लंदन। ब्रिटेन की नई लेबर सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लेते हुए देश में मतदान की न्यूनतम आयु को 18 से घटाकर 16 वर्ष कर दिया है। यह निर्णय युवाओं को राजनीतिक प्रक्रिया में शामिल करने और लोकतंत्र में विश्वास बहाल करने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। यह बदलाव 1969 के बाद ब्रिटेन के चुनावी तंत्र में सबसे बड़ा सुधार बताया जा रहा है।
अब ब्रिटेन भी शामिल हुआ प्रगतिशील देशों की सूची में
इस ऐतिहासिक फैसले के बाद ब्रिटेन उन गिने-चुने देशों की सूची में शामिल हो गया है, जहां 16 वर्ष की उम्र में मतदान की अनुमति है। इन देशों में ऑस्ट्रिया, ब्राज़ील और इक्वाडोर जैसे देश पहले से शामिल हैं। गौरतलब है कि स्कॉटलैंड और वेल्स में पहले ही 16-17 साल के युवाओं को स्थानीय और क्षेत्रीय चुनावों में मतदान का अधिकार प्राप्त है।
2029 के आम चुनाव से पहले लागू होगा नया कानून
सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह नया नियम 2029 तक होने वाले अगले आम चुनाव से पहले लागू कर दिया जाएगा। उप-प्रधानमंत्री एंजेला रेयनर ने कहा कि देश में लोगों का लोकतांत्रिक प्रक्रिया से विश्वास कमजोर हो रहा है, इसलिए आवश्यक है कि हम युवाओं को निर्णायक भूमिका में लाएं और भागीदारी बढ़ाएं।
व्यापक चुनावी सुधारों की दिशा में एक बड़ा कदम
यह फैसला सरकार के उस व्यापक एजेंडे का हिस्सा है, जिसके तहत चुनावी व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता लाने की कोशिश की जा रही है। इसमें राजनीतिक दलों को मिलने वाले फंडिंग में पारदर्शिता लाना, शेल कंपनियों के माध्यम से आने वाले दान पर रोक लगाना और विदेशी हस्तक्षेप से सुरक्षा को मजबूत करना शामिल है।
लोकतंत्र मंत्री रुशनारा अली ने कहा, “यह केवल आयु सीमा घटाने का फैसला नहीं, बल्कि ब्रिटिश लोकतंत्र को बाहरी प्रभावों से सुरक्षित रखने और युवाओं को निर्णायक भूमिका में लाने का एक दूरदर्शी प्रयास है।”
पुराने नियमों पर उठे सवाल
2022 में पूर्व कंजरवेटिव सरकार द्वारा लागू पहचान पत्र अनिवार्यता कानून की भी आलोचना फिर से तेज हो गई है। चुनाव आयोग के अनुसार, 2024 के आम चुनाव में करीब 7.5 लाख लोग पहचान पत्र के अभाव में वोट नहीं डाल सके। इस बार मतदान प्रतिशत सिर्फ 59.7% रहा, जो पिछले दो दशकों में सबसे कम है।
विशेषज्ञों की राय: लोकतंत्र की पुनर्स्थापना की दिशा में साहसिक पहल
वामपंथी थिंक टैंक इंस्टिट्यूट फॉर पब्लिक पॉलिसी रिसर्च के प्रमुख हैरी क्विल्टर-पिनर ने इसे 1969 के बाद का सबसे बड़ा लोकतांत्रिक सुधार बताया। उन्होंने कहा कि, “यदि हम युवाओं को मताधिकार देते हैं, तो हम उन्हें समाज का जिम्मेदार नागरिक भी बना रहे हैं। यही लोकतंत्र की असली ताकत है।”
निष्कर्ष
ब्रिटेन में मतदान की उम्र को 16 वर्ष करना केवल एक कानूनी निर्णय नहीं, बल्कि सामाजिक चेतना और लोकतांत्रिक भागीदारी की दिशा में एक क्रांतिकारी बदलाव है। यह फैसला युवाओं को सशक्त बनाने, उनकी आवाज को संसद तक पहुंचाने और भविष्य की राजनीति को नई दिशा देने की क्षमता रखता है। यदि संसद में यह विधेयक पारित हो जाता है, तो यह ब्रिटेन के लोकतांत्रिक इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ देगा।

