मुंबई: भारत की अर्थव्यवस्था आने वाले दो दशकों में ऐतिहासिक छलांग लगाने वाली है। रेटिंग एजेंसी अर्न्स्ट एंड यंग (EY) की एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि साल 2047 तक भारत की इकोनॉमी मौजूदा स्तर से करीब 5.25 गुना बढ़कर 26 ट्रिलियन डॉलर (करीब 2,314 लाख करोड़ रुपए) तक पहुंच सकती है। वर्तमान में भारत की अर्थव्यवस्था लगभग 4.18 ट्रिलियन डॉलर (376 लाख करोड़ रुपए) की है।
EY की रिपोर्ट के अनुसार, इस तेज आर्थिक विकास के साथ भारत में प्रति व्यक्ति आय भी बड़ा उछाल दर्ज करेगी। जहां अभी प्रति व्यक्ति आय करीब 2.5 लाख रुपए है, वहीं 2047 तक इसके बढ़कर लगभग 13.5 लाख रुपए होने का अनुमान जताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अमेरिका और चीन के बाद दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
भारत की ताकत बन रहे 7 बड़े फैक्टर
1. विशाल और युवा कामकाजी आबादी
EY रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2030 तक भारत की 68.9% आबादी कामकाजी उम्र (15 से 64 वर्ष) में होगी। इसका मतलब है कि देश में करीब 1.04 अरब यानी लगभग 100 करोड़ लोग कामकाजी होंगे। अगले दशक में दुनिया में जुड़ने वाले नए श्रमिकों में 24-25% हिस्सा अकेले भारत का होगा। भारत की औसत उम्र भी सिर्फ 28.4 वर्ष है, जो इसे जनसांख्यिकीय लाभ देता है।
2. मजबूत स्टार्टअप इकोसिस्टम
भारत का स्टार्टअप सिस्टम लगातार मजबूत हो रहा है। देश में इस समय 107 यूनिकॉर्न स्टार्टअप हैं, जिनकी संख्या पिछले 4 साल में सालाना 66% की दर से बढ़ी है। इनकी कुल वैल्यू 7.37 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है। निवेशकों ने इन स्टार्टअप्स से करीब 3.82 लाख करोड़ रुपए का मुनाफा कमाया है, जो आगे और बढ़ने की संभावना दिखाता है।
3. मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बड़े अवसर
सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) योजना के तहत 14 सेक्टरों में करीब 2.5 लाख करोड़ रुपए के निवेश प्रस्ताव मिले हैं। इससे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। रिपोर्ट के मुताबिक, कृषि क्षेत्र में लगे करीब 43% लोगों को उद्योगों में रोजगार मिल सकता है, जिससे इन्फ्रास्ट्रक्चर और औद्योगिक विकास को भी रफ्तार मिलेगी।
4. वर्किंग वुमन की बढ़ती भागीदारी
भारत की उच्च शिक्षा में लगभग 49% छात्राएं हैं। इसका सीधा संकेत है कि आने वाले वर्षों में महिलाओं की कार्यबल में भागीदारी तेजी से बढ़ेगी। इससे देश की कुल उत्पादकता और आर्थिक वृद्धि को लंबी अवधि में मजबूती मिलेगी।
5. डिजिटल पेमेंट और डिजिटल इकोनॉमी की रफ्तार
भारत डिजिटल भुगतान के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल हो चुका है। यूपीआई नेटवर्क से 350 से ज्यादा बैंक जुड़े हैं और इसके 26 करोड़ से अधिक यूनिक यूजर हैं। 2014 से 2019 के बीच भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था 15.6% की दर से बढ़ी, जो देश की कुल जीडीपी ग्रोथ से 2.4 गुना तेज रही।
6. कंपनियों के लिए ज्यादा कर्ज लेने की गुंजाइश
विश्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 2020 में भारत में निजी कंपनियों और कारोबार को दिया गया कुल कर्ज देश की जीडीपी का सिर्फ 55% था, जबकि वैश्विक औसत 148% है। इसका मतलब है कि भारतीय कंपनियों के पास अभी निवेश और विस्तार के लिए कर्ज लेने की काफी गुंजाइश मौजूद है।
7. क्लीन एनर्जी और टिकाऊ विकास
भारत ने साल 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है। इसके तहत देश को 2030 तक जीडीपी के मुकाबले कार्बन उत्सर्जन में 45% की कमी करनी होगी। सरकार ग्रीन इन्फ्रास्ट्रक्चर और क्लीन एनर्जी पर जोर दे रही है। केवल ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल) इकोसिस्टम के लिए केंद्र सरकार 14.5 अरब डॉलर का समर्थन दे रही है। अनुमान है कि 2030 तक करीब 10 करोड़ लोग ईवी पर शिफ्ट हो सकते हैं।
EY की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के पास मजबूत जनसांख्यिकीय लाभ, डिजिटल तकनीक, स्टार्टअप कल्चर, मैन्युफैक्चरिंग विस्तार और ग्रीन एनर्जी जैसे कई बड़े आधार हैं। इन्हीं फैक्टर्स के दम पर भारत 2047 तक न सिर्फ अपनी अर्थव्यवस्था को 5 गुना से ज्यादा बढ़ा सकता है, बल्कि प्रति व्यक्ति आय में भी ऐतिहासिक सुधार करते हुए दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बनने की ओर मजबूती से बढ़ रहा है।

