नई दिल्ली: मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर तेजी से बढ़ता दिखाई दे रहा है। हालिया सैन्य घटनाक्रम के बाद अमेरिका और ईरान के बीच बयानबाजी बेहद तीखी हो गई है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच Truth Social पर दावा किया कि ईरान को निशाना बनाने के लिए 1,000 मिसाइलें “Locked and Loaded” स्थिति में तैयार हैं। वहीं दूसरी ओर ईरान के नए सर्वोच्च नेता अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने अपने पिता और पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत का बदला लेने का संकल्प दोहराया है।
इन बयानों के बाद पूरे पश्चिम एशिया में सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं। हालांकि, समानांतर रूप से कूटनीतिक स्तर पर तनाव कम करने की कोशिशें भी जारी हैं।
ट्रंप की कड़ी चेतावनी
डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया कि यदि ईरानी सरकार उनकी हत्या करने की कोशिश करती है या अमेरिका के शीर्ष नेतृत्व पर हमला होता है, तो अमेरिका अभूतपूर्व सैन्य कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी सेना को पहले से आवश्यक निर्देश दिए जा चुके हैं और जरूरत पड़ने पर लंबे समय तक सैन्य अभियान चलाने की क्षमता मौजूद है।
हालांकि, अमेरिकी संवैधानिक व्यवस्था के अनुसार किसी राष्ट्रपति द्वारा दिए गए ऐसे निर्देश स्वतः लागू नहीं होते। यदि किसी राष्ट्रपति के साथ असाधारण स्थिति उत्पन्न होती है, तो संवैधानिक प्रक्रिया के तहत उपराष्ट्रपति सेना के सर्वोच्च कमांडर की भूमिका संभालते हैं और आगे की कार्रवाई का निर्णय लेते हैं।
मोजतबा खामेनेई का जवाब
ईरानी सरकारी मीडिया के अनुसार नए सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई ने अपने संबोधन में कहा कि वह अपने पिता के खून का बदला लेने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि यह केवल उनका व्यक्तिगत संकल्प नहीं बल्कि पूरे ईरान की इच्छा है।
अपने संदेश में उन्होंने कहा कि देश किसी भी दबाव के सामने झुकेगा नहीं और परिस्थितियां चाहे जैसी भी हों, ईरान अपने रुख पर कायम रहेगा।

होर्मुज जलडमरूमध्य बना तनाव का बड़ा केंद्र
तनाव का एक महत्वपूर्ण केंद्र होर्मुज जलडमरूमध्य भी बना हुआ है, जो वैश्विक तेल आपूर्ति का प्रमुख समुद्री मार्ग माना जाता है।
अमेरिका ने ईरान से सार्वजनिक रूप से यह आश्वासन देने की मांग की है कि इस मार्ग से गुजरने वाले अंतरराष्ट्रीय जहाजों पर कोई हमला नहीं होगा और समुद्री व्यापार निर्बाध रूप से जारी रहेगा।
दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े सुरक्षा और नियंत्रण के फैसले उसकी संप्रभुता का विषय हैं।
कूटनीतिक प्रयास भी जारी
तनाव के बीच कूटनीतिक प्रयास भी तेज हो गए हैं। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ओमान पहुंचे हैं, जहां उनके ओमानी समकक्ष के साथ वार्ता प्रस्तावित है। इससे पहले कतर ने भी दोनों देशों के बीच बातचीत बहाल कराने की कोशिश की थी।
इसके अलावा पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने ईरान और कतर के नेताओं से अलग-अलग बातचीत कर अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता फिर से शुरू करने तथा क्षेत्रीय शांति बनाए रखने की अपील की है।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि संवाद आगे बढ़ता है तो क्षेत्र में बढ़ते तनाव को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है।
युद्ध की आशंका या कूटनीति?
हाल के दिनों में दोनों देशों के नेताओं की ओर से लगातार आ रहे आक्रामक बयान माहौल को और संवेदनशील बना रहे हैं। हालांकि अभी तक किसी नए बड़े सैन्य अभियान की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया की स्थिति बेहद नाजुक बनी हुई है। ऐसे में किसी भी पक्ष की आक्रामक कार्रवाई का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार, समुद्री व्यापार और क्षेत्रीय सुरक्षा पर पड़ सकता है।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर अब ओमान, कतर और अन्य मध्यस्थ देशों के कूटनीतिक प्रयासों पर टिकी हुई है।

