सुप्रीम कोर्ट ने कहा- “जब पढ़ेगा इंडिया, तभी बढ़ेगा इंडिया”: 25 हजार अनुदेशकों के मानदेय पर 3 घंटे सुनवाई, जल्द आ सकता राहत का आदेश

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में बेसिक शिक्षा विभाग के 25 हजार अनुदेशकों के मानदेय के विवाद ने सुप्रीम कोर्ट में महत्वपूर्ण मोड़ ले लिया है। मंगलवार को करीब 3 घंटे चली सुनवाई के बाद जस्टिस पंकज मित्तल और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले की डबल बेंच ने मामला सुरक्षित रख लिया। कोर्ट ने राज्य सरकार और याचिकाकर्ताओं को तीन दिन के भीतर अपना जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए।

सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट संदेश: “जब पढ़ेगा इंडिया, तभी बढ़ेगा इंडिया”

सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से तीखे सवाल पूछे। जस्टिस मित्तल ने कहा, “जब पढ़ेगा इंडिया, तभी तो बढ़ेगा इंडिया। आपको मानदेय देने में क्या दिक्कत है?” इस पर राज्य सरकार के वकील ने कोर्ट के सुझाव पर सहमति जताई। इस स्पष्ट अभिव्यक्ति से यह संकेत मिला कि कोर्ट अनुदेशकों के पक्ष में फैसला देने की ओर अग्रसर है।

2017 में मानदेय दोगुना किया गया था

बेसिक शिक्षा विभाग में कार्यरत अनुदेशकों का मानदेय 2017 में ₹8,470 से बढ़ाकर ₹17,000 किया गया था। लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद नए सिरे से लागू नहीं किया गया। इससे उत्पन्न विवाद ने अनुदेशकों को न्यायालय का रुख करने पर मजबूर कर दिया।

लखनऊ हाईकोर्ट का आदेश और वर्तमान सुप्रीम कोर्ट की प्रक्रिया

लखनऊ हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने पहले ही अनुदेशकों को ₹17,000 मानदेय के साथ 9% ब्याज देने का आदेश दिया था। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ अपील दर्ज की थी। सुप्रीम कोर्ट की दो साल बाद की सुनवाई में वरिष्ठ अधिवक्ता सखाराम यादव, पी.एस. पटवालिया, दुर्गा तिवारी ने याचिकाकर्ताओं का पक्ष रखा।

अनुदेशकों को जल्द मिलने की उम्मीद

विधिक सलाहकार बृजेश त्रिपाठी के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट का रुख अनुदेशकों के पक्ष में नजर आ रहा है। बेंच ने संकेत दिए हैं कि विस्तृत आदेश जल्द पास किया जाएगा। इससे अनुदेशकों को भरोसा है कि हाईकोर्ट का आदेश बरकरार रखते हुए उन्हें 17 हजार रुपए मानदेय का लाभ मिलेगा।

भविष्य की राह: शिक्षा क्षेत्र में सुधार की आवश्यकता

सुप्रीम कोर्ट के तीखे सवाल और निर्देश शिक्षा क्षेत्र के प्रति संवेदनशीलता का प्रतीक हैं। शिक्षा को प्राथमिकता देने की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए यह मामला शिक्षकों के अधिकार की दिशा में मील का पत्थर बन सकता है।


निष्कर्ष:

उत्तर प्रदेश के 25 हजार अनुदेशकों के मानदेय मामले में सुप्रीम कोर्ट ने शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। तीन घंटे चली सुनवाई के बाद स्पष्ट संकेत मिलते हैं कि जल्द ही न्याय मिलेगा। इस कदम से न केवल अनुदेशकों का हक सुनिश्चित होगा, बल्कि देश की शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने का संदेश भी जाएगा।

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