अयोध्या: श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में हाल ही में सामने आए चंदा चोरी के मामले के बाद मंदिर प्रशासन ने व्यवस्थाओं में बड़े बदलाव की प्रक्रिया शुरू कर दी है। मंदिर परिसर को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और व्यवस्थित बनाने के उद्देश्य से कई समितियों का पुनर्गठन किया जा रहा है। आने वाले दिनों में धार्मिक कार्यक्रमों से लेकर पार्किंग, प्रसाद वितरण, लॉकर संचालन, प्रवेश-निकास व्यवस्था और कंट्रोल रूम तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां नई टीमों को सौंपी जाएंगी।
सूत्रों के अनुसार, हालिया घटनाक्रम के बाद मंदिर की सभी प्रमुख व्यवस्थाओं की व्यापक समीक्षा की गई। समीक्षा में यह महसूस किया गया कि श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को और बेहतर बनाने के लिए संचालन व्यवस्था में बदलाव आवश्यक है। इसी आधार पर कई समितियों के नेतृत्व में परिवर्तन का निर्णय लिया गया है।
नई टीमों को मिलेगी बड़ी जिम्मेदारी
मंदिर प्रशासन अब कार्यकुशल, अनुभवी और अनुशासित लोगों को जिम्मेदारी सौंपने की तैयारी में है। नई टीमों का चयन इस आधार पर किया जाएगा कि वे पारदर्शिता बनाए रखें और प्रत्येक व्यवस्था की स्पष्ट जवाबदेही तय हो।
धार्मिक आयोजनों का संचालन, साफ-सफाई, पार्किंग, लॉकर सुविधा, श्रद्धालुओं की आवाजाही और प्रसाद वितरण जैसी व्यवस्थाओं में कई नए चेहरे देखने को मिल सकते हैं। प्रशासन का मानना है कि इससे श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिलेगा और व्यवस्था अधिक प्रभावी होगी।
कंट्रोल रूम के लिए बनी नई टीम
सूचना आदान-प्रदान को मजबूत बनाने के लिए कंट्रोल रूम का भी पुनर्गठन किया गया है। नई टीम का प्रभारी सोमेश को बनाया गया है, जिन्हें वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी गोपाल राव का करीबी माना जाता है। उनके साथ सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी के.के. तिवारी को भी जोड़ा गया है।
बताया जा रहा है कि 22 जुलाई को होने वाली अहम बैठक में सभी समितियों के संचालन के लिए नई गाइडलाइन को अंतिम रूप दिया जाएगा। इसके बाद नई व्यवस्था पूरी तरह लागू कर दी जाएगी।
चढ़ावा गिनने वाले कर्मियों की संख्या घटी
चंदा चोरी का मामला सामने आने के बाद चढ़ावे की गणना व्यवस्था पर भी बड़ा असर पड़ा है। पहले जहां करीब 40 कर्मचारी चढ़ावे की गिनती करते थे, अब केवल 10 कर्मचारी ही यह जिम्मेदारी निभा रहे हैं।
मामले में छह लोगों की गिरफ्तारी के बाद 24 कर्मचारियों ने काम पर आना बंद कर दिया। फिलहाल सीमित कर्मचारियों के जरिए चढ़ावे की गिनती की जा रही है। जानकारी के अनुसार, भारतीय स्टेट बैंक जल्द ही नए गणना कर्मियों की नियुक्ति की प्रक्रिया शुरू करेगा ताकि व्यवस्था सामान्य हो सके।
15 अगस्त तक निर्माण कार्य पूरा करने का लक्ष्य
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने मंदिर परिसर में चल रहे निर्माण कार्यों की समीक्षा की। उन्होंने निर्माण कार्य से जुड़ी एजेंसियों को 15 अगस्त तक लंबित कार्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
उन्होंने कहा कि एलएंडटी और टीसीई जैसी निर्माण एजेंसियों को आवश्यक प्रमाणन (Certification) जल्द पूरा करना होगा, क्योंकि इन परियोजनाओं की डिफेक्ट लाइबिलिटी अवधि भी निर्धारित है। निर्माण की गुणवत्ता और समयबद्धता पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।
म्यूजियम में दिखेगी भगवान श्रीराम की पूरी यात्रा
मंदिर परिसर के साथ-साथ रामकथा संग्रहालय को भी विश्वस्तरीय बनाने की योजना पर तेजी से काम चल रहा है। नई योजना के तहत भगवान श्रीराम के वनगमन और उनसे जुड़ी प्रमुख नदियों पर आधारित एक आधुनिक गैलरी बनाई जाएगी।
इस गैलरी में इमर्सिव टेक्नोलॉजी और 3डी डिस्प्ले का उपयोग किया जाएगा ताकि श्रद्धालु स्वयं को रामायण काल की घटनाओं के बीच महसूस कर सकें। इसमें सरयू नदी से लेकर गुप्तार घाट तक भगवान श्रीराम की यात्रा को आधुनिक तकनीक के माध्यम से प्रस्तुत किया जाएगा।
‘दिव्य दर्शन’ गैलरी बनेगी आकर्षण का केंद्र
श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए मंदिर प्रशासन ने ‘दिव्य दर्शन’ गैलरी विकसित करने का भी फैसला लिया है। इस गैलरी में रामलला मंदिर के गर्भगृह से लेकर कुबेर टीला तक के दर्शन अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से कराए जाएंगे।
प्रशासन का मानना है कि भीड़ के कारण कई श्रद्धालु मंदिर में अधिक समय नहीं बिता पाते। ऐसे में यह गैलरी उन्हें विस्तृत और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करेगी। परियोजना को चार महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है और जल्द ही इसकी फिल्मिंग तथा तकनीकी कार्य शुरू होगा।
पारदर्शिता और जवाबदेही पर रहेगा जोर
नई व्यवस्था में प्रत्येक समिति की नियमित समीक्षा होगी और कार्यों की निगरानी के लिए अलग प्रणाली विकसित की जा रही है। मंदिर प्रशासन का उद्देश्य केवल व्यवस्थाओं में सुधार करना ही नहीं, बल्कि श्रद्धालुओं का विश्वास और भी मजबूत करना है।
राम मंदिर में चंदा चोरी की घटना के बाद मंदिर प्रशासन ने व्यवस्थाओं को पूरी तरह पुनर्गठित करने का निर्णय लिया है। नई टीमों के गठन, चढ़ावा गणना प्रणाली में बदलाव, निर्माण कार्यों की समयबद्ध निगरानी और आधुनिक संग्रहालय परियोजनाओं के जरिए श्रीराम जन्मभूमि परिसर को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वस्तरीय बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए जा रहे हैं।


