गोंडा। मैनपुरी की सांसद और समाजवादी पार्टी नेता डिंपल यादव पर मौलाना साजिद रशीदी द्वारा की गई आपत्तिजनक टिप्पणी के विरोध में मंगलवार को गोंडा में आक्रोश भड़क उठा। समाजवादी पार्टी महिला मोर्चा की राष्ट्रीय महासचिव प्रतिभा सिंह के नेतृत्व में सैकड़ों महिलाएं सड़कों पर उतर आईं और गोंडा नगर कोतवाली पहुंचकर साजिद रशीदी के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की मांग की।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि एक महिला सांसद के खिलाफ इस तरह की अभद्र टिप्पणी केवल व्यक्तिगत नहीं, बल्कि पूरे नारी समाज का अपमान है। उन्होंने कहा कि इस तरह की बयानबाजी करने वालों को सख्त सजा मिलनी चाहिए ताकि भविष्य में कोई और इस तरह की गंदी सोच का प्रदर्शन न कर सके।
सपा महिला नेताओं का आक्रोश
प्रदर्शन के दौरान प्रतिभा सिंह ने मीडिया से बातचीत में कहा,
“एक सांसद, एक महिला और एक मां के खिलाफ इस तरह की गंदी टिप्पणी निंदनीय ही नहीं, बल्कि दंडनीय अपराध है। यह केवल डिंपल जी का नहीं, हर महिला का अपमान है।”
महिलाओं ने हाथों में तख्तियां और पोस्टर लिए हुए थे जिन पर लिखा था- “साजिद रशीदी को गिरफ्तार करो”, “महिलाओं का अपमान बंद करो”, “हम चुप नहीं बैठेंगे”। प्रदर्शन के बाद कोतवाली में जाकर तहरीर दी गई और प्रशासन से आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और तत्काल गिरफ्तारी की मांग की गई।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
प्रशासन की ओर से प्रदर्शनकारियों को आश्वासन दिया गया कि उनकी तहरीर पर जांच की जाएगी और अगर प्रथम दृष्टया आपराधिक आधार मिला तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस अधिकारियों ने कहा कि मामला गंभीर है और विधिक पहलुओं पर विचार करते हुए उचित कदम उठाया जाएगा।
पृष्ठभूमि: कैसे शुरू हुआ विवाद
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब मौलाना साजिद रशीदी ने एक सार्वजनिक मंच से डिंपल यादव के खिलाफ विवादित बयान दे दिया। मौलाना के बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया, जिसके बाद चारों ओर विरोध के सुर उठने लगे।
सपा नेताओं ने इस बयान पर न केवल विरोध जताया, बल्कि इसे राजनीतिक और सांप्रदायिक ध्रुवीकरण की साजिश बताया। वहीं बीजेपी नेताओं ने इस पर अखिलेश यादव की चुप्पी पर भी सवाल उठाए हैं।
निष्कर्ष: महिला सम्मान पर सियासत गरम
एक बार फिर किसी महिला जनप्रतिनिधि पर आपत्तिजनक टिप्पणी ने राजनीति को गरमा दिया है। सपा इसे महिलाओं के खिलाफ मानसिकता का मामला बता रही है, वहीं भाजपा इसे राजनीतिक ढोंग करार दे रही है। ऐसे में प्रशासन की भूमिका बेहद अहम होगी कि वह इस मामले में न्यायोचित कार्रवाई कर मिसाल पेश करता है या फिर इसे भी एक राजनीतिक बयान मानकर नजरअंदाज करता है।

