास हुए एक प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों पर कथित यौन उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए थे। इन शिकायतों को दिल्ली पुलिस ने आगे की जांच के लिए क्राइम ब्रांच को सौंप दिया है। इसी मामले में कार्रवाई की मांग को लेकर सोमवार को प्रदर्शन कर रहे कई लोगों को हिरासत में लिए जाने के बाद मामला फिर सुर्खियों में आ गया।

FIR की मांग को लेकर पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन

प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वे महिला पत्रकारों की शिकायतों पर FIR दर्ज कराने और घटनास्थल के CCTV फुटेज की जांच की मांग को लेकर पुलिस स्टेशन पहुंचे थे। रिपोर्टों के अनुसार कुछ प्रदर्शनकारी रविवार शाम से ही संसद मार्ग पुलिस स्टेशन के बाहर मौजूद थे।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्होंने पुलिस से शिकायतों की स्थिति और CCTV फुटेज के संबंध में जानकारी मांगी, लेकिन उन्हें अपेक्षित जवाब नहीं मिला। इसके बाद सोमवार सुबह कई प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया गया।

कितने लोगों को हिरासत में लिया गया?

उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार करीब 17 लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई है। इनमें पत्रकार, स्वतंत्र पत्रकार, यूट्यूबर और कथित पीड़ितों में से एक महिला पत्रकार भी शामिल बताई गई हैं। हिरासत में लिए गए लोगों को दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन ले जाया गया।

ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन की अध्यक्ष नेहा बोरा ने भी सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दावा किया कि दिल्ली कैंट पुलिस स्टेशन के पास प्रदर्शनकारी पत्रकारों को हिरासत में लिया गया है। उन्होंने कहा कि वकीलों का एक समूह हिरासत में लिए गए लोगों के संपर्क में है।

3 अक्टूबर के प्रदर्शन से शुरू हुआ विवाद

पूरे मामले की शुरुआत 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर क्षेत्र में हुए एक राजनीतिक प्रदर्शन के दौरान हुई। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर किया जा रहा था। प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति के बीच पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी थी।

इसी दौरान तीन महिला पत्रकारों ने पुलिसकर्मियों के खिलाफ कथित यौन उत्पीड़न की शिकायतें दीं। दिल्ली पुलिस ने शिकायतें प्राप्त होने की पुष्टि करते हुए उन्हें निष्पक्ष जांच के लिए क्राइम ब्रांच को स्थानांतरित करने की बात कही है।

महिला पत्रकारों ने क्या आरोप लगाए?

शिकायतों में महिला पत्रकारों ने अलग-अलग घटनाओं का जिक्र किया है। एक शिकायत के अनुसार, प्रदर्शन को कवर करते समय एक महिला पत्रकार ने महिला पुलिसकर्मियों की मौजूदगी को लेकर सवाल उठाया था। इसके बाद उसने एक पुलिस अधिकारी पर कथित तौर पर अनुचित व्यवहार करने का आरोप लगाया।

एक अन्य शिकायत में एक वीडियो पत्रकार ने आरोप लगाया कि प्रदर्शन के दौरान रिकॉर्डिंग करते समय एक पुलिसकर्मी ने उसके साथ अनुचित व्यवहार किया। ये सभी बातें शिकायतों में लगाए गए आरोप हैं और इनकी सत्यता जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।

पुलिस ने शिकायतों पर क्या कहा?

दिल्ली पुलिस के अनुसार 3 अक्टूबर को नई दिल्ली क्षेत्र में प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों की ओर से पुलिस अधिकारियों के खिलाफ यौन उत्पीड़न से संबंधित शिकायतें प्राप्त हुई थीं। पुलिस ने इन शिकायतों को क्राइम ब्रांच, कमला मार्केट को निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए भेजा है।

पुलिस की ओर से यह भी बताया गया है कि मामले की जांच अब संबंधित जांच एजेंसी द्वारा की जा रही है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार शिकायतों पर बयान दर्ज किए गए हैं और CCTV फुटेज की जांच भी जांच का हिस्सा है।

हिरासत को लेकर पुलिस का पक्ष

प्रदर्शनकारियों की हिरासत को लेकर सामने आई जानकारी में पुलिस की ओर से कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सभा से जुड़े प्रतिबंधों का हवाला दिया गया है। रिपोर्टों के अनुसार नई दिल्ली जिले में धारा 163 के तहत सार्वजनिक जमावड़े पर प्रतिबंध लागू था और प्रदर्शनकारियों को पहले हटने के लिए कहा गया था।

पुलिस का कहना है कि चेतावनी के बावजूद प्रदर्शन जारी रहने पर कार्रवाई की गई। दूसरी ओर प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे किसी नए मुद्दे को लेकर नहीं, बल्कि महिला पत्रकारों की शिकायतों पर कार्रवाई और FIR की मांग को लेकर पुलिस स्टेशन के बाहर मौजूद थे।

पत्रकारों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

इस घटना ने राजधानी में विरोध प्रदर्शन कवर करने वाले पत्रकारों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पत्रकारों का काम प्रदर्शन, पुलिस कार्रवाई और सार्वजनिक घटनाओं की रिपोर्टिंग करना होता है। ऐसे में रिपोर्टिंग के दौरान पत्रकारों के साथ किसी भी तरह के कथित दुर्व्यवहार की निष्पक्ष जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

मामले को लेकर प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया ने भी चिंता व्यक्त की और कहा कि पत्रकारों को बिना भय के अपना काम करने का अवसर मिलना चाहिए। परिषद ने महिला पत्रकार की शिकायत पर तत्काल कार्रवाई की जरूरत पर जोर दिया।

मामला अब क्राइम ब्रांच के पास

तीनों महिला पत्रकारों की शिकायतें अब क्राइम ब्रांच के पास हैं। ऐसे में जांच एजेंसी के सामने घटनाक्रम की परिस्थितियों, संबंधित पुलिसकर्मियों की भूमिका, उपलब्ध CCTV फुटेज और शिकायतकर्ताओं के बयानों की जांच करना अहम होगा।

इस जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि शिकायतों में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है और आगे पुलिस की ओर से किस तरह की कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।

राजनीतिक प्रदर्शन और पत्रकारों की भूमिका भी चर्चा में

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ प्रदर्शन और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर राजनीतिक गतिविधियां जारी हैं। इससे पहले भी प्रदर्शन के दौरान कई लोगों को हिरासत में लिए जाने की खबरें सामने आई थीं।

ऐसे माहौल में पत्रकारों की मौजूदगी और उनके साथ पुलिस के व्यवहार को लेकर विवाद ने मामले को और संवेदनशील बना दिया है। अब सभी की नजर क्राइम ब्रांच की जांच और शिकायतों पर होने वाली अगली कार्रवाई पर है।

आगे क्या होगा?

मामले में सबसे महत्वपूर्ण सवाल यही है कि शिकायतों की जांच किस निष्कर्ष तक पहुंचती है। क्या CCTV फुटेज और अन्य साक्ष्यों से लगाए गए आरोपों की पुष्टि होती है? क्या FIR दर्ज होती है? और क्या किसी पुलिस अधिकारी के खिलाफ विभागीय या कानूनी कार्रवाई की जाती है?

फिलहाल इन सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे। इसलिए आरोपों को लेकर अंतिम निष्कर्ष निकालने के बजाय जांच की प्रक्रिया और उसके परिणाम का इंतजार करना जरूरी है।

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