प्रधानमंत्री: नरेंद्र मोदी के भाषण अक्सर गंभीर विषयों के साथ-साथ सहज और रोचक अंदाज के लिए भी चर्चा में रहते हैं। रविवार को गुजरात के साणंद (Sanand) में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जब उन्होंने लोकप्रिय वेब सीरीज ‘पंचायत’ के चर्चित डायलॉग की तर्ज पर कहा—“सुनते हो न विनोद…”।
जैसे ही प्रधानमंत्री ने यह संवाद बोला, कार्यक्रम में मौजूद हजारों लोग जोरदार ठहाके लगाने लगे। कुछ क्षणों के लिए पूरा सभागार हंसी से गूंज उठा। सोशल मीडिया पर भी यह वीडियो तेजी से वायरल हो गया और लोगों ने प्रधानमंत्री के इस हल्के-फुल्के अंदाज की जमकर चर्चा शुरू कर दी।
सेमीकंडक्टर प्लांट के उद्घाटन के दौरान आया मजेदार पल
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के साणंद में CG Semi OSAT (Outsourced Semiconductor Assembly and Test) सुविधा के उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। अपने भाषण के दौरान उन्होंने भारत के तेजी से बढ़ते सेमीकंडक्टर उद्योग की उपलब्धियों का जिक्र करते हुए कहा—
“सुनते हो न विनोद… ये जो तरक्की दिख रही है, ये जो अचीवमेंट दिख रही है, इसके पीछे मजबूत सप्लाई चेन तैयार करने का हमारा संकल्प है।”
प्रधानमंत्री के इस संवाद ने कार्यक्रम का माहौल हल्का और उत्साहपूर्ण बना दिया। उपस्थित लोगों ने तालियों और ठहाकों के साथ उनका स्वागत किया।
भारत बन रहा है सेमीकंडक्टर हब
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत अब केवल चिप्स का उपभोक्ता नहीं रहेगा, बल्कि दुनिया के लिए सेमीकंडक्टर निर्माण का बड़ा केंद्र बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि—
- चिप डिजाइन
- वेफर फैब्रिकेशन
- असेंबली
- टेस्टिंग
- पैकेजिंग
से लेकर पूरी वैल्यू चेन भारत में विकसित की जाए, ताकि देश तकनीकी क्षेत्र में आत्मनिर्भर बन सके।

महिला कर्मचारियों की जमकर सराहना
अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से उन महिलाओं का उल्लेख किया जो देश के दूरदराज़ और आदिवासी इलाकों से आकर इस आधुनिक तकनीकी उद्योग में काम कर रही हैं।
उन्होंने कहा कि—
“इनमें से कई बेटियां ऐसे गांवों से आती हैं जहां पहले उच्च शिक्षा या तकनीकी क्षेत्र में जाने की कल्पना भी नहीं की जाती थी। लेकिन आज वही बेटियां सेमीकंडक्टर तकनीक सीखकर भारत की तकनीकी क्रांति की भागीदार बन रही हैं।”
प्रधानमंत्री ने इसे ‘नारी शक्ति’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का सबसे मजबूत उदाहरण बताया।
महिला कर्मचारी ने सुनाई प्रेरणादायक कहानी
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने एक महिला कर्मचारी से बातचीत भी की।
महिला ने बताया कि उसके गांव में पहले लड़कियों को पढ़ाई या नौकरी के लिए बाहर भेजने की परंपरा नहीं थी। लेकिन जब वह सेमीकंडक्टर प्लांट में नौकरी करने लगी तो पूरे गांव की सोच बदलने लगी।
उसने कहा—
“अब गांव के लोग पूछते हैं कि मैं कहां काम करती हूं। मेरी सहेलियां भी यहां नौकरी करना चाहती हैं। मुझे आत्मनिर्भर बनने पर गर्व है।”
प्रधानमंत्री ने इस अनुभव को भारत में बदलती सामाजिक सोच का प्रतीक बताया।
भारत का सेमीकंडक्टर मिशन क्यों है अहम?
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में सेमीकंडक्टर उद्योग दुनिया की सबसे महत्वपूर्ण इंडस्ट्री में शामिल होगा।
मोबाइल फोन, इलेक्ट्रिक वाहन, मेडिकल उपकरण, रक्षा तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और सुपर कंप्यूटर जैसे लगभग हर आधुनिक उपकरण में चिप्स की आवश्यकता होती है।
भारत सरकार का लक्ष्य है कि देश आयात पर निर्भर रहने के बजाय घरेलू स्तर पर बड़े पैमाने पर चिप निर्माण करे।
सोशल मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
प्रधानमंत्री मोदी द्वारा बोले गए “सुनते हो न विनोद” वाले संवाद का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया।
यूजर्स ने इसे प्रधानमंत्री के सहज और लोकप्रिय संवाद शैली का उदाहरण बताया। कई लोगों ने लिखा कि लोकप्रिय संस्कृति का इस तरह सहज उपयोग प्रधानमंत्री के भाषणों को आम लोगों से जोड़ देता है।
हालांकि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भारत के सेमीकंडक्टर मिशन और तकनीकी विकास को गति देना था, लेकिन यह हल्का-फुल्का पल पूरे कार्यक्रम की सबसे चर्चित झलक बन गया।
भारत की तकनीकी ताकत बढ़ाने पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत अब केवल दुनिया का बाजार नहीं रहेगा, बल्कि तकनीकी नवाचार और निर्माण का वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने युवाओं से नई तकनीक सीखने, कौशल विकास अपनाने और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
गुजरात के साणंद में आयोजित कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का “सुनते हो न विनोद” वाला संवाद भले ही हल्के-फुल्के अंदाज में कहा गया हो, लेकिन उनके पूरे संबोधन का केंद्र भारत को वैश्विक सेमीकंडक्टर शक्ति बनाना, महिलाओं को तकनीकी क्षेत्र में आगे बढ़ाना और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करना रहा। यही वजह है कि यह भाषण मनोरंजन और विकास—दोनों कारणों से चर्चा का विषय बन गया।

