दिल्ली में फायर सेफ्टी व्यवस्था में बड़ा बदलाव, अब थर्ड-पार्टी ऑडिटर्स जारी करेंगे FSC
राजधानी दिल्ली में फायर सेफ्टी व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, तेज और जवाबदेह बनाने के उद्देश्य से दिल्ली सरकार ने एक महत्वपूर्ण फैसला लिया है। अब इमारतों और व्यावसायिक परिसरों के लिए फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट (Fire Safety Certificate – FSC) केवल दिल्ली अग्निशमन विभाग ही नहीं, बल्कि सरकार द्वारा अधिकृत थर्ड-पार्टी फायर सेफ्टी ऑडिटर्स भी जारी कर सकेंगे।
दिल्ली अग्निशमन विभाग ने इस नई व्यवस्था के तहत योग्य विशेषज्ञों के पंजीकरण और पैनल तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इसके लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं और विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी कर दिए गए हैं।
हाल की आग की घटनाओं के बाद लिया गया बड़ा फैसला
दिल्ली में पिछले कुछ महीनों के दौरान कई गंभीर अग्निकांड सामने आए, जिनमें कई लोगों की जान चली गई। विशेष रूप से हौज रानी स्थित होटल में लगी भीषण आग, जिसमें 22 लोगों की मौत हुई थी, ने फायर सेफ्टी व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए थे।
इन्हीं घटनाओं को ध्यान में रखते हुए सरकार ने फायर सेफ्टी प्रमाणन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने का निर्णय लिया है ताकि निरीक्षण समय पर हो और भवनों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
तीन श्रेणियों में होंगे ऑडिटर्स
नई व्यवस्था के तहत फायर सेफ्टी ऑडिटर्स को उनकी योग्यता और अनुभव के आधार पर तीन श्रेणियों में बांटा जाएगा।
- L-1 Auditor
- L-2 Auditor
- L-3 Auditor
एल-1 और एल-2 श्रेणी के ऑडिटर 15 मीटर तक ऊंची इमारतों का निरीक्षण कर सकेंगे, जबकि एल-3 श्रेणी के ऑडिटर किसी भी ऊंचाई और श्रेणी की इमारत के लिए फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी करने के पात्र होंगे।
कौन बन सकता है Fire Safety Auditor?
सरकार ने ऑडिटर्स के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता और अनुभव भी तय किया है।
इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- बीई/बीटेक (फायर सेफ्टी)
- नेशनल फायर सर्विस कॉलेज, नागपुर का सब ऑफिसर कोर्स
- सिविल, मैकेनिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स या आर्किटेक्चर में इंजीनियरिंग डिग्री
- फायर एंड लाइफ सेफ्टी ऑडिट में पीजी डिप्लोमा
- संबंधित क्षेत्र में 1 से 10 वर्ष तक का अनुभव
योग्यता और अनुभव के आधार पर ही पंजीकरण की श्रेणी तय की जाएगी।
तीन साल तक मान्य रहेगा पंजीकरण
दिल्ली सरकार के अनुसार, चयनित ऑडिटर्स का पंजीकरण तीन वर्षों तक मान्य रहेगा।
पंजीकरण शुल्क इस प्रकार निर्धारित किया गया है—
- L-1 : ₹10,000
- L-2 : ₹20,000
- L-3 : ₹30,000
निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद दोबारा पंजीकरण कराना होगा।
अब कैसे मिलेगा Fire Safety Certificate?
नई व्यवस्था के तहत भवन मालिक या संबंधित संस्थान सबसे पहले दिल्ली फायर सर्विस (DFS) पोर्टल पर उपलब्ध अधिकृत ऑडिटर्स की सूची में से किसी एक ऑडिटर का चयन करेगा।
इसके बाद ऑडिटर भवन का विस्तृत निरीक्षण करेगा और फायर सेफ्टी मानकों की जांच करेगा। यदि सभी मानक पूरे पाए जाते हैं तो वही ऑडिटर फायर सेफ्टी सर्टिफिकेट जारी करेगा।
इस पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध रहेगा।
कितनी होगी अधिकतम फीस?
ऑडिटर्स अपनी सेवाओं के लिए भवन मालिक से निर्धारित शुल्क ले सकेंगे।
फीस की अधिकतम सीमा इस प्रकार तय की गई है—
- L-1 Auditor: ₹10,000 से ₹50,000
- L-2 Auditor: ₹35,000 से ₹90,000
- L-3 Auditor: ₹63,000 से लेकर अधिकतम ₹5 लाख
फीस भवन की ऊंचाई, क्षेत्रफल, उपयोग और फायर सेफ्टी सिस्टम की जटिलता के आधार पर तय होगी।
नई व्यवस्था से क्या होगा फायदा?
विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई व्यवस्था से फायर सेफ्टी प्रमाणपत्र प्राप्त करने की प्रक्रिया पहले की तुलना में अधिक तेज और पारदर्शी होगी। इससे अग्निशमन विभाग पर कार्यभार भी कम होगा और भवनों का समय पर निरीक्षण सुनिश्चित किया जा सकेगा।
हालांकि सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि अधिकृत ऑडिटर्स की कार्यप्रणाली पर लगातार निगरानी रखी जाएगी और किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनियमितता पाए जाने पर उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

