लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में शनिवार को राजनीति और सामाजिक विचारधारा का बड़ा संगम देखने को मिला, जब कांग्रेस ने महात्मा ज्योतिबा फुले की जयंती के अवसर पर एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया। इस मौके पर छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मौजूदगी ने कार्यक्रम को और भी राजनीतिक रूप से अहम बना दिया।
कार्यक्रम के दौरान भूपेश बघेल ने SIR (Special Investigation/Review) को लेकर बड़ा बयान देते हुए कहा कि इस प्रक्रिया से न केवल विपक्ष बल्कि खुद सरकार के भीतर भी असंतोष है। उन्होंने दावा किया कि “SIR से न मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ संतुष्ट हैं और न ही समाजवादी पार्टी के नेता अखिलेश यादव।”
SIR पर उठे सवाल, सरकार पर निशाना
भूपेश बघेल ने अपने संबोधन में कहा कि जब सत्ता में बैठे लोग ही किसी प्रक्रिया से संतुष्ट नहीं हैं, तो उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठना स्वाभाविक है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि इस तरह की व्यवस्थाएं लोकतंत्र की पारदर्शिता को प्रभावित कर सकती हैं।
उनका यह बयान राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है, क्योंकि उन्होंने एक साथ सत्ता और विपक्ष दोनों को घेरने की कोशिश की।
ज्योतिबा फुले के विचारों पर जोर
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य महात्मा ज्योतिबा फुले की 200वीं जयंती मनाना था, जिसे कांग्रेस ने “वैज्ञानिक जाति जनगणना दिवस” के रूप में मनाया। इस अवसर पर नेताओं ने फुले के सामाजिक सुधारों और उनके योगदान को याद किया।
भूपेश बघेल ने कहा कि फुले ने उस समय महिलाओं की शिक्षा के लिए काम किया, जब समाज में महिलाओं को पढ़ने का अधिकार तक नहीं था। उन्होंने समाज में समानता और शिक्षा के अधिकार को लेकर जो संघर्ष किया, वह आज भी प्रेरणा का स्रोत है।
कांग्रेस नेताओं का जुटान और संदेश
कार्यक्रम लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित किया गया, जहां बड़ी संख्या में कांग्रेस नेता, कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद रहे।
कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव के. राजू ने लोगों से अपील की कि वे ज्योतिबा फुले की लिखी पुस्तकों को पढ़ें और उनके विचारों को समझें। उन्होंने कहा कि फुले की सोच ही आधुनिक भारत में सामाजिक न्याय की नींव है।
वहीं कांग्रेस विधायक आराधना मिश्रा मोना ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने हमेशा फुले की विचारधारा को आगे बढ़ाया है। उन्होंने महिलाओं के अधिकार, शिक्षा और समानता के मुद्दों को आज भी प्रासंगिक बताया।
महिला शिक्षा और समानता पर चर्चा
नेताओं ने अपने संबोधन में खास तौर पर महिला शिक्षा पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि जिस दौर में महिलाओं को शिक्षा से वंचित रखा जाता था, उस समय फुले और उनकी पत्नी सावित्रीबाई फुले ने स्कूल खोलकर एक नई क्रांति की शुरुआत की।
यह भी कहा गया कि आज जो महिलाएं राजनीति, शिक्षा और समाज के हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, उसकी नींव फुले के विचारों में ही निहित है।
राजनीतिक संदेश और भविष्य की रणनीति
इस आयोजन के जरिए कांग्रेस ने सामाजिक न्याय और समानता के मुद्दों को फिर से केंद्र में लाने की कोशिश की है। साथ ही SIR जैसे मुद्दों पर सवाल उठाकर सरकार को घेरने की रणनीति भी साफ नजर आई।
भूपेश बघेल के बयान से यह संकेत मिलता है कि आने वाले समय में SIR को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो सकती है।
लखनऊ में आयोजित यह कार्यक्रम सिर्फ एक जयंती समारोह नहीं, बल्कि राजनीतिक संदेश देने का मंच भी साबित हुआ। जहां एक ओर महात्मा ज्योतिबा फुले के विचारों को याद किया गया, वहीं दूसरी ओर SIR को लेकर उठे सवालों ने राजनीतिक माहौल को गरमा दिया। आने वाले दिनों में यह मुद्दा और तूल पकड़ सकता है।

