गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने प्रशासनिक कार्यों के साथ-साथ धार्मिक परंपराओं और गोसेवा के प्रति विशेष लगाव के लिए भी जाने जाते हैं। शनिवार को गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान एक बार फिर यही तस्वीर देखने को मिली। जनता दर्शन कार्यक्रम में लोगों की समस्याएं सुनने के बाद मुख्यमंत्री सीधे मंदिर परिसर स्थित गोशाला पहुंचे, जहां उन्होंने गोवंश के बीच समय बिताया, उन्हें अपने हाथों से गुड़-रोटी खिलाई और स्नेहपूर्वक दुलारा।
मुख्यमंत्री का यह आत्मीय व्यवहार वहां मौजूद श्रद्धालुओं और गोशाला कर्मचारियों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रहा। उन्होंने गोवंश के स्वास्थ्य और देखभाल की जानकारी लेने के साथ कर्मचारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए।
जनता दर्शन से शुरू हुई दिनचर्या
शनिवार सुबह मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपनी परंपरागत दिनचर्या के अनुसार गोरखनाथ मंदिर में आयोजित जनता दर्शन कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने बड़ी संख्या में पहुंचे लोगों की समस्याएं सुनीं और अधिकारियों को शिकायतों के त्वरित समाधान के निर्देश दिए।
जनता दर्शन के बाद मुख्यमंत्री ने मंदिर परिसर का भ्रमण किया और फिर गोशाला पहुंचे। गोरखनाथ मंदिर में उनका हर प्रवास गोसेवा के बिना अधूरा माना जाता है और इस बार भी उन्होंने अपनी वर्षों पुरानी परंपरा निभाई।
गोवंश को खिलाई गुड़-रोटी, स्नेह से किया दुलार
गोशाला पहुंचकर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सबसे पहले वहां मौजूद गायों और अन्य गोवंश के माथे पर हाथ फेरकर उन्हें स्नेहपूर्वक दुलारा। इसके बाद उन्होंने अपने हाथों से गायों को गुड़ और रोटी खिलाई।
मुख्यमंत्री ने गोशाला में मौजूद कर्मचारियों से पशुओं के खान-पान, स्वास्थ्य और नियमित देखभाल के बारे में विस्तार से जानकारी ली। उन्होंने निर्देश दिया कि गोवंश की सेवा में किसी प्रकार की लापरवाही न हो और सभी पशुओं को समय पर पौष्टिक आहार एवं चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं।

मोरों पर भी बरसाया स्नेह
गोशाला परिसर में भ्रमण के दौरान मुख्यमंत्री का ध्यान वहां विचरण कर रहे मोरों की ओर भी गया। उन्होंने मोरों को भी स्नेहपूर्वक देखा और कुछ समय उनके बीच बिताया। मुख्यमंत्री का पशु-पक्षियों के प्रति यह आत्मीय व्यवहार वहां मौजूद लोगों के लिए यादगार पल बन गया।
गुरु गोरखनाथ और महंत अवेद्यनाथ को किया नमन
गोशाला जाने से पहले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गोरखनाथ मंदिर में शिवावतार महायोगी गुरु गोरखनाथ का विधि-विधान से दर्शन और पूजन किया। इसके बाद उन्होंने अपने गुरु ब्रह्मलीन महंत अवेद्यनाथ की समाधि पर पहुंचकर श्रद्धासुमन अर्पित किए और आशीर्वाद प्राप्त किया।
गोरखनाथ मंदिर से मुख्यमंत्री का संबंध केवल धार्मिक नहीं बल्कि आध्यात्मिक और सांस्कृतिक भी है। यही कारण है कि हर प्रवास के दौरान वह मंदिर की परंपराओं का पूरी श्रद्धा के साथ पालन करते हैं।
गोसेवा को बताते हैं सामाजिक जिम्मेदारी
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ लंबे समय से गोसंरक्षण और गोसेवा को भारतीय संस्कृति का अभिन्न हिस्सा बताते रहे हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद भी उन्होंने प्रदेशभर में गौशालाओं के विकास, निराश्रित गोवंश के संरक्षण और पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं शुरू की हैं।
उनका मानना है कि गोवंश की सुरक्षा और उचित देखभाल केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि सामाजिक और सांस्कृतिक दायित्व भी है।
गोशाला कर्मचारियों को दिए अहम निर्देश
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने गोशाला कर्मचारियों से कहा कि पशुओं के रहने की व्यवस्था, स्वच्छता, पेयजल और चिकित्सा सुविधाओं पर विशेष ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक गोवंश की नियमित स्वास्थ्य जांच सुनिश्चित की जाए ताकि किसी भी प्रकार की बीमारी का समय रहते उपचार किया जा सके।
उन्होंने यह भी कहा कि गोशाला की व्यवस्थाएं ऐसी हों जिससे पशुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
श्रद्धालुओं ने सराहा मुख्यमंत्री का सादगीपूर्ण व्यवहार
गोशाला में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का सहज और आत्मीय व्यवहार श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय बना रहा। कई श्रद्धालुओं ने कहा कि मुख्यमंत्री का गोसेवा के प्रति समर्पण उनकी सादगी और भारतीय संस्कृति के प्रति आस्था को दर्शाता है।
मंदिर परिसर में मौजूद लोगों ने मुख्यमंत्री के साथ तस्वीरें भी लीं और उनके इस मानवीय पक्ष की सराहना की।
हर गोरखपुर प्रवास में निभाते हैं यह परंपरा
गोरखनाथ मंदिर में मुख्यमंत्री का प्रवास केवल प्रशासनिक बैठकों तक सीमित नहीं रहता। वह हर बार मंदिर में पूजा-अर्चना, गुरु परंपरा का सम्मान और गोसेवा को अपनी दिनचर्या का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाते हैं।
यही वजह है कि मुख्यमंत्री का हर गोरखपुर दौरा स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखता है।
गोरखनाथ मंदिर प्रवास के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि जनसेवा के साथ-साथ गोसेवा भी उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा है। जनता दर्शन के बाद गोशाला में पहुंचकर गायों को अपने हाथों से गुड़-रोटी खिलाना, उनका हाल जानना, कर्मचारियों को बेहतर देखभाल के निर्देश देना और परिसर में मौजूद मोरों पर भी स्नेह बरसाना उनकी संवेदनशील कार्यशैली को दर्शाता है। मुख्यमंत्री का यह दौरा धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक परंपरा और पशु संरक्षण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का प्रतीक माना जा रहा है।

