लखनऊ | उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों के मर्जर (विलय) पर आज एक बड़ा फैसला आने की संभावना है। लखनऊ हाईकोर्ट की डबल बेंच में इस मामले की सुनवाई गुरुवार को होगी। चीफ जस्टिस अरुण भंसाली और जस्टिस जसप्रीत सिंह की बेंच यह तय करेगी कि राज्य सरकार द्वारा दाखिल किए गए जवाब से कोर्ट संतुष्ट है या नहीं।
सीतापुर से जुड़े मामले पर कोर्ट सख्त
इससे पहले 24 जुलाई को कोर्ट ने सीतापुर में स्कूलों के मर्जर पर गंभीर सवाल उठाए थे। अदालत ने डीएम सीतापुर से इस मुद्दे पर विस्तृत जवाब मांगा था। कोर्ट का कहना था कि स्कूलों के मर्जर से बच्चों की पढ़ाई और शिक्षा का अधिकार प्रभावित नहीं होना चाहिए।
डीएम सीतापुर ने दाखिल किया जवाब
निर्धारित समय में डीएम सीतापुर ने अपना जवाब दाखिल कर दिया है। अब कोर्ट यह देखेगा कि सरकार और जिला प्रशासन द्वारा दी गई दलीलें बच्चों की शिक्षा, स्कूल संचालन और शिक्षक नियुक्ति की स्थिति को लेकर पर्याप्त हैं या नहीं।
राज्यभर में असर पड़ सकता है
इस मामले में आने वाला फैसला पूरे उत्तर प्रदेश के सरकारी स्कूलों पर असर डाल सकता है। यदि हाईकोर्ट सरकार के पक्ष में संतुष्ट होता है तो मर्जर प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा। वहीं, यदि कोर्ट को जवाब संतोषजनक नहीं लगा तो सरकार को नई कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए जा सकते हैं।
क्यों किया जा रहा मर्जर?
सरकार का तर्क है कि जिन स्कूलों में छात्र संख्या बेहद कम है, उन्हें पास के बड़े स्कूलों में मर्ज किया जा रहा है ताकि संसाधनों का बेहतर उपयोग हो सके और बच्चों को बेहतर शिक्षा माहौल मिले। हालांकि, कई शिक्षा विशेषज्ञों और अभिभावकों ने इस फैसले पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि इससे बच्चों की पढ़ाई में बाधा आएगी और ग्रामीण इलाकों में स्कूल तक पहुंचने की दिक्कतें बढ़ेंगी।
निष्कर्ष: आज हाईकोर्ट का फैसला यह तय करेगा कि यूपी में सरकारी स्कूलों के मर्जर की प्रक्रिया जारी रहेगी या उसमें बदलाव किया जाएगा। शिक्षा व्यवस्था और लाखों बच्चों के भविष्य पर इस फैसले का सीधा असर पड़ सकता है।

