अमरोहा। उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले में तैनात दो सिपाहियों ने पुलिस की मर्यादा और मानव संवेदना दोनों की सीमाएं लांघ दीं। अंतिम यात्रा जैसी संवेदनशील स्थिति को भी सोशल मीडिया कंटेंट बना देने की लत इस कदर हावी हो गई कि इन वर्दीधारियों ने शव यात्रा को ही कैमरे के लेंस में कैद कर इंस्टाग्राम पर रील बना दी।
🎬 ‘इमोशनल फ्रेम’ के लिए अर्थी को दिया कंधा
जानकारी के मुताबिक, दोनों सिपाही किसी मृत व्यक्ति की शव यात्रा में शामिल हुए, और अलग-अलग एंगल से वीडियो शूट करते रहे। रील में साफ देखा जा सकता है कि कैसे शव को कंधा देते वक्त कैमरे की पोजिशन और फ्रेम का खास ध्यान रखा गया। इसके बाद वीडियो को एडिट कर सोशल मीडिया पर अपलोड किया गया, जहां यह तेजी से वायरल हो गया।
📱 इंस्टाग्राम पर हैं 3.5 मिलियन फॉलोअर्स
हैरानी की बात यह है कि इनमें से एक सिपाही के इंस्टाग्राम पर साढ़े तीन मिलियन फॉलोअर्स हैं। वह नियमित रूप से अपनी वर्दी में रील्स पोस्ट करता रहा है, और उसके वीडियो अक्सर वायरल होते हैं। इस मामले के बाद अब लोग सवाल कर रहे हैं कि क्या पुलिस की जिम्मेदारियां अब लाइक्स और व्यूज की भेंट चढ़ रही हैं?
🕵️♀️ जांच के आदेश, विभाग सख्त
वीडियो के वायरल होते ही अधिकारियों में हड़कंप मच गया। अमरोहा पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच बैठा दी है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा:
“वर्दी में रहते हुए किसी भी प्रकार की असंवेदनशीलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अंतिम यात्रा के दौरान ऐसा कृत्य अनुशासनहीनता की श्रेणी में आता है।”
🔍 सोशल मीडिया का जिम्मेदार इस्तेमाल जरूरी
यह घटना एक बार फिर सोशल मीडिया पर अंधी दौड़ और फॉलोअर्स के मोह पर सवाल खड़े करती है। वर्दी पहनने का मतलब सिर्फ कानून व्यवस्था बनाए रखना नहीं, बल्कि जनता की भावनाओं और सामाजिक संवेदनशीलता का सम्मान करना भी है।
🧠 निष्कर्ष
अमरोहा के इस मामले ने दिखा दिया है कि जब पेशेवर जिम्मेदारियों को वायरल होने की चाहत निगलने लगती है, तो न केवल एक विभाग की छवि धूमिल होती है, बल्कि सामाजिक मूल्यों पर भी आघात पहुंचता है।
जरूरत है इस पर गहन आत्ममंथन की — क्या हम वाकई में एक ‘रील-जेनरेशन’ समाज में बदलते जा रहे हैं?

