अयोध्या: में सोमवार को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बहुप्रतीक्षित बैठक शुरू हो गई, जिस पर देशभर के करोड़ों रामभक्तों, संत समाज और राजनीतिक गलियारों की नजरें टिकी हुई हैं। हाल ही में सामने आए राम मंदिर चढ़ावा विवाद और कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बाद बुलाई गई यह बैठक ट्रस्ट के भविष्य के लिए बेहद अहम मानी जा रही है।
बैठक की शुरुआत से पहले ही सबसे बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा बैठक से बाहर रहे। इसके अलावा मंदिर व्यवस्थाओं से जुड़े गोपाल राव को भी बैठक में शामिल होने की अनुमति नहीं दी गई।
सूत्रों का कहना है कि ट्रस्ट के कुछ सदस्यों ने स्पष्ट कर दिया था कि यदि चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा बैठक में मौजूद रहेंगे तो वे बैठक का बहिष्कार करेंगे। इसी के बाद निष्पक्ष चर्चा सुनिश्चित करने के लिए दोनों वरिष्ठ पदाधिकारियों को बैठक से दूर रखा गया।
इस्तीफों पर शुरू हुआ मंथन
बैठक में सबसे अहम मुद्दा चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफे को लेकर माना जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, ट्रस्ट सदस्य इस बात पर विचार कर रहे हैं कि मौजूदा विवाद के बीच संगठन की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए आगे क्या कदम उठाए जाएं।
बताया जा रहा है कि यदि किसी पदाधिकारी के इस्तीफे या जिम्मेदारियों में बदलाव का प्रस्ताव आता है तो ट्रस्ट के नियमों के अनुसार आवश्यक बहुमत से उस पर फैसला लिया जाएगा।
हालांकि बैठक समाप्त होने तक किसी भी आधिकारिक निर्णय की घोषणा नहीं की गई है।

SIT जांच पर जताया भरोसा
सूत्रों के अनुसार बैठक में ट्रस्ट के अधिकांश सदस्यों ने विशेष जांच दल (SIT) की जांच पर भरोसा जताया।
सदस्यों का मानना है कि हाल के विवादों से देशभर में गलत संदेश गया है और करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं प्रभावित हुई हैं। इसलिए जांच पूरी पारदर्शिता और निष्पक्षता से पूरी होनी चाहिए ताकि सभी तथ्यों को स्पष्ट किया जा सके।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली को और अधिक पारदर्शी एवं जवाबदेह बनाने की दिशा में क्या कदम उठाए जाएं।
महंत नृत्य गोपाल दास व्हीलचेयर पर पहुंचे
बैठक में शामिल होने के लिए ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास व्हीलचेयर पर राम मंदिर परिसर पहुंचे। उनके साथ ट्रस्ट के कई वरिष्ठ सदस्य और पदाधिकारी भी मौजूद रहे।
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि महाराज भी बैठक में शामिल हुए। मीडिया से बातचीत में उन्होंने केवल इतना कहा कि बैठक पूरी होने के बाद सभी विषयों पर विस्तार से जानकारी दी जाएगी।
सीईओ नियुक्ति और प्रशासनिक व्यवस्था पर भी चर्चा
बैठक का एजेंडा केवल चढ़ावा विवाद तक सीमित नहीं है। सूत्रों के मुताबिक बैठक में मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली, भविष्य की व्यवस्थाओं, वित्तीय निगरानी प्रणाली और नए मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) की नियुक्ति जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा हो रही है।
ट्रस्ट यह सुनिश्चित करना चाहता है कि भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद की संभावना न्यूनतम रहे और श्रद्धालुओं का विश्वास और अधिक मजबूत हो।
विपक्ष के आरोपों से बढ़ा सियासी तापमान
राम मंदिर चढ़ावा विवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
कांग्रेस नेता इमरान मसूद ने आरोप लगाया कि यह केवल आर्थिक मामला नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।
हालांकि ट्रस्ट से जुड़े कई पदाधिकारियों ने पहले ही स्पष्ट किया है कि वे जांच एजेंसियों के साथ पूरा सहयोग कर रहे हैं और सत्य सामने आने का इंतजार कर रहे हैं।
देशभर की नजरें बैठक के फैसलों पर
अयोध्या में चल रही यह बैठक केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि धार्मिक और सामाजिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है। करोड़ों श्रद्धालु यह जानना चाहते हैं कि ट्रस्ट भविष्य में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए क्या कदम उठाता है।
यदि बैठक में किसी बड़े प्रशासनिक बदलाव, इस्तीफे या नई नियुक्ति का फैसला होता है तो उसका प्रभाव राम मंदिर प्रबंधन की आगामी कार्यप्रणाली पर भी दिखाई देगा।
फिलहाल बैठक जारी है और अंतिम निर्णयों का इंतजार किया जा रहा है।
राम मंदिर ट्रस्ट की मौजूदा बैठक केवल एक नियमित प्रशासनिक बैठक नहीं बल्कि ट्रस्ट की विश्वसनीयता, पारदर्शिता और भविष्य की दिशा तय करने वाली अहम बैठक मानी जा रही है। चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा का बैठक से बाहर रहना इस बात का संकेत है कि ट्रस्ट विवादों के बीच निष्पक्ष निर्णय लेने की कोशिश कर रहा है। अब सभी की नजर बैठक के अंतिम फैसलों और आधिकारिक घोषणा पर टिकी हुई है।

