गोंडा में बहुचर्चित अनामिका शुक्ला प्रकरण में यूपी एसटीएफ ने लखनऊ हाईकोर्ट में अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट दाखिल कर दी है। रिपोर्ट में फर्जीवाड़े की पुष्टि करते हुए कहा गया है कि अनामिका शुक्ला के मामले में गंभीर अनियमितताएं हुई हैं।
एसटीएफ ने कोर्ट को बताया कि मामले की जांच के दौरान विद्यालय प्रबंधक और संबंधित अधिकारी सहयोग नहीं कर रहे हैं। साथ ही, नगर कोतवाली में दर्ज मुकदमे को निरस्त करने के लिए आरोपियों की ओर से दाखिल याचिका पूरी तरह से बलहीन है और इसे न्याय हित में खारिज किया जाना चाहिए।
2017 से 2025 तक हुआ वेतन भुगतान
जांच अधिकारी सौरभ मिश्रा ने रिपोर्ट में बताया कि वर्ष 2017 से जनवरी 2025 तक अनामिका शुक्ला को नियमित रूप से वेतन का भुगतान किया गया। वेतन संशोधन से जुड़े मांग पत्र विद्यालय से वित्त एवं लेखा विभाग को भेजे जाते थे, जिन पर विद्यालय प्रबंधक, प्रधानाचार्य और अन्य संबंधित अधिकारियों के हस्ताक्षर मौजूद थे।
जुलाई 2022 से जनवरी 2025 तक के वेतन संशोधन पत्र एसटीएफ को मिले हैं और इन दस्तावेजों पर सभी संबंधित लोगों के हस्ताक्षर पाए गए हैं।
प्रबंधक से सहयोग नहीं मिला
विद्यालय के प्रबंधक दिग्विजय नाथ पांडे को 20 अगस्त 2025 से 8 दिसंबर 2025 के बीच छह बार नोटिस जारी कर व्यक्तिगत रूप से जांच में शामिल होने को कहा गया। इसके बावजूद उन्होंने न तो जांच में सहयोग किया और न ही अनामिका शुक्ला की नियुक्ति से जुड़े कोई अभिलेख उपलब्ध कराए।
हालांकि 14 अगस्त को प्रबंधक ने यूपी एसटीएफ अयोध्या कार्यालय में बयान दर्ज कराया, लेकिन नियुक्ति से संबंधित कोई भी पत्रावली अब तक एसटीएफ को नहीं सौंपी गई।
नियुक्ति से जुड़े दस्तावेज नहीं मिले
एसटीएफ ने कोर्ट को बताया कि प्रबंधक से अनामिका शुक्ला की नियुक्ति से संबंधित विज्ञापन, प्रबंध समिति का प्रस्ताव, बेसिक शिक्षा अधिकारी को भेजा गया अनुमोदन पत्र, प्रथम वेतन भुगतान से जुड़ा लेखा पत्र, उपस्थिति पंजिका सहित अन्य आवश्यक दस्तावेज मांगे गए थे, लेकिन इनमें से कोई भी उपलब्ध नहीं कराया गया।
याचिका खारिज करने की मांग
एसटीएफ ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया है कि विवेचना और साक्ष्य संकलन के लिए न्यायोचित समय प्रदान किया जाए। साथ ही आरोपियों द्वारा मुकदमा निरस्त कराने के लिए दाखिल याचिका को बलहीन बताते हुए खारिज करने की मांग की गई।
इस प्रकरण में निलंबित बीएसए अतुल कुमार तिवारी, तत्कालीन वित्त एवं लेखा अधिकारी सिद्धार्थ दीक्षित, पटल लिपिक सुधीर कुमार सिंह, पटल लिपिक अनुपम पांडेय, अनामिका शुक्ला, विद्यालय प्रबंधक दिग्विजय नाथ और प्रधानाचार्य उमेश चंद तिवारी ने लखनऊ हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी, जिसमें नगर कोतवाली में दर्ज मुकदमा निरस्त करने की मांग की गई थी।
उल्लेखनीय है कि इस पूरे मामले की जांच हाईकोर्ट के आदेश पर यूपी एसटीएफ कर रही है और वर्तमान में साक्ष्य संकलन और विवेचना जारी है।
निष्कर्ष:
यूपी एसटीएफ की प्रारंभिक रिपोर्ट में अनामिका शुक्ला प्रकरण की गंभीर अनियमितताओं का खुलासा हुआ है। स्कूल प्रबंधक और अधिकारियों के सहयोग न करने के बावजूद जांच जारी है। कोर्ट से याचिकाओं को खारिज करने की मांग की गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रकरण का निष्पक्ष विवेचना के जरिए ही समाधान निकलेगा।

