नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने देश की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि भारत की शिक्षा प्रणाली अब छात्रों के भविष्य को संवारने के बजाय उन्हें आर्थिक बोझ, तनाव और निराशा की ओर धकेल रही है। राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था को “बेईमान वसूली का तंत्र” करार देते हुए कहा कि अब देश में “शिक्षा में क्रांति” लाने का समय आ गया है।
राहुल गांधी ने यह बयान अपने ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के दूसरे चरण से पहले सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर साझा किया। उन्होंने छात्रों से 17 जुलाई को देहरादून में होने वाले कार्यक्रम में शामिल होने की भी अपील की।
शिक्षा व्यवस्था पर राहुल गांधी का बड़ा हमला
सोशल मीडिया पोस्ट में राहुल गांधी ने लिखा कि “भ्रष्ट, अन्यायी, पक्षपाती और बेईमानी” जैसे शब्द उनके नहीं, बल्कि देश के छात्रों के हैं, जो आज की शिक्षा व्यवस्था का वर्णन करते हैं।
उन्होंने कहा कि जिस शिक्षा प्रणाली का उद्देश्य युवाओं का भविष्य बनाना था, वही अब परिवारों को कर्ज, मानसिक तनाव और निराशा की ओर धकेल रही है। उनके अनुसार वर्तमान व्यवस्था में मेहनत करने वाले छात्रों को न्याय नहीं मिल रहा, जबकि भ्रष्टाचार को बढ़ावा मिल रहा है।
पेपर लीक और भ्रष्टाचार पर सरकार को घेरा
राहुल गांधी ने दावा किया कि शिक्षा व्यवस्था में फैले भ्रष्टाचार ने पेपर लीक माफिया को जन्म दिया है। उनका कहना है कि लाखों छात्र वर्षों तक प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं, लेकिन प्रश्नपत्र लीक होने की घटनाएं उनकी मेहनत पर पानी फेर देती हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे मामलों में जिम्मेदार लोगों पर कठोर कार्रवाई के बजाय उन्हें संरक्षण मिलता है, जबकि सबसे बड़ा नुकसान उन छात्रों को उठाना पड़ता है, जिनके सपने एक झटके में टूट जाते हैं।
शिक्षा मंत्री और केंद्र सरकार पर लगाए आरोप
राहुल गांधी ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान और मोदी सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि सरकार इस पूरे मुद्दे पर चुप्पी साधे हुए है।
उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने जवाबदेही से दूरी बना ली है और शिक्षा व्यवस्था में लगातार सामने आ रही समस्याओं पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। राहुल गांधी का कहना है कि छात्रों की परेशानियों पर चर्चा के बजाय इन मुद्दों को नजरअंदाज किया जा रहा है।

‘अब शिक्षा में क्रांति का समय’
कांग्रेस नेता ने कहा कि अब केवल शिकायत करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र में व्यापक बदलाव की जरूरत है। उन्होंने कहा कि ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जहां छात्रों को बड़े सपने देखने और उन्हें पूरा करने के समान अवसर मिलें।
उन्होंने युवाओं से अपील की कि वे शिक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए आवाज उठाएं और ‘छात्रों की गूंज’ अभियान को मजबूत बनाएं।
कोटा रैली में भी उठाए थे यही मुद्दे
इससे पहले राहुल गांधी ने 17 जून को राजस्थान के कोटा में आयोजित ‘छात्रों की गूंज’ अभियान की पहली रैली में भी शिक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए थे।
उस दौरान उन्होंने कहा था कि भारत की मौजूदा शिक्षा प्रणाली “चयन की नहीं, बल्कि अस्वीकृति की व्यवस्था” बन चुकी है। उनके अनुसार यह प्रणाली छात्रों और मध्यम वर्गीय परिवारों पर अत्यधिक आर्थिक और मानसिक दबाव डाल रही है।
उन्होंने कहा था कि शिक्षा का उद्देश्य प्रतिभा को आगे बढ़ाना होना चाहिए, लेकिन वर्तमान व्यवस्था छात्रों का आत्मविश्वास कमजोर कर रही है।
युवाओं की समस्याओं पर भी जताई चिंता
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में युवाओं के सामने मौजूद बेरोजगारी, प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितता, पेपर लीक और मानसिक तनाव जैसे मुद्दों का भी उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि आज देश के लाखों छात्र भविष्य को लेकर असमंजस और चिंता में हैं। ऐसे में शिक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और छात्र-केंद्रित बनाने की आवश्यकता है।
हालांकि, केंद्र सरकार की ओर से राहुल गांधी के इन आरोपों पर तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
राहुल गांधी ने शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार पर गंभीर सवाल उठाते हुए इसे भ्रष्टाचार और जवाबदेही की कमी से प्रभावित बताया है। उन्होंने छात्रों से बदलाव की मुहिम में शामिल होने की अपील की है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार इन आरोपों पर क्या प्रतिक्रिया देती है और शिक्षा सुधार को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं।

