दुबई: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव कम होने के बजाय और जटिल होता दिखाई दे रहा है। अमेरिकी सेंट्रल कमांड द्वारा दो दिन तक चले सैन्य अभियानों के समाप्त होने की घोषणा के बावजूद ईरान के कई हिस्सों में देर रात तक धमाकों की आवाजें सुनाई देती रहीं। इससे क्षेत्र में शांति स्थापित होने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने गुरुवार सुबह ईरानी स्थानीय समयानुसार लगभग 6:30 बजे अपने सैन्य अभियान समाप्त होने की घोषणा की। हालांकि इसके कुछ ही समय बाद ईरान के बुशहर, सिस्तान व बलूचिस्तान, अहवाज और चाबहार सहित कई इलाकों में लगातार विस्फोटों की खबरें सामने आईं। स्थानीय लोगों के अनुसार कई घंटों तक धमाकों की आवाजें सुनाई देती रहीं, जिससे आम नागरिकों में दहशत का माहौल बना रहा।
इन घटनाओं के बीच ईरान में दिवंगत सुप्रीम लीडर के अंतिम संस्कार से जुड़ी धार्मिक प्रक्रियाएं भी जारी रहीं। सुरक्षा एजेंसियां पूरे घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं, लेकिन ईरानी प्रशासन ने इन धमाकों के लिए किसी भी देश या संगठन को आधिकारिक तौर पर जिम्मेदार नहीं ठहराया है।
हालांकि ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के पूर्व कमांडर इस्माइल कौसारी ने संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि हालिया अमेरिकी हमलों में यूएई ने पर्दे के पीछे अमेरिका का सहयोग किया। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि यह आरोप सही साबित होते हैं तो यूएई को इसकी कीमत चुकानी पड़ सकती है।

दूसरी ओर अमेरिकी रक्षा सूत्रों का कहना है कि गुरुवार सुबह अभियान समाप्त करने की घोषणा के बाद अमेरिका की ओर से कोई नया सैन्य हमला नहीं किया गया। इसके बावजूद क्षेत्र में लगातार हो रही विस्फोटों की घटनाओं ने कई नए सवाल खड़े कर दिए हैं।
इस बीच ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई तेज करते हुए बहरीन, जॉर्डन, कुवैत और कतर में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों को मिसाइल और ड्रोन के जरिए निशाना बनाने का दावा किया। इन घटनाओं के बाद पूरे खाड़ी क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत कर दिया गया है।
क्षेत्रीय तनाव के बीच यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने तत्काल कुवैत का दौरा किया, जहां उन्होंने कुवैत के अमीर के साथ सुरक्षा और क्षेत्रीय हालात पर विस्तृत चर्चा की। इस मुलाकात को मौजूदा संकट के बीच बेहद अहम माना जा रहा है।
वहीं खाड़ी के अन्य अरब देशों ने भी कतर के विदेश मंत्री से संपर्क बनाए रखा। कूटनीतिक स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच अंतरिम समझौते को फिर से प्रभावी बनाने की कोशिशें जारी हैं। इन प्रयासों में पाकिस्तान की मध्यस्थता को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में लंबे समय से कई सैन्य गतिविधियां आधिकारिक घोषणा के बिना भी होती रही हैं। पहले भी ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जिनमें बाद में यह दावा किया गया कि कुछ देशों ने प्रत्यक्ष रूप से नहीं बल्कि परोक्ष तरीके से सैन्य कार्रवाई की थी। इसी वजह से मौजूदा घटनाक्रम को लेकर भी कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
शुक्रवार को ईरान के सरकारी मीडिया ने इस्माइल कौसारी के बयान को प्रमुखता से प्रकाशित किया। उन्होंने एक बार फिर आरोप दोहराया कि अमेरिका के हालिया अभियानों में यूएई की अप्रत्यक्ष भूमिका रही है। हालांकि यूएई की ओर से इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
विश्लेषकों का कहना है कि यदि क्षेत्रीय देशों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला जारी रहा तो मिडिल ईस्ट में तनाव और बढ़ सकता है। इससे न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति, अंतरराष्ट्रीय व्यापार और तेल बाजार पर भी व्यापक प्रभाव पड़ने की आशंका है।
फिलहाल सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में अमेरिका, ईरान और खाड़ी देशों के बीच कूटनीतिक बातचीत किस दिशा में आगे बढ़ती है। यदि वार्ता सफल नहीं होती है तो यह संकट एक बार फिर बड़े सैन्य टकराव का रूप ले सकता है।

