आगरा जिला अस्पताल का ‘मजाक’ बना दिया: महिला आयोग अध्यक्ष का CMs पर फूटा गुस्सा, बोलीं- मेरे आने पर क्यों लगवाए कूलर?

आगरा: के जिला अस्पताल में बदहाली और कुप्रबंधन का नजारा आज उस समय सबके सामने आया जब राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष डॉ. बबिता चौहान ने अचानक निरीक्षण किया। अस्पताल की अव्यवस्थाएं देखकर उनका गुस्सा सीएमएस (मुख्य चिकित्सा अधीक्षक) डॉ. रचना गुप्ता पर फूट पड़ा। डॉ. चौहान ने सीधे शब्दों में कहा कि जिला अस्पताल का “मजाक बना दिया” गया है।

‘मेरे आने पर क्यों लगवाए कूलर?’

निरीक्षण के दौरान डॉ. बबिता चौहान ने सीएमएस डॉ. रचना गुप्ता से तीखे सवाल पूछे। उन्होंने फटकार लगाते हुए कहा, “मेरे आने पर कूलर क्यों रखवाए? क्या आपको पता नहीं कि मरीजों और तीमारदारों को गर्मी में कितनी परेशानी होती है?” उन्होंने गलियारों में पंखों की अनुपस्थिति पर भी नाराजगी व्यक्त की, “कॉरिडोर में एक भी पंखा नहीं है, तीमारदार कैसे बैठेंगे? मौसम विभाग ने गर्मी का अलर्ट जारी किया है।” यह सवाल अस्पताल प्रशासन की लापरवाही को उजागर करता है, जहां मरीजों की सुविधा का ध्यान तभी रखा जाता है जब कोई उच्चाधिकारी निरीक्षण पर आता है।

टॉयलेट के दरवाजे गायब, सीएमएस को ‘कोई मतलब नहीं’

अस्पताल में साफ-सफाई और मूलभूत सुविधाओं की कमी भी डॉ. चौहान के सामने आई। उन्होंने पाया कि शौचालयों के दरवाजे गायब थे, जो स्वच्छता और मरीजों की गरिमा दोनों के लिए एक बड़ी चुनौती है। इन गंभीर खामियों को देखकर डॉ. चौहान ने तल्ख लहजे में कहा कि सीएमएस डॉ. रचना गुप्ता को “कोई मतलब नहीं” है। यह टिप्पणी सीधे तौर पर अस्पताल के मुखिया की जवाबदेही पर सवाल उठाती है।

मरीजों और तीमारदारों की दुर्दशा

आगरा जिला अस्पताल शहर के सबसे बड़े सरकारी अस्पतालों में से एक है, जहां रोजाना सैकड़ों मरीज इलाज के लिए आते हैं। भीषण गर्मी के इस मौसम में पंखे, कूलर और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव मरीजों और उनके साथ आए तीमारदारों के लिए नारकीय स्थिति पैदा कर रहा है। महिला आयोग की अध्यक्ष का यह निरीक्षण अस्पताल की वास्तविक स्थिति को दर्शाता है, जहाँ गरीबों और जरूरतमंदों को उचित सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

आगे की कार्रवाई की उम्मीद

राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष के इस निरीक्षण और सख्त फटकार के बाद उम्मीद की जा रही है कि जिला अस्पताल प्रशासन जल्द से जल्द इन कमियों को दूर करेगा। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या केवल निरीक्षण के समय ही व्यवस्थाएं सुधरती हैं या स्थायी रूप से मरीजों की सुविधा के लिए ठोस कदम उठाए जाते हैं। डॉ. बबिता चौहान ने स्पष्ट संदेश दिया है कि सरकारी अस्पतालों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

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