लखनऊ: देश की सबसे प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट (NEET) में उत्तर प्रदेश के टॉपर मुक्तेश की सफलता की कहानी सिर्फ उनकी कड़ी मेहनत और लगन की नहीं, बल्कि एक अनोखी प्रेरणा और पारिवारिक चुनौती की भी है। मुक्तेश ने खुलासा किया है कि उनकी प्रेरणा के स्रोत कोई अकादमिक गुरु नहीं, बल्कि प्रसिद्ध लेखक नेपोलियन हिल की किताबें थीं। साथ ही, उनके माता-पिता द्वारा दिया गया एक ‘चैलेंज’ भी उनकी सफलता का बड़ा कारण बना।
नेपोलियन हिल की किताबों से मिला ‘मोटिवेशन’
मुक्तेश बताते हैं, “मैं नेपोलियन हिल की कहानी पढ़ता था। उससे मोटिवेशन मिलता था। उसके अलग-अलग चैप्टर को पढ़कर अच्छा मोटिवेशन फील होता है।” उन्होंने आगे कहा, “किताब पढ़कर थोड़ा रिफ्रेश फील करता था। मैं सभी तैयारी करने वाले स्टूडेंट्स को इसे पढ़ने के लिए कहूंगा।” यह दर्शाता है कि कैसे अकादमिक दबाव के बीच, एक अच्छी किताब मानसिक ताजगी और सकारात्मकता बनाए रखने में सहायक हो सकती है। नेपोलियन हिल की पुस्तकें, विशेषकर ‘थिंक एंड ग्रो रिच’ (Think and Grow Rich), सफलता और व्यक्तिगत विकास पर केंद्रित हैं, जिसने स्पष्ट रूप से मुक्तेश को अपने लक्ष्य पर केंद्रित रहने में मदद की।
भाई के असफल होने पर पेरेंट्स ने दिया था ‘चैलेंज’
मुक्तेश की प्रेरणा का एक और महत्वपूर्ण पहलू उनके परिवार से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि उनके बड़े भाई नीट परीक्षा पास नहीं कर पाए थे। इसी बात पर उनके माता-पिता ने उन्हें डॉक्टर बनने का ‘चैलेंज’ दिया था। मुक्तेश ने इस चैलेंज को स्वीकार किया और उसे पूरा करने के लिए जी-जान लगा दी। यह पारिवारिक समर्थन और चुनौती ने उन्हें अपने लक्ष्य के प्रति और अधिक दृढ़ बना दिया।
कड़ी मेहनत और सही दिशा का परिणाम
मुक्तेश की यह सफलता उन लाखों छात्रों के लिए एक प्रेरणा है जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। उनकी कहानी बताती है कि सफलता केवल अकादमिक ज्ञान से नहीं मिलती, बल्कि सही मानसिकता, आत्म-प्रेरणा और एक स्पष्ट लक्ष्य के साथ आती है। नेपोलियन हिल से प्रेरणा लेना और माता-पिता के चैलेंज को सकारात्मक रूप से लेना, ये दोनों कारक मुक्तेश की इस शानदार उपलब्धि में महत्वपूर्ण साबित हुए।
उत्तर प्रदेश के इस होनहार छात्र ने न केवल अपने राज्य का नाम रोशन किया है, बल्कि यह भी साबित कर दिया है कि दृढ़ संकल्प और सही मार्गदर्शन से कोई भी चुनौती जीती जा सकती है।



