लखनऊ में SGPGI का 29वां दीक्षांत समारोह: डिप्टी सीएम बोले- प्राइवेट हॉस्पिटल भी PGI के नाम पर चलते हैं, राज्यपाल ने दी संवेदनशीलता की सीख

लखनऊ। संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) का 29वां दीक्षांत समारोह आज भव्य रूप से संपन्न हुआ। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल की अध्यक्षता में आयोजित इस समारोह में 415 छात्रों को डिजिलॉकर पर 10 सेकेंड में डिग्री अपलोड करके प्रदान की गई।

डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक का महत्वपूर्ण बयान

समारोह के दौरान चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, लिवर एक्सपर्ट डॉ. नागेश्वर रेड्डी, संस्थान निदेशक पद्मश्री डॉ. आरके धीमान और डीन डॉ. शालीन कुमार के साथ डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक भी उपस्थित रहे। डिप्टी सीएम ने मंच पर भाषण देते हुए कहा कि कई प्राइवेट हॉस्पिटल भी अपने नाम के साथ “EX. PGI” लिखकर PGI का प्रचार करते हैं। उन्होंने यह भी जताया कि चिकित्सा शिक्षा क्षेत्र में सेवा को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।

डिजिलॉकर पर डिग्रियाँ वितरित, तकनीकी नवाचार का प्रदर्शन

राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने 415 छात्रों को PhD, DM, MCH, MD, BSc, MSc Nursing समेत अन्य कोर्स में उत्तीर्ण डिग्री डिजिलॉकर पर अपलोड कर दी। राज्यपाल ने यह कदम शिक्षा क्षेत्र में डिजिटल परिवर्तन की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।

शोध और चिकित्सा क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मान

समारोह के दौरान 17 डॉक्टर और रेजिडेंट को उनके सराहनीय योगदान के लिए विशेष पुरस्कार प्रदान किए गए। इनमें प्रो. एसआर नाइक अवार्ड फॉर रिसर्च इन्वेस्टीगेटर, प्रो. एसएस अग्रवाल अवार्ड फॉर एक्सीलेंस इन रिसर्च, डॉ. आरके शर्मा अवार्ड फॉर बेस्ट DM/MCH छात्र, मैक्सिमम पेटेंट और मैक्सिमम ग्रांट पुरस्कार शामिल थे।

राज्यपाल की संवेदनशीलता भरी टिप्पणियाँ

राज्यपाल ने कहा कि राज्य और सेंट्रल यूनिवर्सिटी की तुलना करना उचित नहीं है क्योंकि सेंट्रल यूनिवर्सिटी को केंद्र से ग्रांट मिलती है जबकि स्टेट यूनिवर्सिटी अपनी आर्थिक जिम्मेदारी खुद उठाती है। उन्होंने NAAC और NIRF रैंकिंग में बेहतर प्रदर्शन का संकल्प लिया और स्टूडेंट्स को अच्छे नागरिक बनने की प्रेरणा दी।

चिकित्सा शिक्षा के भविष्य पर जोर

डॉ. नागेश्वर रेड्डी ने छात्रों को सम्बोधित करते हुए कहा कि SGPGI देश ही नहीं बल्कि दुनिया के बेहतरीन मेडिकल कॉलेजों में से एक है। उन्होंने बताया कि PGI चंडीगढ़ में गैस्ट्रोएंट्रोलॉजी विभाग देश में नंबर-1 है। उन्होंने छात्रों से प्रेरित होकर समाज की सेवा करने की अपील की।

ग्रामीण चिकित्सा व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता

राज्यपाल ने कहा कि सरकारी चिकित्सा सुविधाएं मजबूत होनी चाहिए, क्योंकि वर्तमान में CHC-PHC में डॉक्टरों की भारी कमी है। उन्होंने यह भी कहा कि मेडिकल छात्रों को कम से कम तीन साल ग्रामीण क्षेत्रों में सेवा करना अनिवार्य किया जाए, ताकि वहां स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत हो।

फीस नीति पर चिंता व्यक्त की गई

डिप्टी सीएम ने प्राइवेट हॉस्पिटल की ऊँची फीस पर चिंता जताते हुए कहा कि मेडिकल स्कूलों में फीस ₹15 लाख से ₹30 लाख तक निर्धारित की जाती है। उन्होंने सुझाव दिया कि प्राइवेट हॉस्पिटल कम से कम हर साल पांच मरीजों का मुफ्त इलाज करें।

भविष्य की योजना

मयंकेश्वर शरण सिंह ने छात्रों को सलाह दी कि वे सरकारी अस्पतालों में ज्यादा एक्सपोजर लें ताकि वे बेहतर चिकित्सक बन सकें। उन्होंने यह भी कहा कि अगले पांच वर्षों में एम्स को देश में नंबर-1 मेडिकल संस्थान बनाना प्राथमिक लक्ष्य है।


निष्कर्ष:

SGPGI का यह दीक्षांत समारोह शिक्षा में डिजिटल क्रांति, समानता, संवेदनशीलता, और समाज सेवा की एक मिसाल बनकर उभरा। राज्यपाल, डिप्टी सीएम, डॉक्टर और अन्य गणमान्य अतिथियों ने चिकित्सा शिक्षा के भविष्य की दिशा स्पष्ट की और समाज के लिए प्रेरणादायक संदेश दिया।

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