बख्शी का तालाब, लखनऊ। 14 जुलाई 2025 को बख्शी का तालाब स्थित चंद्रभानु गुप्त कृषि स्नातकोत्तर महाविद्यालय में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी और समाजसेवी श्रद्धेय चंद्रभानु गुप्त की 124वीं जयंती पर विशेष आयोजन किए गए।
इस अवसर पर उनके सम्मान में प्रतिमा पर माल्यार्पण और पुष्पांजलि अर्पित की गई। पूरा माहौल राष्ट्रभक्ति और सामाजिक सेवा की भावना से ओतप्रोत रहा।
🌿 कार्यक्रम की प्रमुख झलकियां
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महाविद्यालय अध्यक्ष डॉ. फिदा हुसैन अंसारी ने गुप्ता जी द्वारा समाज और शिक्षा के क्षेत्र में किए गए कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि “वे एक दूरदर्शी नेता और शिक्षा के सशक्त संरक्षक थे।”
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प्राचार्य प्रो. गजेंद्र सिंह, डॉ. हृदय नारायण तिवारी, डॉ. योगेंद्र कुमार सिंह, प्रशासनिक अधिकारी शिवमंगल चौरसिया, डॉ. सुधीर कुमार रघुवंशी, डॉ. के.डी. सिंह, सरसिज कुमार सिंह, उमेश कुमार, रामप्रकाश सहित महाविद्यालय के सभी कर्मचारियों ने उनकी प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
🍲 सेवा और पर्यावरण को समर्पित आयोजन
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लखनऊ स्थित ‘सृष्टि संस्थान’ में अपंग व असहाय बच्चों को भोजन कराकर सेवा का भाव प्रकट किया गया।
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वृक्षारोपण कार्यक्रम के माध्यम से महाविद्यालय ने पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया।
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जगह-जगह आयोजित इन कार्यक्रमों ने चंद्रभानु गुप्त जी के सामाजिक दृष्टिकोण और मानव सेवा की सोच को जन-जन तक पहुंचाया।
📚 7000+ छात्र, 200+ कर्मचारी: शिक्षा क्षेत्र में अद्भुत योगदान
महाविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. सत्येंद्र कुमार सिंह ने जानकारी दी कि
चंद्रभानु गुप्त द्वारा स्थापित ‘शिक्षा समिति’ के अंतर्गत बख्शी का तालाब इंटर कॉलेज, चंद्रभानु गुप्त कृषि महाविद्यालय और छोटे लोहिया पुस्तकालय जैसी संस्थाएं संचालित हैं।
इनमें वर्तमान में:
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7000 से अधिक छात्र-छात्राएं शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं।
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200 से अधिक शिक्षक-कर्मचारी कार्यरत हैं, जो क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास में योगदान दे रहे हैं।
उन्होंने इसे क्षेत्र की सबसे बड़ी शैक्षणिक उपलब्धि बताया।
🕊️ चंद्रभानु गुप्त: एक प्रेरणा स्रोत
स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार, राजनीतिज्ञ और पूर्व मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्त जी का जीवन सादगी, संघर्ष और सेवा की त्रिवेणी था।
उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय और स्वतंत्र विचारों को आगे बढ़ाने में जीवन भर काम किया।
उनकी स्मृति में आयोजित यह आयोजन युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत बन गया।
📌 निष्कर्ष
124वीं जयंती पर आयोजित यह कार्यक्रम न केवल श्रद्धांजलि का प्रतीक रहा, बल्कि सेवा, पर्यावरण संरक्षण और शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता का प्रदर्शन भी था।
चंद्रभानु गुप्त जी की विरासत आज भी समाज को दिशा देने का कार्य कर रही है।


