राम मंदिर चढ़ावा चोरी के बाद बड़ा बदलाव! अब सोना-चांदी चढ़ाने से बच रहे श्रद्धालु, कर्मचारियों ने किया चौंकाने वाला खुलासा

अयोध्या: राम मंदिर में सामने आए चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद श्रद्धालुओं की आस्था पर कोई असर नहीं पड़ा है, लेकिन दान देने के तरीके में बड़ा बदलाव जरूर देखने को मिल रहा है। मंदिर परिसर से जुड़े कर्मचारियों का कहना है कि पहले जहां श्रद्धालु भावुक होकर सोने-चांदी के आभूषण, सिक्के और अन्य कीमती वस्तुएं दानपात्र में अर्पित कर देते थे, वहीं अब ऐसे चढ़ावे लगभग बंद हो गए हैं।

मंदिर प्रशासन से जुड़े कर्मचारियों के अनुसार, श्रद्धालु पहले की तरह नकद दान तो कर रहे हैं, लेकिन बहुमूल्य आभूषण दान करने से बच रहे हैं। चोरी की घटना के बाद लोगों में सतर्कता बढ़ी है और वे यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि उनका चढ़ावा सुरक्षित तरीके से मंदिर तक पहुंचे।

10 दिनों में नहीं मिला कोई कीमती आभूषण

चढ़ावा गणना से जुड़े कर्मचारियों का कहना है कि पहले दानपात्र खोलने पर नोटों के बीच से सोने-चांदी की अंगूठियां, चेन, झुमके, बाली, लॉकेट, कंगन और सिक्के निकलना सामान्य बात थी। इन्हें अलग सुरक्षित रखकर रिकॉर्ड किया जाता था।

हालांकि, कर्मचारियों के मुताबिक पिछले लगभग 10 दिनों में दानपात्र से एक भी बहुमूल्य आभूषण प्राप्त नहीं हुआ। उनका मानना है कि चोरी की घटना के बाद श्रद्धालु अधिक सतर्क हो गए हैं और अब कीमती वस्तुएं दान करने से बच रहे हैं।

दान प्रक्रिया में लागू हुई नई व्यवस्था

मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने के लिए दान प्रक्रिया में भी बदलाव किया है। अब यदि कोई श्रद्धालु सोना, चांदी या अन्य बहुमूल्य आभूषण दान करता है, तो उसका नाम, पता और दान की गई वस्तु का पूरा विवरण दर्ज किया जाएगा।

इसके लिए मंदिर परिसर में अलग से कर्मचारी तैनात किए गए हैं, जो तत्काल पूरी प्रक्रिया पूरी करेंगे। पहले इस प्रकार की विस्तृत व्यवस्था नहीं थी।

कर्मचारियों की कमी से बढ़ा काम का दबाव

सूत्रों के अनुसार, चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद 23 कर्मचारियों के काम छोड़ने से चढ़ावा गणना व्यवस्था प्रभावित हुई है। फिलहाल केवल 13 कर्मचारी ही सुबह से शाम तक पूरे चढ़ावे की गणना का कार्य संभाल रहे हैं।

स्थिति यह है कि पहले जहां दो अलग-अलग शिफ्टों में काम होता था, वहीं अब कर्मचारियों को लगातार लंबी शिफ्ट में काम करना पड़ रहा है।

कर्मियों का कहना है कि काम का दबाव लगातार बढ़ा है, लेकिन वेतन और सुविधाओं में कोई बदलाव नहीं किया गया है।

बैंक अधिकारियों को भी संभालनी पड़ रही जिम्मेदारी

कर्मचारियों की कमी के कारण अब केवल गणना कर्मियों पर ही नहीं बल्कि बैंक अधिकारियों और प्रबंधकों पर भी अतिरिक्त जिम्मेदारी आ गई है।

सूत्रों के मुताबिक पहले बैंक अधिकारी केवल निगरानी करते थे, लेकिन अब कई बार उन्हें स्वयं भी चढ़ावे की गिनती में सहयोग करना पड़ रहा है। वरिष्ठ अधिकारी नियमित रूप से काउंटिंग रूम का निरीक्षण भी कर रहे हैं।

एसआईटी की जांच जारी

चढ़ावा चोरी मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (SIT) लगातार विभिन्न पहलुओं की पड़ताल कर रही है।

सूत्रों के अनुसार, जांच केवल तत्कालीन ट्रस्ट पदाधिकारियों तक सीमित नहीं रही बल्कि ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि की प्रशासनिक और वित्तीय जिम्मेदारियों से जुड़े बिंदुओं की भी समीक्षा की गई।

हालांकि, एसआईटी की अंतिम रिपोर्ट अभी सार्वजनिक नहीं की गई है और जांच जारी है।

निर्माणाधीन भवन को लेकर भी कार्रवाई

मामले के आरोपी लवकुश मिश्रा से जुड़े निर्माणाधीन भवन को लेकर अयोध्या विकास प्राधिकरण (एडीए) की कार्रवाई भी जारी है।

आरोपी की पत्नी सुप्रिया मिश्रा ने भवन से संबंधित दस्तावेज जमा करने के लिए अतिरिक्त समय मांगा था। प्राधिकरण ने उन्हें केवल सात दिन की मोहलत दी है।

एडीए के अनुसार, यदि निर्धारित समय के भीतर आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए गए, तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

श्रद्धालुओं में आस्था बरकरार, लेकिन बढ़ी सतर्कता

मंदिर परिसर में आने वाले श्रद्धालुओं का कहना है कि उनकी आस्था पहले जैसी ही है, लेकिन अब वे चाहते हैं कि मंदिर में दान की पूरी व्यवस्था पारदर्शी और सुरक्षित हो।

विशेषज्ञों का भी मानना है कि धार्मिक संस्थानों में दान व्यवस्था की पारदर्शिता बढ़ने से श्रद्धालुओं का भरोसा और मजबूत होगा

राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण के बाद श्रद्धालुओं के व्यवहार में स्पष्ट बदलाव देखने को मिल रहा है। नकद दान जारी है, लेकिन सोना-चांदी जैसे बहुमूल्य आभूषणों का चढ़ावा लगभग बंद हो गया है। वहीं मंदिर प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और दान प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी बनाने के लिए नई व्यवस्थाएं लागू की हैं। दूसरी ओर, एसआईटी की जांच और प्रशासनिक कार्रवाई अभी भी जारी है।

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